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तो टाइगर रिजर्व में बढ़ रहे बाघ व तेंदुए कहा जाएंगे

Sun, 20 Jan 2019 10:54 PM IST
Prashant Singh Prashant Singh
Updated Sun, 20 Jan 2019 10:54 PM IST
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तो टाइगर रिजर्व में बढ़ रहे बाघ व तेंदुए कहा जाएंगे
माधोटांडा/ पीलीभीत। इंडो नेपाल बार्डर का सुरक्षित क्षेत्र जहां एक ओर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शारदा नदी व दूसरी ओर नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी हैं। यह समूचा इलाका जंगल का कोर जोन का क्षेत्र है, लेकिन यहां अवैध कब्जे नासूर बने हुए हैं। जंगल की भूमि पर कब्जा करके फसलें उगाई जा रही हैं। यही बजह है कि जंगल का दायरा कम होने से बाघ व तेंदुए की बढ़ रही संख्या उन्हें आबादी क्षेत्र की ओर निकलने पर मजबूर कर रही है।
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इंडो नेपाल बार्डर से सटा टाइगर रिजर्व का इलाका चौकसी के अभाव से खतरे में पड़ता जा रहा हैं। सीमा पिलर संख्या 24 से 29 तक के निकट लग्गा भग्गा का कोर जोन का क्षेत्र कहलाता है। हालांकि पेट्रोलिंग बहुत अधिक नहीं हो पाती, लेकिन एसएसबी और वनकर्मियों की चौकसी के चलते शिकारी सक्रिय नहीं हो पाते है। नदी के इस पार बंगाली कॉलोनियों के लोग रोजाना शारदा नदी के घंटों के रास्ते लग्गा भग्गा क्षेत्र से जलौनी लकड़ी लेने जाते हैं, वहीं लग्गा भग्गा से सटा पिलर संख्या 27 से 29 तक कोर जोन क्षेत्र होने के बावजूद वर्षों से अतिक्रमणकारियों का कब्जे है। जहां जंगलों को नष्ट करके फसलें उगाई जा रही है।
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शारदा नदी के पार वनभूमि पर अवैध कब्जे न हो पाएं इसके लिए वनकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा संयुक्त सीमांकन करने के भी प्रयास तेज चल रहे है। लग्गा भग्गा क्षेत्र में वनकर्मियों को गश्त में समस्या ना हो सके, इस लिए जल्द ही कुछ संसाधन मुहैया कराए जाएगें।
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आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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