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....शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी
Updated Thu, 22 Mar 2018 08:27 PM IST
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शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी
घरों व मंदिरों में हुआ मां स्कंदमाता का गुणगान
यशवंतरी देवी मंदिर में दिनभर रही भक्तों की भीड़
22 पीबीटीपी 6, 7
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा का पंचम रुप स्कंद माता की सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया, शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी मंत्रों के साथ भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। शाम को महिलाओं ने देवी मां के गीत गाए। नवरात्र पर्व को लेकर यशवतंरी देवी मंदिर में पूरे दिन भीड़ रही।
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन मां स्कंद माता की भक्तों ने पूजा अर्चना की। मां दुर्गा का पंचम रूप स्कंद माता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंद माता नाम मिला। भगवान स्कंद जी बाल रूप में माता की गोद में बैठे होते हैं। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। स्कंद माता की स्तुति करने से दुखों से मुक्ति मिलती है। नवरात्र को लेकर भक्तों की मंदिरों में पूरे दिन भीड़ लगी रही है। यशवंतरी देवी मंदिर परिसर में भक्तों ने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाएं। वही मंदिर में भीड़ अधिक होने के कारण भक्तों ने परिसर में संयुक्त रूप से पूजा अर्चना कर मां से मनौतियां मांगी। पांचवें दिन भी मंदिरों पर सुबह से ही देवी भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। जो पूरे दिन मंदिरों में रही। शहर के अलावा दूर दराज से आने वाले भक्तों ने पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा की। शहर के देवी मंदिर सुबह से लेकर शाम तक घंटा-घड़ियाल व मां दुर्गे के जयकारे से गूंजते रहे। शाम को घरों और मंदिरों में महिलाओं ने देवी मां के गीत गाए।
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घरों व मंदिरों में हुआ मां स्कंदमाता का गुणगान
यशवंतरी देवी मंदिर में दिनभर रही भक्तों की भीड़
22 पीबीटीपी 6, 7
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा का पंचम रुप स्कंद माता की सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया, शुभदास्तु सदा देवी स्कंद माता यशस्विनी मंत्रों के साथ भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। शाम को महिलाओं ने देवी मां के गीत गाए। नवरात्र पर्व को लेकर यशवतंरी देवी मंदिर में पूरे दिन भीड़ रही।
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन मां स्कंद माता की भक्तों ने पूजा अर्चना की। मां दुर्गा का पंचम रूप स्कंद माता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंद माता नाम मिला। भगवान स्कंद जी बाल रूप में माता की गोद में बैठे होते हैं। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। स्कंद माता की स्तुति करने से दुखों से मुक्ति मिलती है। नवरात्र को लेकर भक्तों की मंदिरों में पूरे दिन भीड़ लगी रही है। यशवंतरी देवी मंदिर परिसर में भक्तों ने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाएं। वही मंदिर में भीड़ अधिक होने के कारण भक्तों ने परिसर में संयुक्त रूप से पूजा अर्चना कर मां से मनौतियां मांगी। पांचवें दिन भी मंदिरों पर सुबह से ही देवी भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। जो पूरे दिन मंदिरों में रही। शहर के अलावा दूर दराज से आने वाले भक्तों ने पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा की। शहर के देवी मंदिर सुबह से लेकर शाम तक घंटा-घड़ियाल व मां दुर्गे के जयकारे से गूंजते रहे। शाम को घरों और मंदिरों में महिलाओं ने देवी मां के गीत गाए।
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