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ब्लैक स्पॉट पर नहीं है जेबरा लाइन, स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड
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पीलीभीत। वाहनों की रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की जानकारी न होना लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। सड़क हादसे में हर साल सैकड़ों लोग जान अपनी गंवा रहे हैं। तराई के जिले पीलीभीत की बात करें तो पांच साल में 1855 सड़क हादसे हुए। इनमें 744 लोगों की जान गई जबकि 1341 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इन सबके पीछे अधिकारियों की लापरवाही भी सबसे बड़ी वजह निकलकर सामने आई है। जिले में जो 24 एक्सीडेंट जोन चिह्नित किए गए हैं लेकिन वहां पर ट्रैफिक से जुड़े कोई साइन बोर्ड तक नहीं लगे हैं। जो कि सड़क हादसों का प्रमुख कारण बन रहा है।
जिले में हैं 24 ब्लैक स्पॉट
जिले में कुल 24 ब्लॅक स्पॉट हैं। इनमें नकटादाना चौराहा, यशवंतरी चौराहा, नेहरू पार्क से जिला अस्पताल, असम चौराहा से जिला अस्पताल, जंगरौली पुल, पौटा खमरिया, जंगरौली गांव, असम हाईवे का बरहा मोड़, पौटा खमरिया, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल, कस्बा बरखेड़ा, पतरासा मोड़, जोगीठेर, परसिया, भड़रिया मोड़, टनकपुर हाईवे पर कस्बा न्यूरिया, बरेली हाईवे पर ललौरीखेड़ा, शाही, खमरिया पुल, कैंच, बिठौरा, मुड़ैलाकलां, मथना, पूरनपुर बाईपास कस्बा शामिल हैं। मजे की बात यह है कि अधिकतर जगहों पर ट्रैफिक से जुड़े साइन बोर्ड तक नहीं हैं। जबकि, बीते दिनों हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लखनऊ में यातायात पुलिस और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की एक बैठक हुई थी। इसमें हादसों की रोकथाम के लिए चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर स्पीड ब्रेकर, जेबरा लाइन, संकेतांक बोर्ड, सड़कों का सुधार कराने, रिफ्लेक्टर लाइट लगवाने समेत कई प्रस्ताव पास किए गए थे। इनको अब तक शुरू नहीं कराया जा सका है। ये सभी काम पीडब्ल्यूडी के द्वारा होने थे।
यह भी हादसे की एक वजह
पुलिस अधिकारियों की मानें तो वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस की कमी और यातायात नियमों को लेकर बरती जा रही अनदेखी काफी हद तक जिम्मेदार है। सुरक्षित सफर की बात तो हर कोई करना चाहता है, लेकिन खुद इसको लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती। बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग करना बाइकर्स का शौक सा बन गया है। ओवरटेक करते वक्त भी रफ्तार के साथ-साथ सावधानियां न बरतना भी कई बार हादसों में अहम वजह बनकर सामने आया है। वाहन चलाते वक्त बिना संकेत अचानक मोड़ देना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, स्पीड नियंत्रित न होना भी आम बात है।
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सड़क हादसों को लेकर भेजी गई स्टोरी का जोड़....
