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उत्पादित चीनी से मिल को होगा 82 करोड़ का घाटा!
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Thu, 17 May 2018 06:22 PM IST
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चीनी मिल ने चालू पेराई सत्र में अब तक तीन लाख पैंसठ हजार बोरी चीनी का उत्पादन कर लिया है। इसमें मिल को 82 करोड़ रुपये का घाटा होना तय माना जा रहा है।
किसान सहकारी चीनी मिल का पेराई सत्र इस बार माह नवंबर 2017 में शुरू हो गया था। मिल अब तक लगभग 38 लाख क्विंटल गन्ना पेर चुकी है और तीन लाख पैंसठ हजार बोरी चीनी का उत्पादन कर चुकी है। मिल के जीएम सुरेश चंद्रा ने बताया कि एक क्विंटल चीनी का उत्पादन करने में मिल पर 4800 रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है, जबकि चीनी का इस समय बाजार मूल्य 2600 रुपये क्विंटल है। इस प्रकार मिल को एक बोरी चीनी के उत्पादन पर पूरे 2200 रुपये का आर्थिक घाटा हो रहा है। इस हिसाब से मिल को अब तक उत्पादित की गई कुल तीन लाख पैंसठ हजार बोरी पर लगभग 82 करोड़ रुपये का घाटा होना तय माना जा रहा है। जीएम ने बताया कि यह चीनी मिल पहले से ही करीब तीन अरब के घाटे में चल रही है। पेराई सत्र बंद होने तक इस मिल को करीब एक अरब का और घाटा हो जाएगा, जिससे मिल पूरे चार अरब के घाटे में पहुंच जाएगी। अमर उजाला प्रतिनिधि द्वारा लगातार घाटा होने के बावजूद मिल चलाए जाने के सवाल पर जीएम ने बताया कि चीनी मिल जैसी सरकारी संस्था में किसानों का हित पहले देखा जाता है और घाटा बाद में देखा जाता है। किसानों के हित को देखते हुए क्षेत्र मेें जब तक गन्ना रहेगा, तब तक मिल चलती रहेगी चाहे मिल को कितना भी घाटा हो जाए।
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किसान सहकारी चीनी मिल का पेराई सत्र इस बार माह नवंबर 2017 में शुरू हो गया था। मिल अब तक लगभग 38 लाख क्विंटल गन्ना पेर चुकी है और तीन लाख पैंसठ हजार बोरी चीनी का उत्पादन कर चुकी है। मिल के जीएम सुरेश चंद्रा ने बताया कि एक क्विंटल चीनी का उत्पादन करने में मिल पर 4800 रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है, जबकि चीनी का इस समय बाजार मूल्य 2600 रुपये क्विंटल है। इस प्रकार मिल को एक बोरी चीनी के उत्पादन पर पूरे 2200 रुपये का आर्थिक घाटा हो रहा है। इस हिसाब से मिल को अब तक उत्पादित की गई कुल तीन लाख पैंसठ हजार बोरी पर लगभग 82 करोड़ रुपये का घाटा होना तय माना जा रहा है। जीएम ने बताया कि यह चीनी मिल पहले से ही करीब तीन अरब के घाटे में चल रही है। पेराई सत्र बंद होने तक इस मिल को करीब एक अरब का और घाटा हो जाएगा, जिससे मिल पूरे चार अरब के घाटे में पहुंच जाएगी। अमर उजाला प्रतिनिधि द्वारा लगातार घाटा होने के बावजूद मिल चलाए जाने के सवाल पर जीएम ने बताया कि चीनी मिल जैसी सरकारी संस्था में किसानों का हित पहले देखा जाता है और घाटा बाद में देखा जाता है। किसानों के हित को देखते हुए क्षेत्र मेें जब तक गन्ना रहेगा, तब तक मिल चलती रहेगी चाहे मिल को कितना भी घाटा हो जाए।