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आखिर कैसे दूर होंगी गन्ना किसानों की मुश्किलें
Updated Thu, 17 May 2018 01:52 AM IST
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आखिर कैसे दूर होंगी गन्ना किसानों की मुश्किलें
खेतों में खड़ा 17 लाख क्विंटल गन्ना, फिर भी बंदी का नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
जिले में गन्ने की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। खेत में खड़े सूख रहे गन्ने को पर्चियां नहीं मिल रही हैं वहीं जो गन्ना मिलों को बेचा जा चुका है उसका भुगतान नहीं हो रहा है। शहर की एलएच चीनी मिल ने बंदी का पहली नोटिस जारी कर दिया है जबकि समिति क्षेत्र में लगभग 17 लाख क्विंटल गन्ना शेष है। इसकी जानकारी होने पर बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी पहुंचकर गन्ना पर्चियों की मांग कर रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समिति पर पुलिस लगानी पड़ी।
जिले की चारों चीनी मिलों में पूरनपुर की सहकारी और बरखेड़ा की बजाज मिल बंद हो चुकी है। वर्तमान में बीसलपुर की सहकारी चीनी और शहर की एलएच शुगर मिल चल रही है। यह दोनों मिलें भी बंदी के कगार पर हैं। जबकि बड़ी संख्या में किसानों का गन्ना अब भी खेत में खड़ा है। पीलीभीत सहकारी समिति की बात करें तो 16.70 लाख क्विंटल गन्ना अभी बाकी है जिसमें 10.59 लाख मिल गेट और 5.97 लाख क्विंटल सेंटर एट गेट का है। इसके अलावा खराबी के कारण बंद हुई पूरनपुर सहकारी मिल का भी लगभग 50 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई भी एलएच मिल को करनी है। इस तरह लगभग 17 लाख गन्ने की पेराई अभी की जानी है। इसके बाद भी मिल ने 20 मई को मिल बंदी का पहला नोटिस जारी कर दिया है। बंदी नोटिस जारी होने की सूचना पर बड़ी संख्या में किसान गन्ना समिति पहुंच रहे हैं। इसको लेकर देखते हुए समिति पर पुलिस तैनात करनी पड़ी है। पुलिस की मौजूदगी में सचिव जितेंद्र कुमार ने किसानों के प्रार्थनापत्र लेकर पर्चियां निकलवाना शुरू किया है। हालांकि सचिव का दावा है जो गन्ना खड़ा है उनमें काफी मात्रा बीज के लिए रोके गए गन्ने की भी है। सभी किसानों का गन्ना पेराई करने के बाद ही मिल बंद होने दी जाएगी।
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मिलों पर गन्ना मूल्य का बकाया है 415 करोड़
पीलीभीत। एक ओर गन्ना किसान पर्चियां न मिलने से परेशान हैं वहीं दूसरी ओर उनका भुगतान नहीं हो रहा है। जिले की चारों मिलों की बात करें तो किसानों का 415 करोड़ रुपया बाकी है। इसमें बरखेड़ा स्थित बजाज मिल पर सर्वाधिक 195 करोड़ है। एलएच मिल ने मंगलवार शाम को ही 22 करोड़ रुपया किसानों के खातों में भेजा है। इसके बाद भी मिल पर 122 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं दोनों सहकारी मिलों की बात करें तो पूरनपुर पर 40.93 करोड़ एवं बीसलपुर पर 56.28 करोड़ रुपया बकाया है।
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किसानों तक नहीं पहुंच रही पर्चियां
चीनी मिल और गन्ना विभाग की मिलीभगत के चलते किसानों का शोषण किया जा रहा है। इंडेंट खत्म करने को समिति से पर्चियां जारी तो की जा रही है लेकिन किसानों तक न पहुंचकर बीच में ही नष्ट की जा रही है जिससे किसान परेशान हैं। मुझे 12 पर्चियों में सिर्फ चार पर्चियां मिली हैं जबकि छह ट्रॉली गन्ना बाकी है।
- भगवानदास, गौहनिया
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रातों को उखाड़ रहे क्रय केंद्र
क्रय केंद्र की पर्चियों पर गन्ना न मिलना दर्शाकर रात को क्रय केंद्र के कांटे उखाड़े जा रहे हैं। क्षेत्र के जिम्मेदार किसानों अथवा संबंधित प्रधानों से लिखवाने के बाद ही क्रय केंद्र बंद कर कांटा उखाड़ना चाहिए। अब किसान जाए तो भी तो कहां।
- गेंदनलाल, नदहा
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मिल के गेट क्षेत्र का ही गन्ना बाकी बचा है जिसके लिए लगातार पर्चियां जारी की जा रही है। सर्वे के बाद क्षेत्र में शेष बच्चे गन्ने को देखते हुए ही बंदी की पहली नोटिस जारी की गई है। सभी किसानों का गन्ना पेरने के बाद ही मिल बंद की जाएगी।
