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नहीं छंट रहे बेसिक शिक्षा के बदहाली के दिन
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पीलीभीत। बेसिक शिक्षा में बदहाली के दिन छंट नहीं रहे हैं। करीब 100 से अधिक परिषदीय स्कूल एकल शिक्षकों और 30 से ज्यादा विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। ऐसे हालात में गुणवत्ता परक शिक्षा की उम्मीद करना बेमानी होगा।
बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जिले में 1230 प्राथमिक और 570 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। साल भर में करीब 300 करोड़ रुपये का बजट खर्च किए जाने के बावजूद बेसिक शिक्षा की स्थिति बदतर है। जिले में 130 स्कूलों में पढ़ाई चौपट है। वर्तमान में करीब 100 स्कूलों में एकल शिक्षकों और करीब 30 स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं।
शहर में आठ स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे
शहर के आठ स्कूल शिक्षामित्र के सहारे चल रहे हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय इनायतगंज नंबर एक और नंबर दो, प्राथमिक विद्यालय काला मंदिर एक और दो, प्राथमिक विद्यालय खुदागंज नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय खैरुल्लाशाह और प्राथमिक विद्यालय डालचंद हैं।
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पढ़ाएंगे शिक्षामित्र, एमडीएम बनवाएंगे शिक्षक
जिन 30 प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक तैनात नहीं हैं। नियमानुसार एमडीएम और विभाग के कई अन्य कार्य शिक्षामित्रों से नहीं कराए जा सकते है। ऐसी दशा में शिक्षामित्र वाले स्कूलों में एमडीएम और विद्यालय के दूसरे कार्यों की जिम्मेदारी पड़ोस के स्कूलों में तैनात शिक्षकों को दे दिए हैं।इससे उन स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जिले में 1230 प्राथमिक और 570 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। साल भर में करीब 300 करोड़ रुपये का बजट खर्च किए जाने के बावजूद बेसिक शिक्षा की स्थिति बदतर है। जिले में 130 स्कूलों में पढ़ाई चौपट है। वर्तमान में करीब 100 स्कूलों में एकल शिक्षकों और करीब 30 स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं।
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शहर में आठ स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे
शहर के आठ स्कूल शिक्षामित्र के सहारे चल रहे हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय इनायतगंज नंबर एक और नंबर दो, प्राथमिक विद्यालय काला मंदिर एक और दो, प्राथमिक विद्यालय खुदागंज नंबर एक, प्राथमिक विद्यालय खैरुल्लाशाह और प्राथमिक विद्यालय डालचंद हैं।
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पढ़ाएंगे शिक्षामित्र, एमडीएम बनवाएंगे शिक्षक
जिन 30 प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक तैनात नहीं हैं। नियमानुसार एमडीएम और विभाग के कई अन्य कार्य शिक्षामित्रों से नहीं कराए जा सकते है। ऐसी दशा में शिक्षामित्र वाले स्कूलों में एमडीएम और विद्यालय के दूसरे कार्यों की जिम्मेदारी पड़ोस के स्कूलों में तैनात शिक्षकों को दे दिए हैं।इससे उन स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।