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World Bicycle Day: वो भी क्या दौर था, ...जब दूल्हे की शान बढ़ाती थी साइकिल, पढ़िए बुजुर्गों की दिलचस्प कहानियां

Fri, 03 Jun 2022 12:16 PM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
मदन बालियान, अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 03 Jun 2022 12:16 PM IST
सार

एक वो भी दौर था, जब साइकिल शादी में दूल्हे की शान बढ़ाती थी। लोग मीलों तक साइकिल से सफर तय करते थे। पढ़िए कुछ ऐसे ही खास लोगों की कहानियां।

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World Bicycle Day 2022: read full stories of bicycle journey of many old people of Muzaffarnagar city
मुजफ्फरनगर शहर के बुजुर्ग लोग। - फोटो : amar ujala

विस्तार

नए दौर की पीढ़ी बाइक, स्कूटी और कारों की चकाचौंध में उलझी है, लेकिन एक दौर साइकिल का भी रहा। परिवहन के साधनों की कमी थी, तब लोग मीलों का सफर साइकिल से ही तय करते थे। वर्तमान में बच्चों को साइकिल गिफ्ट की जाती है, लेकिन कभी यही साइकिल शादी में दूल्हे की शान बढ़ाती थी। दूर-दूराज के स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक साइकिल पर ही सफर करते थे। सेहत के लिए फायदेमंद और खर्च भी कम। बीमारियों से भी साइकिल का सफर लोगों को बचाकर रखता था। जय भारत इंटर कॉलेज छपार से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक शुगन चंद त्यागी (85) इन दिनों चरथावल में रह रहे हैं। वह कहते हैं कि साइकिल का सफर सेहत को दुरुस्त करने वाला है। डॉक्टर अब खुद लोगों को साइकिल चलाने की सलाह देते हैं।

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पिता विधायक थे और मुझे दहेज में मिली थी साइकिल
पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेंद्र दत्त त्यागी के पुत्र आनंद प्रकाश त्यागी एडवोकेट (88) बताते हैं कि तीन दशक पहले तक दहेज में साइकिल दी जाती थी। मेरी शादी भोपा थाने के गांव मलपुरा की रहने वाली प्रतिभा से हुई थी। उनके ससुर उस जमाने में प्रशासनिक अधिकारी थे। उन्होंने मुझे शादी में साइकिल दी थी। साइकिल से कचहरी में अरसे तक वकालत के दौरान आवागमन किया। चरथावल से मुजफ्फरनगर साइकिल से ही जाया करते थे। साइकिल की सवारी का कोई तोड़ नहीं है। साइकिल चलाने की वजह से ही उन्हें आज तक घुटना दर्द समेत अन्य बीमारी नहीं है।
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हमेशा हमराही रही मेरी साइकिल
भोपा के गांव छछरौली निवासी किसान कंवरपाल बाबा (80) बताते हैं कि उनके चाचा राम सिंह पटवारी की शादी में साइकिल मिली थी। इसी वजह से उन्होंने 11 वर्ष की उम्र में साइकिल चलाना सीख लिया। 1968 में उनकी शादी हुई। उनके साइकिल प्रेम को देखते हुए शादी में उन्हें भी साइकिल मिली। एक बार साथी धनपाल, बृजपाल और वेदपाल के साथ साइकिल पर सवार होकर हरिद्वार स्थित बीएचएल कंपनी में नौकरी की तलाश में गए थे। अब भी वह अधिकांश सफर साइकिल से ही तय करते हैं।
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साइकिल पर सवार हुए तो फिर नहीं उतरे
छछरौली के रहने वाले शिक्षक कृपाल सिंह भी साइकिल प्रेमी है। वे बताते हैं कि उन्हें 40 साल पढ़ाते हो गए। इसी दौरान ड्यूटी के लिए वह 10 से लेकर 50 किलोमीटर तक का सफर साइकिल से ही तय करते हैं। सुबह सवेरे साइकिल को साफ सुथरा करना उनका पहला कार्य है। बेलड़ा निवासी मास्टर रामकुमार, जयपाल सिंह भी साइकिल के पुराने शौकीन हैं।

साइकिल से सफर करने वाले सीओ राम मोहन शर्मा
भोपा सर्किल के सीओ रहे राममोहन शर्मा भोपा में तैनाती के समय बाजार में अन्य स्थानों पर साइकिल पर घूमते देखे जाते थे। वह बताते हैं कि बचपन से लेकर आज तक वह साइकिल का सफर खूब पसंद करते हैं। घर से लेकर जंगल तक, गांव से लेकर शहर तक, घर से लेकर स्कूल तक उन्होंने यह सफर साइकिल के माध्यम से तय किया हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग मथुरा में हैं।

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साइकिल चलाओगे तो स्वस्थ रहोगे
सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार बताते हैं कि साइकिल चलाने के फायदे ही फायदे हैं। फेफड़े और ह्दय रोगों से छुटकारा मिलता है। तनाव कम होता है। गठिया का खतरा कम हो जाता है। जोड़ों का दर्द नहीं होता।

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