जागरूकता अभियान चलाया लेकिन असर नहीं
टीएसआई आलोक मिश्र ने बताया कि लोगों को यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए काफी प्रयास किए जाते हैं। जागरूकता संबंधी फ्लैक्सी, पोस्टर आदि भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगवाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों एवं वाहन चालकों की कार्यशाला का आयोजन भी समय-समय पर किया जाता है।
प्रतिदिन करीब 150 चालान
यातायात और थाना पुलिस की ओर से करीब डेढ़ सौ चालान प्रतिदिन किए जाते हैं। बीते माह नवंबर अभियान में भी जिले में बड़ी संख्या में ना सिर्फ चालान किए गए, बल्कि 25 लाख का जुर्माना भी वाहन चालकों से वसूल किया गया था।
वहनों की संख्या
- 2.10 लाख दुपहिया वाहन हैं जिले में।
- 40 हजार चार पहिया वाहन हैं जिले में।
हर साल बढ़ रहा हादसों में मरने वालों की संख्या
वर्ष - हादसे - घायल - मृतक
2014 - 370 - 249 - 136
2015 - 345 - 256 - 126
2016 - 376 - 287 - 155
2017 - 409 - 314 - 166
2018 - 355 - 235 - 161
सड़क हादसों की अहम वजह वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस की कमी और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का अभाव है। इसको लेकर जागरूकता के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्रवाई भी लगातार की जा रही है, लेकिन चालक जागरूक नहीं हो सके हैं। इसको लेकर वाहन चालक और उनके परिवार को भी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी इसकी संख्या को कम किया जा सकेगा। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ ट्रैफिक
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जिले में हैं 24 ब्लैक स्पॉट
जिले में कुल 24 ब्लॅक स्पॉट हैं। इनमें नकटादाना चौराहा, यशवंतरी चौराहा, नेहरू पार्क से जिला अस्पताल, असम चौराहा से जिला अस्पताल, जंगरौली पुल, पौटा खमरिया, जंगरौली गांव, असम हाईवे का बरहा मोड़, पौटा खमरिया, बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल, कस्बा बरखेड़ा, पतरासा मोड़, जोगीठेर, परसिया, भड़रिया मोड़, टनकपुर हाईवे पर कस्बा न्यूरिया, बरेली हाईवे पर ललौरीखेड़ा, शाही, खमरिया पुल, कैंच, बिठौरा, मुड़ैलाकलां, मथना, पूरनपुर बाईपास कस्बा शामिल हैं। मजे की बात यह है कि अधिकतर जगहों पर ट्रैफिक से जुड़े साइन बोर्ड तक नहीं हैं। जबकि, बीते दिनों हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लखनऊ में यातायात पुलिस और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की एक बैठक हुई थी। इसमें हादसों की रोकथाम के लिए चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर स्पीड ब्रेकर, जेबरा लाइन, संकेतांक बोर्ड, सड़कों का सुधार कराने, रिफ्लेक्टर लाइट लगवाने समेत कई प्रस्ताव पास किए गए थे। इनको अब तक शुरू नहीं कराया जा सका है। ये सभी काम पीडब्ल्यूडी के द्वारा होने थे।
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यह भी हादसे की एक वजह
पुलिस अधिकारियों की मानें तो वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस की कमी और यातायात नियमों को लेकर बरती जा रही अनदेखी काफी हद तक जिम्मेदार है। सुरक्षित सफर की बात तो हर कोई करना चाहता है, लेकिन खुद इसको लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती। बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग करना बाइकर्स का शौक सा बन गया है। ओवरटेक करते वक्त भी रफ्तार के साथ-साथ सावधानियां न बरतना भी कई बार हादसों में अहम वजह बनकर सामने आया है। वाहन चलाते वक्त बिना संकेत अचानक मोड़ देना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, स्पीड नियंत्रित न होना भी आम बात है।
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सड़क हादसों को लेकर भेजी गई स्टोरी का जोड़....
जागरूकता अभियान चलाया लेकिन असर नहीं
टीएसआई आलोक मिश्र ने बताया कि लोगों को यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए काफी प्रयास किए जाते हैं। जागरूकता संबंधी फ्लैक्सी, पोस्टर आदि भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगवाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों एवं वाहन चालकों की कार्यशाला का आयोजन भी समय-समय पर किया जाता है।
प्रतिदिन करीब 150 चालान
यातायात और थाना पुलिस की ओर से करीब डेढ़ सौ चालान प्रतिदिन किए जाते हैं। बीते माह नवंबर अभियान में भी जिले में बड़ी संख्या में ना सिर्फ चालान किए गए, बल्कि 25 लाख का जुर्माना भी वाहन चालकों से वसूल किया गया था।
वहनों की संख्या
- 2.10 लाख दुपहिया वाहन हैं जिले में।
- 40 हजार चार पहिया वाहन हैं जिले में।
हर साल बढ़ रहा हादसों में मरने वालों की संख्या
वर्ष - हादसे - घायल - मृतक
2014 - 370 - 249 - 136
2015 - 345 - 256 - 126
2016 - 376 - 287 - 155
2017 - 409 - 314 - 166
2018 - 355 - 235 - 161
सड़क हादसों की अहम वजह वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस की कमी और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का अभाव है। इसको लेकर जागरूकता के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्रवाई भी लगातार की जा रही है, लेकिन चालक जागरूक नहीं हो सके हैं। इसको लेकर वाहन चालक और उनके परिवार को भी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी इसकी संख्या को कम किया जा सकेगा। - धर्म सिंह मार्छाल, सीओ ट्रैफिक