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शारदा डैम की हालत जर्जर, जिम्मेदार बने लापरवाह
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शारदा डैम की जर्जर हालत से प्रदेश की 10 जनपदों में सिंचाई का संकट
माधोटांडा (पीलीभीत)। प्रदेेश के 10 से अधिक जिलों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने वाला 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जर्जर होता जा रहा है। खास बात यह है कि इसके उद्धार के लिए एक तो बजट नहीं मिल रहा और जो बजट मिलता भी है वो अभिलेखों में ही खर्च हो जाता है।
जिले का 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में भंडारित पानी से प्रदेश के 10 से अधिक जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इसके अलावा नहरों में रोस्टर को नियमित रखने के लिए भी शारदा डैम में भंडारित पानी को ही कृषि फसलों की सिंचाई के लिए दिया जाता है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि डैम की मरम्मत के लिए पिछले कई वर्षों से सरकार द्वारा किसी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकी है। डैम की जिम्मेदारी संभाल रहे विभाग की ओर से पूर्व में प्रोजेक्ट तो भेजे जाते रहे है, लेकिन उन पर धेला नहीं मिल सका है। इसका नतीजा यह हुआ कि डैम बदहाल होता जा रहा है। डैम की मुख्य बॉडी के भीतरी हिस्से में पिचिंग का अधिकांश भाग उखड़ा और टूटा पड़ा है। डैम के सर्विस रोड पर भी गहरे गड्ढे हैं। यहीं नहीं डैम का बाहरी हिस्सा भी बेहद जर्जर है। अभियंताओं की लापरवाही के चलते डैम के आसपास आबादी बसती जा रही है। डैम का पानी फिल्टर कर रेता बाहर फेंकने के लिए बनाई गई लॉन्ग और क्रॉस ड्रैन के साथ आउट फाल भी जर्जर स्थिति में हैं। खास बात यह है कि डैम में रेत के ढेर लगते जा रहे हैं, इससे उसकी भंडारण क्षमता भी लगातार घट रही है। ऐसे में समय रहते डैम की जर्जर स्थिति को नहीं सुधारा गया तो प्रदेश की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
बड़ा बजट मिलता नहीं, कम का हो जाता है बंदरबांट
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए भेजे गए बड़े प्रोजेक्ट पर शासन से बजट नहीं मिल पा रहा है। इधर, अभियंताओं की दौड़ भाग से कुछ बजट मिलता भी है, तो वह कागजों में ही खर्च हो जाता है। उदाहरण के तौर पर जनवरी 2018 से अक्तूबर तक विभाग को मिले बजट से स्टाक यार्ड पर आरवीएम की आपूर्ति का कार्य तो दिखा दिया गया। जिम्मेदार खुद कट्टों में आरबीएम भरने का कार्य कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है। मौके पर कोई कार्य ही नहीं दिखाई दे रहा है। इसके अलावा सिल्ट और जलकुंभी की सफाई कराने के भी दावे किए गए लेकिन वर्तमान में दूर तक डैम में जलकुंभी दिखाई दे रही है। बजट ठिकाने लगाने के लिए सिर्फ घास की कटाई कराने की औपचारिकता निभा दी गई, जबकि इस बजट से डैम की जर्जर लॉन्ग ड्रेन की मरम्मत करानी चाहिए थी।
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विभाग को नहीं मिला बजट तो प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को सौंप दी जिम्मेदारी
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए विभाग की ओर से कई बड़े प्रोजेक्ट इसके पिचिंग और मुख्य बॉडी की मरम्मत से लेकर मुख्य मार्ग तथा डैम के बाहरी हिस्से के निर्माण-मरम्मत के लिए दो अलग-अलग प्रोजेक्ट पर बजट मांगा गया था, लेकिन शासन से किसी पर मंजूरी नहीं मिल सकी। इस पर अभियंताओं ने बजट को जल्द मंजूरी मिलने के लिए इन प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन के हवाले कर दिया। बसपा सरकार में 19 करोड़ और सपा सरकार में छह करोड़ रुपये का बजट डैम के विभिन्न कार्यों के लिए मंजूर किया गया था, लेकिन सत्ता से जुड़े ठेकेदार बजट को ठिकाने लगाने के लिए कार्य के नाम पर औपचारिकताएं निभाते रहे।
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए पूर्व में ही प्रोजेक्ट बनाकर भेज दिया गया था। शासन से इसको अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस कार्य की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन के हवाले कर दी गई है। बजट की मंजूरी के बाद ही काम शुरू हो सकेगा।
