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जांच में मामला सही पाए जाने पर भी बीएसए ने नहीं की कार्रवाई
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पीलीभीत। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा उच्च प्राथमिक विद्यालय परासी रामकिशन के प्रधानाध्यापक के मामले में की गई जांच में मामला सही पाए जाने के बाद भी बीएसए ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव ने बीएसए को 20 मई तक मामले मेें विस्तृत आख्या देने के निर्देश दिए हैं।
बरखेड़ा ब्लॉक के गांव जसोली निवासी इंद्रावती ने बीएसए को शिकायती पत्र भेजकर उच्च प्राथमिक विद्यालय परासी रामकिशन के प्रधानाध्यापक गजेंद्र पाल पर स्कूल में लापरवाही और अनियमितता बरतने का आरोप लगाया था। मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर भी की गई। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी श्रीराम सक्सेना को जांच सौंपा। खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांचकर आठ मई को अपनी आख्या रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी। रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक गजेंद्रपाल पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए से उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की। आरोप है कि इस सबके बावजूद बीएसए ने उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जिस पर शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग में की। आयोग के सचिव राजीव कुमार ने बीएसए देवेंद्र स्वरूप को उक्त मामले की विस्तृत आख्या संबंधित अभिलेख समेत 20 मई तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया कि ऐसा न करने पर बीएसए को आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर साक्ष्य देने के लिए बुलाया जा सकता है। इस संबंध में बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने बताया कि जांच रिपोर्ट उन्हें बाद में मिली हैं। आख्या रिपोर्ट देखने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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बरखेड़ा ब्लॉक के गांव जसोली निवासी इंद्रावती ने बीएसए को शिकायती पत्र भेजकर उच्च प्राथमिक विद्यालय परासी रामकिशन के प्रधानाध्यापक गजेंद्र पाल पर स्कूल में लापरवाही और अनियमितता बरतने का आरोप लगाया था। मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर भी की गई। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी श्रीराम सक्सेना को जांच सौंपा। खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांचकर आठ मई को अपनी आख्या रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी। रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक गजेंद्रपाल पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए से उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की। आरोप है कि इस सबके बावजूद बीएसए ने उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जिस पर शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग में की। आयोग के सचिव राजीव कुमार ने बीएसए देवेंद्र स्वरूप को उक्त मामले की विस्तृत आख्या संबंधित अभिलेख समेत 20 मई तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया कि ऐसा न करने पर बीएसए को आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर साक्ष्य देने के लिए बुलाया जा सकता है। इस संबंध में बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने बताया कि जांच रिपोर्ट उन्हें बाद में मिली हैं। आख्या रिपोर्ट देखने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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