{"_id":"5c59d10ebdec22653c2d1990","slug":"101549390094-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीलीभीत वाले भी कम शौकीन नहीं कारों के","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीलीभीत वाले भी कम शौकीन नहीं कारों के
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। आबादी के साथ वाहनों की संख्या में हो रहा इजाफा ट्रैफिक व्यवस्था को तो तार-तार कर ही रही है, इससे शहर की फिजा भी जहरीली होती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन हर साल20 से 25 फीसदी वाहन बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इस मुसीबत से निपटने के लिए सरकारी विभागों के पास न तो कोई इंतजाम हैं और न ही कोई कार्ययोजना। अफसर भी पूरी तरह से निगाहें फेरे हुए हैं। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली की तरह पीलीभीत वाले भी मास्क लगाकर घरों के बाहर निकलेंगे।
शहर में जिस तरह आबादी बढ़ती गई, वैसे ही कारों और बाइकों की संख्या में इजाफा होता गया। सड़कों पर चलने वाले लोग भी बढ़े, वाहन भी बढ़े, लेकिन सड़कें चौड़ी होने के बजाए और भी सिकुड़ती गई। जिले में वाहन खरीद पर नजर डालें तो पिछले तीन माह के भीतर मात्र एक कार एजेंसी पर 300 से अधिक कारें और एक बाइक एजेंसी पर 4000 से अधिक बाइकों की बिक्री हुई। शहर में करीब पांच बाइक एजेंसी हैं, वहीं दो कार एजेंसियां हैं। जाहिर है शहर में रहने वाले कई लोग दूसरे जिलों से भी वाहन को खरीद लाते हैं। इस लिहाज से कुछ और भी वाहन हर माह शहर की सड़कों पर बढ़ रहे हैं। इनमें करीब 60 फीसदी वाहन शहरी इलाकों और शेष 40 फीसदी वाहन ग्रामीण इलाकों में दौड़ रहे हैं।
हर साल दो पहिया वाहनों की संख्या में करीब तीस फीसदी तक बढ़ोतरी हो रही है। आमतौर पर देखा जाएं यदि नौकरी पेशे वाला परिवार है तो घर में दो से तीन दोपहिया वाहन होना लाजमी है। दूसरे बैंकों और एजेंसियों के माध्यम से आसानी से वाहन खरीद के लिए ऋण मिल जाता है। -अमिताभ राय, एआरटीओ
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर में जिस तरह आबादी बढ़ती गई, वैसे ही कारों और बाइकों की संख्या में इजाफा होता गया। सड़कों पर चलने वाले लोग भी बढ़े, वाहन भी बढ़े, लेकिन सड़कें चौड़ी होने के बजाए और भी सिकुड़ती गई। जिले में वाहन खरीद पर नजर डालें तो पिछले तीन माह के भीतर मात्र एक कार एजेंसी पर 300 से अधिक कारें और एक बाइक एजेंसी पर 4000 से अधिक बाइकों की बिक्री हुई। शहर में करीब पांच बाइक एजेंसी हैं, वहीं दो कार एजेंसियां हैं। जाहिर है शहर में रहने वाले कई लोग दूसरे जिलों से भी वाहन को खरीद लाते हैं। इस लिहाज से कुछ और भी वाहन हर माह शहर की सड़कों पर बढ़ रहे हैं। इनमें करीब 60 फीसदी वाहन शहरी इलाकों और शेष 40 फीसदी वाहन ग्रामीण इलाकों में दौड़ रहे हैं।
विज्ञापन
हर साल दो पहिया वाहनों की संख्या में करीब तीस फीसदी तक बढ़ोतरी हो रही है। आमतौर पर देखा जाएं यदि नौकरी पेशे वाला परिवार है तो घर में दो से तीन दोपहिया वाहन होना लाजमी है। दूसरे बैंकों और एजेंसियों के माध्यम से आसानी से वाहन खरीद के लिए ऋण मिल जाता है। -अमिताभ राय, एआरटीओ
विज्ञापन