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सर्राफा का कारोबार, अन्य ट्रेड के भी घटे ग्राहक
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:14 PM IST
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नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर प्रबुद्ध बोले- नोटबंदी एक लक्ष्यहीन सनसनीखेज कवायद
व्यापारी बोले दिक्कत तो है, लेकिन जल्द ढर्रे पर आ जाएगा कारोबार
नोटबंदी को बुधवार को एक साल पूरे हो रहे हैं। कारोबार से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर पूरे साल चर्चा होती रही। इसका असर लगभग हर तबके के लोगों व व्यापारियों पर भी कुछ हद तक पड़ा। व्यापार जगत को झटका जरूर लगा, लेकिन अब इससे लोग धीरे-धीरे उबर रहे हैं। मौजूदा मंदी का थोड़ा बहुत कारण जीएसटी को जुलाई से लागू करना है। यह कहना है विभिन्न ट्रेड के कारोबारियों का। सराफा कारोबार इससे घटा है। वहीं इलेक्ट्रानिक्स, ऑटोमोबाइल, रेडीमेड समेत रिटेल कारोबार के ग्राहकों में भी कमी आई, लेकिन उनका मानना है कि शुरूआती दौर की समस्या से अब लोग उबर रहे हैं। नौकरीपेशा व आम आदमी खुद को इससे अब कोई परेशानी न होना मान रहे हैं। वहीं अर्थशास्त्री के मुताबिक नोटबंदी से देश की इकोनामी पिछड़ी है और इसका असर अभी आगे भी रहेगा।
नोटबंदी से सर्वाधिक प्रभावित रहा सराफा बाजार
नोटबंदी से सराफा बाजार सर्वाधिक प्रभावित हुआ और एक साल होने के बाद भी बाजार इससे उबर नहीं सका है। हाल ही में धनतेरस पर पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी कारोबार नोटबंदी का नतीजा है। बची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी। ग्राहक भी तेजी से घटे हैं।
शैली अग्रवाल, महामंत्री, सर्राफा एसोसिएशन
10 से 20 फीसदी घटा ऑटोमोबाइल बाजार
एक साल में ही नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी से ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार घटा है। नोटबंदी से ग्राहकों के पास नकदी की कमी रही और इसका असर सीधे कारोबार पर पड़ा। कुछ मिलाकर देखा जाए तो 10 से 20 फीसदी तक कारोबार प्रभावित हुआ है।
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राजककुमार अग्रवाल, ऑटोमाबाइल कारोबारी
रेडीमेड बाजार में घटे ग्राहक
नोटबंदी से रेडीमेड बाजार में ग्राहक घटे हैं, लेकिन कारोबार पर इसका कोई खासा असर नही है। नोटबंदी व जीएसटी एक साथ होने से ग्राहक अब सोच समझकर ही बाजार में आ रहे हैं। नोटबंदी से ट्रांजेक्शन को लेकर काफी सुविधा हुई है। बैंक जाना भी बच गया, लेकिन जो कलेक्शन चार्ज लिया जा रहा है, उसे बंद किया जाना चाहिए।
अनिल मैनी, रेडीमेड कारोबारी
इलेक्ट्रानिक्स बाजार में कोई असर नहीं
शुरूआती दौर में नोटबंदी का असर तो लगभग हर ट्रेड में देखने को मिला। व्यापार जगत में इसको लेकर काफी उथलपुथल रही, लेकिन अब कारोबारी इससे उबर चुके हैं। यह सच है कि रिटेल बाजार में ग्राहकों की संख्या घटी है, लेकिन होलसेल में इसका अब कोई असर नहीं है।
अवधेश कुमार, इलेक्ट्रानिक कारोबारी
नौकरीपेशा व आम आदमी को कोई दिक्कत नहीं
नोटबंदी से शुरूआती दौर में कुछ समस्याएं जरूर आई, लेकिन अब सबकुछ ट्रैक पर आ चुका है। मध्यमवर्गीय परिवारों को नोटबंदी से कोई परेशानी नहीं हुई। ई-ट्रांजेक्शन होने से काफी सहुलियतें हुई हैं।
राखी मिश्रा, प्रवक्ता, उपाधि महाविद्यालय
बैकिंग सेक्टर में बढ़ी सुविधाएं
बैकिंग सेक्टर में सुविधाएं बढ़ी हैं। नोटबंदी से बैंकों की नकदी बढ़ी है। होम लोन समेत लोन पर ब्याज दर कम होने से उपभोक्ताओं को फायदा हुआ है। टैक्स का दायरा बढ़ाने में भी नोटबंदी मददगार रही है। वहीं नोटबंदी से सोच बदली है। इससे डिजिटल ट्रांजेक्शन तेजी से आगे बढ़ा है। बैंकों में काम का बोझ भी काफी हद तक कम हुआ है।
नीतीश सक्सेना, अपर अग्रणी बैंक प्रबंधक
नोटबंदी एक लक्ष्यहीन सनसनीखेज कवायद
नोटबंदी एक लक्ष्यहीन सनसनीखेज कवायद है। जिसकी वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था की चूलें हिल गई। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) प्रभावित हुई। कुल मिलाकर धरातल पर तो यही नजर आ रहा है। कालेधन पर अंकुश लगाने की बात भी कहीं नजर नहीं आ रही है। मध्यमवर्ग समेत असंगठित क्षेत्र जिसका देश की अर्थ व्यवस्था में करीब 45 फीसदी योगदान है, आज भी नोटबंदी के कहर से कराह रही है। नोटबंदी का असर अभी एक दो साल तक रहेगा।
