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श्रमिक अपने रेहड़े व साइकिल लेने नहीं आ सके

Sun, 28 Jun 2020 10:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2020 10:36 PM IST
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Workers could not come to take their hare and bicycle
जानसठ। प्रवासी श्रमिकों में से एक भी श्रमिक अपना रेहड़ा व साइकिल लेने को अभी तक नहीं आ सका है। पुलिस प्रशासन के पास रेहड़े व साइकिल का पूरा रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिन श्रमिकों के यह वाहन हैं। इसके बावजूद पुलिस की ओर से भी अभी तक श्रमिकों के घर इनको भिजवाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कई रेहड़े व साइकिल खराब होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
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वैश्विक कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को फैक्टरी मालिकों ने निकाल दिया था। ट्रेन और रोडवेज डिपो की बसें बंद होने से श्रमिक पैदल ही अपने घर जाने को निकल लिए थे। अनेक श्रमिक पुरानी साइकिल और रेहड़े खरीद कर अपने घर जाने को निकलने थे। सड़कों पर श्रमिकों की बढ़ती संख्या देखकर सरकार ने श्रमिकों को उनके घर भिजवाने की व्यवस्था करते हुए बसों का प्रबंध किया था। शासन के आदेश पर प्रशासन ने सड़कों पर पैदल और साइकिल व रेहड़े से जाने वाले श्रमिकों को क्वारंटीन करते हुए उन्हें स्कूल कालेजों में रखकर उनके स्वास्थ्य की जांच कराई थी। पुलिस प्रशासन ने श्रमिकों को बसों से उनके घरों को रवाना कर दिया था लेकिन उनकी साइकिल व रेहड़े नहीं भेजे थे। कवाल के राजकीय कन्या इंटर कालेज में 100 से अधिक श्रमिकों की साइकिल और दो रेहड़े खड़े हैं। पुलिस प्रशासन ने उस वक्त साइकिल व रेहड़े को बसों में ले जाने से मना कर दिया था। एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक एक भी श्रमिक अपनी साइकिल व रेहड़े लेने नहीं आया।
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चोरी न हो जाएं श्रमिकों के वाहन
गांव कवाल के कालेज में श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े लावारिस खडे़ हैं। कहीं श्रमिकों के ये वाहन चोरी न हो जाएं। उधर, लोगों में चर्चा है कि अगर श्रमिक साइकिल व रेहड़े नहीं लेने आए तो, इन वाहनों का क्या होगा। कवाल पुलिस चौकी प्रभारी राजकुमार शर्मा का कहना है कि श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े पुलिस की सुरक्षा में है। श्रमिकों के वाहन उनकी अमानत हैं। इनको जिन श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े हैं, उनको ही दिए जाएंगे। वे कभी भी ले जा सकते हैं।
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