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बाघ के हमलों के 19 हताहतों में 11 को मिला मुआवजा

Mon, 21 Aug 2017 07:39 PM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 07:39 PM IST
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बाघ के हमलों के 19 हताहतों में 11 को मिला मुआवजा
पीलीभीत। पिछले नौ माह में बाघ के हमले में 19 लोग जान गवां चुके हैं। वन विभाग की जांच में 11 घटनाएं जंगल के बाहर होना पाया गया। इस पर सभी को मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी गई जबकि आठ घटनाएं जंगल के अंदर होने के चलते वन विभाग की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
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टाइगर रिजर्व के बाघों का हमला 24 अक्तूबर 2016 से शुरू हुआ। इसके बाद 18 अगस्त 2017 तक लगभग नौ माह में अलग अलग स्थानों पर बाघों के हमलों में 19 लोगों की जान गई। इनमें 28 नवंबर 2016 को पिपरिया के बाबराम, 11 दिसबंर 2016 को डगा के अहमद खां, 16 जनवरी 2017 को पिपरिया संतोष के छात्र राजीव कुमार, पांच फरवरी को धनीराम, सात फरवरी को नन्हेंलाल,, 11 फरवरी को गंगाराम, पांच मार्च को ब्रह्मस्वरूप, 20 जून को मिहीलाल और क्रमश: सात, आठ व 10 अगस्त को तसलीम अहमद, शमशुल रहमान व कुंवरसेन पर हमला जंगल के बाहर खेतों में हुआ था। इन सभी मृतकों के आश्रितों को वन विभाग की ओर से पांच पांच लाख रुपये का मुआवजा दे दिया गया है। वहीं 24 अक्तूबर 2016 को बेनीराम, इसके बाद मेघनाथ (लालाराम), कलीवती, श्यामबिहारी, ताराचंद्र (वाचर), केवल प्रसाद, ननकी देवी और दो दिन पूर्व रामचंद्र पर हुए हमले वन विभाग के अनुसार जंगल के अंदर हुए। इन मामलों में मुआवजा न देने का निर्णय लिया गया है। वनसंरक्षक वीके सिंह ने बताया सभी 19 मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया था जिसमें सभी हमले बाघ के पाए गए लेकिन एनटीसीए के गाइड लाइन के अनुसार जंगल के बाहर हमला होने पर ही मुआवजा देने का नियम है। इसलिए सभी 11 को मुआवजा दे दिया गया है। वन विभाग ने मुआवजे संबंधी कोई मामला लंबित नहीं रखा है।
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ताराचंद्र की मौत पर बना था हत्या का संशय
नौ माह में बाघों के हमलों में हुई 19 मौतों में एक मौत वन वाचर की भी शामिल है। नौ अप्रैल को वनकटी बीट में लगी आग बुझाते समय बाघ ने हमला कर मार डाला था। घटना के बाद उनके दोनों पैर घुटने से नीचे बराबर दूरी पर सीधे कटे होने और कई दिनों तक सिर न मिलने पर हत्या की आशंका व्यक्त की गई थी। चौथे दिन सिर का कंकाल मिलने पर भी तरह तरह की चर्चाएं हुई लेकिन घरवालों द्वारा सिर का कंकाल पहचान लेने और बाघ के हमले में मौत मान लेने पर सारे संशय खत्म हो गए।
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