- केवी शर्मा, जीएम गन्ना एलएच मिल
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आखिर कैसे दूर होंगी गन्ना किसानों की मुश्किलें
खेतों में खड़ा 17 लाख क्विंटल गन्ना, फिर भी बंदी का नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
जिले में गन्ने की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। खेत में खड़े सूख रहे गन्ने को पर्चियां नहीं मिल रही हैं वहीं जो गन्ना मिलों को बेचा जा चुका है उसका भुगतान नहीं हो रहा है। शहर की एलएच चीनी मिल ने बंदी का पहली नोटिस जारी कर दिया है जबकि समिति क्षेत्र में लगभग 17 लाख क्विंटल गन्ना शेष है। इसकी जानकारी होने पर बड़ी संख्या में किसान सोसाइटी पहुंचकर गन्ना पर्चियों की मांग कर रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समिति पर पुलिस लगानी पड़ी।
जिले की चारों चीनी मिलों में पूरनपुर की सहकारी और बरखेड़ा की बजाज मिल बंद हो चुकी है। वर्तमान में बीसलपुर की सहकारी चीनी और शहर की एलएच शुगर मिल चल रही है। यह दोनों मिलें भी बंदी के कगार पर हैं। जबकि बड़ी संख्या में किसानों का गन्ना अब भी खेत में खड़ा है। पीलीभीत सहकारी समिति की बात करें तो 16.70 लाख क्विंटल गन्ना अभी बाकी है जिसमें 10.59 लाख मिल गेट और 5.97 लाख क्विंटल सेंटर एट गेट का है। इसके अलावा खराबी के कारण बंद हुई पूरनपुर सहकारी मिल का भी लगभग 50 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई भी एलएच मिल को करनी है। इस तरह लगभग 17 लाख गन्ने की पेराई अभी की जानी है। इसके बाद भी मिल ने 20 मई को मिल बंदी का पहला नोटिस जारी कर दिया है। बंदी नोटिस जारी होने की सूचना पर बड़ी संख्या में किसान गन्ना समिति पहुंच रहे हैं। इसको लेकर देखते हुए समिति पर पुलिस तैनात करनी पड़ी है। पुलिस की मौजूदगी में सचिव जितेंद्र कुमार ने किसानों के प्रार्थनापत्र लेकर पर्चियां निकलवाना शुरू किया है। हालांकि सचिव का दावा है जो गन्ना खड़ा है उनमें काफी मात्रा बीज के लिए रोके गए गन्ने की भी है। सभी किसानों का गन्ना पेराई करने के बाद ही मिल बंद होने दी जाएगी।
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मिलों पर गन्ना मूल्य का बकाया है 415 करोड़
पीलीभीत। एक ओर गन्ना किसान पर्चियां न मिलने से परेशान हैं वहीं दूसरी ओर उनका भुगतान नहीं हो रहा है। जिले की चारों मिलों की बात करें तो किसानों का 415 करोड़ रुपया बाकी है। इसमें बरखेड़ा स्थित बजाज मिल पर सर्वाधिक 195 करोड़ है। एलएच मिल ने मंगलवार शाम को ही 22 करोड़ रुपया किसानों के खातों में भेजा है। इसके बाद भी मिल पर 122 करोड़ रुपया बकाया है। वहीं दोनों सहकारी मिलों की बात करें तो पूरनपुर पर 40.93 करोड़ एवं बीसलपुर पर 56.28 करोड़ रुपया बकाया है।
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किसानों तक नहीं पहुंच रही पर्चियां
चीनी मिल और गन्ना विभाग की मिलीभगत के चलते किसानों का शोषण किया जा रहा है। इंडेंट खत्म करने को समिति से पर्चियां जारी तो की जा रही है लेकिन किसानों तक न पहुंचकर बीच में ही नष्ट की जा रही है जिससे किसान परेशान हैं। मुझे 12 पर्चियों में सिर्फ चार पर्चियां मिली हैं जबकि छह ट्रॉली गन्ना बाकी है।
- भगवानदास, गौहनिया
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रातों को उखाड़ रहे क्रय केंद्र
क्रय केंद्र की पर्चियों पर गन्ना न मिलना दर्शाकर रात को क्रय केंद्र के कांटे उखाड़े जा रहे हैं। क्षेत्र के जिम्मेदार किसानों अथवा संबंधित प्रधानों से लिखवाने के बाद ही क्रय केंद्र बंद कर कांटा उखाड़ना चाहिए। अब किसान जाए तो भी तो कहां।
- गेंदनलाल, नदहा
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मिल के गेट क्षेत्र का ही गन्ना बाकी बचा है जिसके लिए लगातार पर्चियां जारी की जा रही है। सर्वे के बाद क्षेत्र में शेष बच्चे गन्ने को देखते हुए ही बंदी की पहली नोटिस जारी की गई है। सभी किसानों का गन्ना पेरने के बाद ही मिल बंद की जाएगी।
- केवी शर्मा, जीएम गन्ना एलएच मिल