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डीएम के निरीक्षण में हर कदम पर स्वास्थ्य विभाग फेल
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पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग के अफसर बंदोबस्त बेहतर होने का दावा करते नहीं थकते, लेकिन जब डीएम ने मौके पर पहुंचकर हकीकत परखी तो सच्चाई कुछ और ही निकली। हर कदम पर स्वास्थ्य विभाग डीएम के निरीक्षण में फेल साबित होता चला गया। न तो मरीजों से जुड़ी व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, न ही साफ-सफाई। स्टोर रूम में बेहताशा गंदगी मिली। निर्माणाधीन कॉम्पलेक्स में घटिया सामग्री के इस्तेमाल पर सीएमओ से जाहिर की और पीडब्ल्यूडी एक्सईन से जांच कराने के निर्देश दिए। दो साल बाद भी मदर चाइल्ड विंग की शुरुआत न किए जाने पर सीएमएस को जमकर फटकारा।
सोमवार दोपहर करीब सवा तीन बजे डीएम वैभव श्रीवास्तव ने प्रशासनिक अमले के साथ सबसे पहले जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। डीएम के साथ एडीएम प्रशासन अतुल सिंह, एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी आदि अफसर भी मौजूद थे। यहां सीएमएस कार्यालय, जनरल वार्ड, लेबर रूम आदि का निरीक्षण कर फीडबैक लिया। नसबंदी के आंकड़े पूछने के बाद लेबर रूम के डॉक्टर कक्ष में तैनात डॉ. विनीता चतुर्वेदी समेत अन्य स्टाफ से उनकी समस्या पूछी। इस पर डीएम के सामने ही डॉ. विनीता और सीएमएम उलझ पड़े। डीएम ने रोस्टर बनाकर ड्यूटी लगाने और तालमेल बनाए रखने निर्देश दिए। डायलसिस सेंटर के लिए चिह्नित स्थान को देखा। यहां बने कमरों में रखे सामान गंदगी से पटे देख डीएम ने नाराजगी जताई। अन्य स्थान चिह्नित कर डायलसिस सेंटर स्थापित करने की बात कही। पीछे की तरफ एमसीएच विंग की बिल्ड़िग देख डीएम का पारा चढ़ गया। महिला सीएमएस से कहां सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर बिल्डिंग बनवाई है। ओपीडी कक्ष, लिफ्ट आदि सभी सुविधाएं होने के बाद भी यहां सिर्फ ओपीडी होती है। यह शर्मनाक है। डीएम ने एक माह में महिला अस्पताल को एमसीएस बिल्डिंग में शिफ्ट करने की हिदायत दी। जिला पुरुष अस्पताल में मरीजों के वार्ड के पास ही स्टोर रूम का पता चलने पर जब कमरे का दरवाजा खुलवाया तो दो स्टोर गंदगी से पटे मिले। अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर भी कुछ जगह गंदगी दिखने पर डीएम ने नाराजगी जताई। डीएम ने इमरजेंसी, जनरल वार्ड, एनआरसी, बर्न वार्ड आदि का निरीक्षण किया। सीएमओ कार्यालय का निरीक्षण करने के दौरन कार्यालय गेट से लेकर मोर्चरी तक जलभराव देख डीएम ने तत्काल ईओ निशा मिश्रा को बुलाकर शीघ्र ही एक माह के भीतर इंटरलॉकिंग सड़क डलवाने के निर्देश दिए।
अब भी नहीं सुधरे तो होगा निलंबन
महिला अस्पताल में निरीक्षण के समय जब डीएम वैभव श्रीवास्तव लेबर रूम के डॉक्टर कक्ष में पहुंचे। तो यहां तैनात डॉक्टरों व स्टाफ नर्स से उनकी समस्याएं पूछी। इस पर डॉ. विनीता चतुर्वेदी ने सीएमएम डॉ. अनीता चौरसिया पर बेवजह उत्पीडन करने का आरोप लगाया। इधर, सीएमएस भी डीएम के सामने नहीं चूकीं। डॉ. विनीता के मुख्यालय पर नहीं रुकने और समय से ड्यूटी नहीं आने की बात कही। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने डॉ. विनीता चतुर्वेदी के मुख्यालय पर नहीं रुकने पर निलंबन की चेतावनी दे दी।
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पीली ईंट लगाई तो क्यों नहीं की कार्रवाई!
