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किसके हिस्से में आएगा शारदा सागर डैम
Updated Wed, 09 Aug 2017 05:03 PM IST
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माधोटांडा (पीलीभीत)। यूपी व उत्तराखंड के बीच सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला भले ही तेज चल रहा हो, लेकिन प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराने वाले शारदा डैम किसके अधीन रहेगा, यह अभी संशय बना हुआ है। इधर डैम के जीरो किमी से 17 किमी का एरिया यूपी व 17 से 22 किमी का इलाका उत्तराखंड के अधीन है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत बने शारदा सागर डैम की हालत इन दिनों जर्जर होती जा रही है। जिससे आने वाले समय में सिंचाई की किल्लत खड़ी हो सकती है। यूपी व उत्तराखंड में भाजपा की सरकारें हैं, इसलिए पिछली सरकारों के कार्यकाल में लंबित पड़ी सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला काफी तेजी से चल रहा है। जीरो से 17 किमी का एरिया यूपी में व 17 से 22 किमी तक का क्षेत्र उत्तराखंड में पड़ता है। डैम को भरने के लिए एक नहर उत्तराखंड के 22 किमी से डाली गई हैं जबकि दूसरी नहर यूपी के बाइफरकेशन से डाली गई है। उत्तराखंड इलाके में डैम के भीतरी हिस्से में तीन किमी के इलाके में आबादी बस चुकी है। इस समय समूचे शारदा डैम की देखरेख का जिम्मा यूपी के अधीन है। जिससे शारदा सागर की दो डिवीजनें देखती हैं। शायद बंटवारे के चलते ही जर्जर पड़े शारदा डैम की मरम्मत के लिए अभी यूपी ने भी कोई बजट रिलीज नहीं किया है। मात्र दो करोड़ रुपया गत वर्ष पिचिंग मरम्मत के लिए रिलीज किया गया था। उसमें भी बड़ा खेल खेला गया। जिसकी जांच आज भी चल रही है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो डैम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
इधर सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों का मामला उच्चस्तर पर चल रहा है, ऐसे में डैम यूपी के हिस्से में आएगा या फिर उत्तराखंड के हिस्से में, फिलहाल यह अभी तय नहीं हुआ है। शारदा डैम जब पानी से भरा जाता है तब डैम के भीतरी हिस्से में कॉलोनी बनाकर बसे लोग शोर मचाने लगते हैं। सिंचाई विभाग के जिलेदार बताते हैं कि खटीमा से डिमांड आने लगती है कि डैम को खाली करना शुरू करें, जबकि डैम पूरे मानक से भरा भी नहीं जाता है। यदि बंटवारे में शारदा डैम उत्तराखंड में चला जाता हैं तो स्थिति और खराब हो सकती है। वजह डैम के भीतर दिनोंदिन आबादी बसने का क्रम जारी है। हालांकि शारदा डैम से यूपी की ही कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। इसलिए माना जा रहा हैं कि शारदा डैम यूपी के ही अधीन रहेगा, लेकिन 17 से 22 किमी के मध्य बसती जा रही कालोनी का मामला यदि हल नहीं हुआ तो बंटवारे के बाद भी शारदा डैम को पूरी क्षमता से भरने में दिक्कतें खड़ी हो सकती है। यदि डैम भरा जाता है तो उत्तराखंड के वाशिंदे कोई भी बाधा खड़ी कर सकते हैं। बहरहाल सिंचाई परिसंपत्तियों के बंटवारे से पूर्व प्रदेश सरकार को जर्जर होती जा रहे शारदा डैम की हालत को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
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प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत बने शारदा सागर डैम की हालत इन दिनों जर्जर होती जा रही है। जिससे आने वाले समय में सिंचाई की किल्लत खड़ी हो सकती है। यूपी व उत्तराखंड में भाजपा की सरकारें हैं, इसलिए पिछली सरकारों के कार्यकाल में लंबित पड़ी सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला काफी तेजी से चल रहा है। जीरो से 17 किमी का एरिया यूपी में व 17 से 22 किमी तक का क्षेत्र उत्तराखंड में पड़ता है। डैम को भरने के लिए एक नहर उत्तराखंड के 22 किमी से डाली गई हैं जबकि दूसरी नहर यूपी के बाइफरकेशन से डाली गई है। उत्तराखंड इलाके में डैम के भीतरी हिस्से में तीन किमी के इलाके में आबादी बस चुकी है। इस समय समूचे शारदा डैम की देखरेख का जिम्मा यूपी के अधीन है। जिससे शारदा सागर की दो डिवीजनें देखती हैं। शायद बंटवारे के चलते ही जर्जर पड़े शारदा डैम की मरम्मत के लिए अभी यूपी ने भी कोई बजट रिलीज नहीं किया है। मात्र दो करोड़ रुपया गत वर्ष पिचिंग मरम्मत के लिए रिलीज किया गया था। उसमें भी बड़ा खेल खेला गया। जिसकी जांच आज भी चल रही है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो डैम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
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इधर सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों का मामला उच्चस्तर पर चल रहा है, ऐसे में डैम यूपी के हिस्से में आएगा या फिर उत्तराखंड के हिस्से में, फिलहाल यह अभी तय नहीं हुआ है। शारदा डैम जब पानी से भरा जाता है तब डैम के भीतरी हिस्से में कॉलोनी बनाकर बसे लोग शोर मचाने लगते हैं। सिंचाई विभाग के जिलेदार बताते हैं कि खटीमा से डिमांड आने लगती है कि डैम को खाली करना शुरू करें, जबकि डैम पूरे मानक से भरा भी नहीं जाता है। यदि बंटवारे में शारदा डैम उत्तराखंड में चला जाता हैं तो स्थिति और खराब हो सकती है। वजह डैम के भीतर दिनोंदिन आबादी बसने का क्रम जारी है। हालांकि शारदा डैम से यूपी की ही कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। इसलिए माना जा रहा हैं कि शारदा डैम यूपी के ही अधीन रहेगा, लेकिन 17 से 22 किमी के मध्य बसती जा रही कालोनी का मामला यदि हल नहीं हुआ तो बंटवारे के बाद भी शारदा डैम को पूरी क्षमता से भरने में दिक्कतें खड़ी हो सकती है। यदि डैम भरा जाता है तो उत्तराखंड के वाशिंदे कोई भी बाधा खड़ी कर सकते हैं। बहरहाल सिंचाई परिसंपत्तियों के बंटवारे से पूर्व प्रदेश सरकार को जर्जर होती जा रहे शारदा डैम की हालत को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
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