- हरीश चंद्र यादव, अधिशासी अभियंता (शारदा सागर खंड)
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माधोटांडा (पीलीभीत)। प्रदेेश के 10 से अधिक जिलों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने वाला 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जर्जर होता जा रहा है। खास बात यह है कि इसके उद्धार के लिए एक तो बजट नहीं मिल रहा और जो बजट मिलता भी है वो अभिलेखों में ही खर्च हो जाता है।
जिले का 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में भंडारित पानी से प्रदेश के 10 से अधिक जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इसके अलावा नहरों में रोस्टर को नियमित रखने के लिए भी शारदा डैम में भंडारित पानी को ही कृषि फसलों की सिंचाई के लिए दिया जाता है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि डैम की मरम्मत के लिए पिछले कई वर्षों से सरकार द्वारा किसी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकी है। डैम की जिम्मेदारी संभाल रहे विभाग की ओर से पूर्व में प्रोजेक्ट तो भेजे जाते रहे है, लेकिन उन पर धेला नहीं मिल सका है। इसका नतीजा यह हुआ कि डैम बदहाल होता जा रहा है। डैम की मुख्य बॉडी के भीतरी हिस्से में पिचिंग का अधिकांश भाग उखड़ा और टूटा पड़ा है। डैम के सर्विस रोड पर भी गहरे गड्ढे हैं। यहीं नहीं डैम का बाहरी हिस्सा भी बेहद जर्जर है। अभियंताओं की लापरवाही के चलते डैम के आसपास आबादी बसती जा रही है। डैम का पानी फिल्टर कर रेता बाहर फेंकने के लिए बनाई गई लॉन्ग और क्रॉस ड्रैन के साथ आउट फाल भी जर्जर स्थिति में हैं। खास बात यह है कि डैम में रेत के ढेर लगते जा रहे हैं, इससे उसकी भंडारण क्षमता भी लगातार घट रही है। ऐसे में समय रहते डैम की जर्जर स्थिति को नहीं सुधारा गया तो प्रदेश की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पानी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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बड़ा बजट मिलता नहीं, कम का हो जाता है बंदरबांट
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए भेजे गए बड़े प्रोजेक्ट पर शासन से बजट नहीं मिल पा रहा है। इधर, अभियंताओं की दौड़ भाग से कुछ बजट मिलता भी है, तो वह कागजों में ही खर्च हो जाता है। उदाहरण के तौर पर जनवरी 2018 से अक्तूबर तक विभाग को मिले बजट से स्टाक यार्ड पर आरवीएम की आपूर्ति का कार्य तो दिखा दिया गया। जिम्मेदार खुद कट्टों में आरबीएम भरने का कार्य कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है। मौके पर कोई कार्य ही नहीं दिखाई दे रहा है। इसके अलावा सिल्ट और जलकुंभी की सफाई कराने के भी दावे किए गए लेकिन वर्तमान में दूर तक डैम में जलकुंभी दिखाई दे रही है। बजट ठिकाने लगाने के लिए सिर्फ घास की कटाई कराने की औपचारिकता निभा दी गई, जबकि इस बजट से डैम की जर्जर लॉन्ग ड्रेन की मरम्मत करानी चाहिए थी।
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विभाग को नहीं मिला बजट तो प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को सौंप दी जिम्मेदारी
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए विभाग की ओर से कई बड़े प्रोजेक्ट इसके पिचिंग और मुख्य बॉडी की मरम्मत से लेकर मुख्य मार्ग तथा डैम के बाहरी हिस्से के निर्माण-मरम्मत के लिए दो अलग-अलग प्रोजेक्ट पर बजट मांगा गया था, लेकिन शासन से किसी पर मंजूरी नहीं मिल सकी। इस पर अभियंताओं ने बजट को जल्द मंजूरी मिलने के लिए इन प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन के हवाले कर दिया। बसपा सरकार में 19 करोड़ और सपा सरकार में छह करोड़ रुपये का बजट डैम के विभिन्न कार्यों के लिए मंजूर किया गया था, लेकिन सत्ता से जुड़े ठेकेदार बजट को ठिकाने लगाने के लिए कार्य के नाम पर औपचारिकताएं निभाते रहे।
शारदा सागर डैम की मरम्मत के लिए पूर्व में ही प्रोजेक्ट बनाकर भेज दिया गया था। शासन से इसको अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस कार्य की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन के हवाले कर दी गई है। बजट की मंजूरी के बाद ही काम शुरू हो सकेगा।
- हरीश चंद्र यादव, अधिशासी अभियंता (शारदा सागर खंड)