अस्पताल व सीएमओ कार्यालय के निरीक्षण के बाद जब डीएम वैभव श्रीवास्तव को अस्पताल गेट के पास मरीजों व उनके तीमारदारों की सहूलियत के लिए बनाए जा रहे निर्माणधीन कॉम्पलेक्स में घटिया साम्रगी लगाए जाने का पता चला तो वह वहां निरीक्षण करने पहुंचे। सीएमओ ने पीली ईंट लगाए जाने का मामला संज्ञान में आने पर ठेकेदार से ईंटें वापस कराए जाने की बात कही। इसे डीएम ने सीएमओ की लापरवाही बताया। नाराजगी जाहिर करने के साथ पीडब्ल्यूडी एक्सईन से निर्माणधीन कॉम्पलेक्स की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए।
ईओ ने की शिकायत तो फटकारे गए सीवीओ
जिला अस्पताल में आवारा सांड़ व कुछ अन्य पशुओं के घूमने पर डीएम ने नाराजगी जताई। इस पर ईओ को तत्काल बुला लिया गया। ईओ ने बताया कि शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए सीवीओ को कई बार फोन किया, लेकिन वह फोन रिसीव हीं नहीं करते। डीएम ने सीवीओ को मौके पर बुलाया और प्रतिदिन शहर में पकड़े जाने वाले पशुओं का आंकड़ा पूछा। सीवीओ की ओर से प्रतिदिन 10 से 12 पशुओं के पकड़ने की बात कही गई, इस पर डीएम ने सीवीओ डॉ. ज्ञान प्रकाश की जमकर फटकार लगाई। प्रतिदिन 20 से 25 पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए।
बताने के बाद भी नहीं संभाल पाए व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल व सीएमओ कार्यालय के निरीक्षण की कार्रवाई ऐसा नहीं कि औचक रूप से की गई। करीब तीन घंटे पहले डीएम ने एसीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता को यह बता दिया था कि वह निरीक्षण के लिए आएंगे। इसके बाद भी खामियों का भंडार मिला। या यं कहें कि अव्यवस्थाएं इतनी ज्यादा थीं कि चाहकर भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनको दुरुस्त करने में नाकाम रहे।
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सोमवार दोपहर करीब सवा तीन बजे डीएम वैभव श्रीवास्तव ने प्रशासनिक अमले के साथ सबसे पहले जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण किया। डीएम के साथ एडीएम प्रशासन अतुल सिंह, एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी आदि अफसर भी मौजूद थे। यहां सीएमएस कार्यालय, जनरल वार्ड, लेबर रूम आदि का निरीक्षण कर फीडबैक लिया। नसबंदी के आंकड़े पूछने के बाद लेबर रूम के डॉक्टर कक्ष में तैनात डॉ. विनीता चतुर्वेदी समेत अन्य स्टाफ से उनकी समस्या पूछी। इस पर डीएम के सामने ही डॉ. विनीता और सीएमएम उलझ पड़े। डीएम ने रोस्टर बनाकर ड्यूटी लगाने और तालमेल बनाए रखने निर्देश दिए। डायलसिस सेंटर के लिए चिह्नित स्थान को देखा। यहां बने कमरों में रखे सामान गंदगी से पटे देख डीएम ने नाराजगी जताई। अन्य स्थान चिह्नित कर डायलसिस सेंटर स्थापित करने की बात कही। पीछे की तरफ एमसीएच विंग की बिल्ड़िग देख डीएम का पारा चढ़ गया। महिला सीएमएस से कहां सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर बिल्डिंग बनवाई है। ओपीडी कक्ष, लिफ्ट आदि सभी सुविधाएं होने के बाद भी यहां सिर्फ ओपीडी होती है। यह शर्मनाक है। डीएम ने एक माह में महिला अस्पताल को एमसीएस बिल्डिंग में शिफ्ट करने की हिदायत दी। जिला पुरुष