डॉ. अंग्रेज सिंह, अर्थशास्त्र प्रवक्ता
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व्यापारी बोले दिक्कत तो है, लेकिन जल्द ढर्रे पर आ जाएगा कारोबार
नोटबंदी को बुधवार को एक साल पूरे हो रहे हैं। कारोबार से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर पूरे साल चर्चा होती रही। इसका असर लगभग हर तबके के लोगों व व्यापारियों पर भी कुछ हद तक पड़ा। व्यापार जगत को झटका जरूर लगा, लेकिन अब इससे लोग धीरे-धीरे उबर रहे हैं। मौजूदा मंदी का थोड़ा बहुत कारण जीएसटी को जुलाई से लागू करना है। यह कहना है विभिन्न ट्रेड के कारोबारियों का। सराफा कारोबार इससे घटा है। वहीं इलेक्ट्रानिक्स, ऑटोमोबाइल, रेडीमेड समेत रिटेल कारोबार के ग्राहकों में भी कमी आई, लेकिन उनका मानना है कि शुरूआती दौर की समस्या से अब लोग उबर रहे हैं। नौकरीपेशा व आम आदमी खुद को इससे अब कोई परेशानी न होना मान रहे हैं। वहीं अर्थशास्त्री के मुताबिक नोटबंदी से देश की इकोनामी पिछड़ी है और इसका असर अभी आगे भी रहेगा।
नोटबंदी से सर्वाधिक प्रभावित रहा सराफा बाजार
नोटबंदी से सराफा बाजार सर्वाधिक प्रभावित हुआ और एक साल होने के बाद भी बाजार इससे उबर नहीं सका है। हाल ही में धनतेरस पर पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी कारोबार नोटबंदी का नतीजा है। बची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी। ग्राहक भी तेजी से घटे हैं।
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शैली अग्रवाल, महामंत्री, सर्राफा एसोसिएशन
10 से 20 फीसदी घटा ऑटोमोबाइल बाजार
एक साल में ही नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी से ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार घटा है। नोटबंदी से ग्राहकों के पास नकदी की कमी रही और इसका असर सीधे कारोबार पर पड़ा। कुछ मिलाकर देखा जाए तो 10 से 20 फीसदी तक कारोबार प्रभावित हुआ है।
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राजककुमार अग्रवाल, ऑटोमाबाइल कारोबारी
रेडीमेड बाजार में घटे ग्राहक
नोटबंदी से रेडीमेड बाजार में ग्राहक घटे हैं, लेकिन कारोबार पर इसका कोई खासा असर नही है। नोटबंदी व जीएसटी एक साथ होने से ग्राहक अब सोच समझकर ही बाजार में आ रहे हैं। नोटबंदी से ट्रांजेक्शन को लेकर काफी सुविधा हुई है। बैंक जाना भी बच गया, लेकिन जो कलेक्शन चार्ज लिया जा रहा है, उसे बंद किया जाना चाहिए।
अनिल मैनी, रेडीमेड कारोबारी
इलेक्ट्रानिक्स बाजार में कोई असर नहीं
शुरूआती दौर में नोटबंदी का असर तो लगभग हर ट्रेड में देखने को मिला। व्यापार जगत में इसको लेकर काफी उथलपुथल रही, लेकिन अब कारोबारी इससे उबर चुके हैं। यह सच है कि रिटेल बाजार में ग्राहकों की संख्या घटी है, लेकिन होलसेल में इसका अब कोई असर नहीं है।
अवधेश कुमार, इलेक्ट्रानिक कारोबारी
नौकरीपेशा व आम आदमी को कोई दिक्कत नहीं
नोटबंदी से शुरूआती दौर में कुछ समस्याएं जरूर आई, लेकिन अब सबकुछ ट्रैक पर आ चुका है। मध्यमवर्गीय परिवारों को नोटबंदी से कोई परेशानी नहीं हुई। ई-ट्रांजेक्शन होने से काफी सहुलियतें हुई हैं।
राखी मिश्रा, प्रवक्ता, उपाधि महाविद्यालय
बैकिंग सेक्टर में बढ़ी सुविधाएं
बैकिंग सेक्टर में सुविधाएं बढ़ी हैं। नोटबंदी से बैंकों की नकदी बढ़ी है। होम लोन समेत लोन पर ब्याज दर कम होने से उपभोक्ताओं को फायदा हुआ है। टैक्स का दायरा बढ़ाने में भी नोटबंदी मददगार रही है। वहीं नोटबंदी से सोच बदली है। इससे डिजिटल ट्रांजेक्शन तेजी से आगे बढ़ा है। बैंकों में काम का बोझ भी काफी हद तक कम हुआ है।
नीतीश सक्सेना, अपर अग्रणी बैंक प्रबंधक
नोटबंदी एक लक्ष्यहीन सनसनीखेज कवायद
नोटबंदी एक लक्ष्यहीन सनसनीखेज कवायद है। जिसकी वजह से पूरे देश की अर्थव्यवस्था की चूलें हिल गई। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) प्रभावित हुई। कुल मिलाकर धरातल पर तो यही नजर आ रहा है। कालेधन पर अंकुश लगाने की बात भी कहीं नजर नहीं आ रही है। मध्यमवर्ग समेत असंगठित क्षेत्र जिसका देश की अर्थ व्यवस्था में करीब 45 फीसदी योगदान है, आज भी नोटबंदी के कहर से कराह रही है। नोटबंदी का असर अभी एक दो साल तक रहेगा।
डॉ. अंग्रेज सिंह, अर्थशास्त्र प्रवक्ता