{"_id":"5945273d4f1c1be60e8b4856","slug":"11497704253-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी के तीन बच्चों का भी भरण पोषण कर रहे थे केवल प्रसाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटी के तीन बच्चों का भी भरण पोषण कर रहे थे केवल प्रसाद
Updated Sat, 17 Jun 2017 06:27 PM IST
विज्ञापन
पीलीभीत। बाघ के हमले में मरने वाले रुपपुर गांव के निवासी केवल प्रसाद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पास मात्र तीन बीघा जमीन है। दो बेटे पप्पू (35) और उमाचरन (30) मेहनत मजदूरी करते हैं। पूरा परिवार छप्परपोश मकान में जीवन यापन करता। बड़ी बेटी शांतिदेवी की शादी के बाद ससुराल में मौत हो गई थी। कुछ ही दिन बाद दामाद का भी स्वर्गवास हो गया।
इसके बाद से उन्होंने शांतिदेवी की तीन संतानों के भरण पोषण का जिम्मा संभाला। उसके तीन बच्चे धर्मेंद्र (18), हरीश (15) और बेटी लक्ष्मी (19) है। जिसको वह अपने घर ले आए और लिखाया पढ़ाया। अभी एक साल पहले ही उन्होंने अपनी नातिन लक्ष्मी का विवाह किया। बेटी और दामाद की मौत के बाद बच्चों के वही पालनहार थे। उनकी बाघ के हमले में मौत की खबर मिलते ही पत्नी रामकली गश खाकर गिर गई। क्षतविक्षत हालत में मिला शव देखने की हिम्मत भी परिवार वाले नहीं जुटा पा रहे थे। पूरे गांव में बाघ की दहशत से गलियों में सन्नाटा पसरा था तो वहीं मृतक के मकान के बाहर ढांढस बंधाने को ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई थी। हर कोई घटना को कोसता दिखाई दिया। छप्परपोश मकान से निकल रही अपनों की चीत्कार सन्नाटे के बीच गांव में गूंजती रही। ग्रामीण की मौत का गम और वनविभाग के प्रति गुस्सा लोगों के चेहरों पर साफ दिखाई दिया। मजदूर केवल प्रसाद की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति भी गहरा गई है। इसकी सूचना मिलने पर राजस्व टीम ने मौके पर जाकर पूरा लेखा-जोखा जुटाया।
विज्ञापन
इसके बाद से उन्होंने शांतिदेवी की तीन संतानों के भरण पोषण का जिम्मा संभाला। उसके तीन बच्चे धर्मेंद्र (18), हरीश (15) और बेटी लक्ष्मी (19) है। जिसको वह अपने घर ले आए और लिखाया पढ़ाया। अभी एक साल पहले ही उन्होंने अपनी नातिन लक्ष्मी का विवाह किया। बेटी और दामाद की मौत के बाद बच्चों के वही पालनहार थे। उनकी बाघ के हमले में मौत की खबर मिलते ही पत्नी रामकली गश खाकर गिर गई। क्षतविक्षत हालत में मिला शव देखने की हिम्मत भी परिवार वाले नहीं जुटा पा रहे थे। पूरे गांव में बाघ की दहशत से गलियों में सन्नाटा पसरा था तो वहीं मृतक के मकान के बाहर ढांढस बंधाने को ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई थी। हर कोई घटना को कोसता दिखाई दिया। छप्परपोश मकान से निकल रही अपनों की चीत्कार सन्नाटे के बीच गांव में गूंजती रही। ग्रामीण की मौत का गम और वनविभाग के प्रति गुस्सा लोगों के चेहरों पर साफ दिखाई दिया। मजदूर केवल प्रसाद की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट की स्थिति भी गहरा गई है। इसकी सूचना मिलने पर राजस्व टीम ने मौके पर जाकर पूरा लेखा-जोखा जुटाया।
विज्ञापन