अस्पताल में मरीजों के वार्ड के पास ही स्टोर रूम का पता चलने पर जब कमरे का दरवाजा खुलवाया तो दो स्टोर गंदगी से पटे मिले। अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर भी कुछ जगह गंदगी दिखने पर डीएम ने नाराजगी जताई। डीएम ने इमरजेंसी, जनरल वार्ड, एनआरसी, बर्न वार्ड आदि का निरीक्षण किया। सीएमओ कार्यालय का निरीक्षण करने के दौरन कार्यालय गेट से लेकर मोर्चरी तक जलभराव देख डीएम ने तत्काल ईओ निशा मिश्रा को बुलाकर शीघ्र ही एक माह के भीतर इंटरलॉकिंग सड़क डलवाने के निर्देश दिए।
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अब भी नहीं सुधरे तो होगा निलंबन
महिला अस्पताल में निरीक्षण के समय जब डीएम वैभव श्रीवास्तव लेबर रूम के डॉक्टर कक्ष में पहुंचे। तो यहां तैनात डॉक्टरों व स्टाफ नर्स से उनकी समस्याएं पूछी। इस पर डॉ. विनीता चतुर्वेदी ने सीएमएम डॉ. अनीता चौरसिया पर बेवजह उत्पीडन करने का आरोप लगाया। इधर, सीएमएस भी डीएम के सामने नहीं चूकीं। डॉ. विनीता के मुख्यालय पर नहीं रुकने और समय से ड्यूटी नहीं आने की बात कही। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने डॉ. विनीता चतुर्वेदी के मुख्यालय पर नहीं रुकने पर निलंबन की चेतावनी दे दी।
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पीली ईंट लगाई तो क्यों नहीं की कार्रवाई!
अस्पताल व सीएमओ कार्यालय के निरीक्षण के बाद जब डीएम वैभव श्रीवास्तव को अस्पताल गेट के पास मरीजों व उनके तीमारदारों की सहूलियत के लिए बनाए जा रहे निर्माणधीन कॉम्पलेक्स में घटिया साम्रगी लगाए जाने का पता चला तो वह वहां निरीक्षण करने पहुंचे। सीएमओ ने पीली ईंट लगाए जाने का मामला संज्ञान में आने पर ठेकेदार से ईंटें वापस कराए जाने की बात कही। इसे डीएम ने सीएमओ की लापरवाही बताया। नाराजगी जाहिर करने के साथ पीडब्ल्यूडी एक्सईन से निर्माणधीन कॉम्पलेक्स की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए।
ईओ ने की शिकायत तो फटकारे गए सीवीओ
जिला अस्पताल में आवारा सांड़ व कुछ अन्य पशुओं के घूमने पर डीएम ने नाराजगी जताई। इस पर ईओ को तत्काल बुला लिया गया। ईओ ने बताया कि शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए सीवीओ को कई बार फोन किया, लेकिन वह फोन रिसीव हीं नहीं करते। डीएम ने सीवीओ को मौके पर बुलाया और प्रतिदिन शहर में पकड़े जाने वाले पशुओं का आंकड़ा पूछा। सीवीओ की ओर से प्रतिदिन 10 से 12 पशुओं के पकड़ने की बात कही गई, इस पर डीएम ने सीवीओ डॉ. ज्ञान प्रकाश की जमकर फटकार लगाई। प्रतिदिन 20 से 25 पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए।
बताने के बाद भी नहीं संभाल पाए व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल व सीएमओ कार्यालय के निरीक्षण की कार्रवाई ऐसा नहीं कि औचक रूप से की गई। करीब तीन घंटे पहले डीएम ने एसीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता को यह बता दिया था कि वह निरीक्षण के लिए आएंगे। इसके बाद भी खामियों का भंडार मिला। या यं कहें कि अव्यवस्थाएं इतनी ज्यादा थीं कि चाहकर भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनको दुरुस्त करने में नाकाम रहे।