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नौ माह में 15 मौत, आखिर कब होगी बाघों से सुरक्षा
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 05 Jul 2017 10:54 PM IST
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पिछले नौ माह में बाघ के हमलों में 15 जानें जा चुकी हैं, लेकिन शासन प्रशासन इसे रोकने को कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। टाइगर रिजर्व बनने के तीन साल बाद भी तार फेसिंग को बजट नहीं मिला है वहीं गांव में शौचालय न होने के चलते आज भी ग्रामीणों को जंगल किनारे खुले में शौच जाना पड़ता है। पीलीभीत के जंगलों को तीन साल पहले टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इससे कुछ दिन पूर्व यह वन्यजीव विहार के रूप में भी रहा, लेकिन वन्यजीव विहार और टाइगर रिजर्व बनने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भी व्यवस्थाओं और आम जनता की सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। हां जंगल में आम जनता का प्रवेश रूकने से बाघों की आबादी तो बढ़ी है, लेकिन जंगल की तार फेसिंग न होने से बाघ बाहर किसानों के खेतों में आकर हमला कर रहे हैं। वहीं जंगल से सटे गांव में कुकिंग गैस कनेक्शन और गैस आपूर्ति की व्यवस्था न होने कारण ग्रामीण ईंधन लेने को जंगल में जाते हैं। इससे अक्सर वह बाघ अथवा अन्य जीवों के शिकार बन रहे हैं।
तार फेसिंग को नहीं मिली राशि
टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में करीब 165 किमी में सोलर तार फेसिंग कराने को 6.50 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिली है। सोलर तार फेसिंग न होने से बाघ एवं वन्यजीव बाहर आ रहे हैं, जिससे आए दिन घटनाएं को रही है।
गांवों में नहीं शौचालय
जंगल किनारे बसे कई गांवों के अधिकांश घरों में शौचालय नहीं है। इससे लोगों को खुले में शौच के लिए जंगल किनारे या खेतों में जाना पड़ता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को ओडीएफ किया जा रहा है। इसके तहत जंगल किनारे के 99 गांव को चिह्नित किया गया है। इन गांवों में बेस लाइन सर्वे के अनुसार लगभग 36 हजार शौचालयों का निर्माण होना है, लेकिन धनराशि न होने के चलते फिलहाल प्रत्येक गांव में 38-38 लाभार्थियों के खाते में ही धनराशि भेजी जा रही है। यानि 36 हजार के सापेक्ष लगभग 36 सौ शौचालय बनाए जाएंगे।
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तार फेसिंग को नहीं मिली राशि
टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में करीब 165 किमी में सोलर तार फेसिंग कराने को 6.50 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिली है। सोलर तार फेसिंग न होने से बाघ एवं वन्यजीव बाहर आ रहे हैं, जिससे आए दिन घटनाएं को रही है।
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गांवों में नहीं शौचालय
जंगल किनारे बसे कई गांवों के अधिकांश घरों में शौचालय नहीं है। इससे लोगों को खुले में शौच के लिए जंगल किनारे या खेतों में जाना पड़ता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को ओडीएफ किया जा रहा है। इसके तहत जंगल किनारे के 99 गांव को चिह्नित किया गया है। इन गांवों में बेस लाइन सर्वे के अनुसार लगभग 36 हजार शौचालयों का निर्माण होना है, लेकिन धनराशि न होने के चलते फिलहाल प्रत्येक गांव में 38-38 लाभार्थियों के खाते में ही धनराशि भेजी जा रही है। यानि 36 हजार के सापेक्ष लगभग 36 सौ शौचालय बनाए जाएंगे।
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