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महिलाओं ने दी थी जन्म भूमि आंदोलन को धार
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अयोध्या में कारसेवा में भाग लेती मुजफ्फरनगर की महिलाएं। (फाइल फोटो)
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
महिलाओं ने दी थी जन्म भूमि आंदोलन को धार
मुजफ्फरनगर। रामजन्म भूमि आंदोलन में जब जेल जाने की बात आई तो भगवान राम के लिए महिलाएं भी आगे आ गईं। नर्ष 1989 के जेल भरो आंदोलन में एसपी की कोठी के सामने जब हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ, तो इन महिलाओं ने खुला विरोध किया। विमलादेवी के नेतृत्व में महिलाओं ने पुलिस लाठीचार्ज का सीधा मुकाबला किया। तीन महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल भेजा गया था।
भगवान राम के मंदिर के लिए लोगों को जागरूक करने को यहां की महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। संघ परिवार से जुड़े नईमंडी के रघुवीर शरण माहेश्वरी का परिवार इसमें सबसे आगे रहा। माहेश्वरी की पत्नी विमला देवी राष्ट्र सेविका समिति, दुर्गा वाहिनी और भाजपा महिला मोर्चा से जुड़ी रहीं। वर्ष 1989 में जब राम मंदिर के लिए जेल भरो आंदोलन शुरू हुआ तो विमला देवी के नेतृत्व में गिरफ्तारी देने को शिवचौक की ओर कूच किया गया। पुलिस ने इन लोगों को रोडवेज के सामने एसएसपी कोठी के पास रोक लिया। यहां हालात ऐसे बने की पुलिस ने हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज में जब ललित माहेश्वरी, महेंद्र रुचि, श्यामसुुंदर तायल, अतुल बंसल घायल हो गए, तो महिलाओं ने मोर्चा संभाला। विमला देवी, सत्या शर्मा, दमयंती देवी पुलिस के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए। इसमें विमलादेवी को चोट भी आई। पुलिस ने बाद में इन तीनों महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल में भेज दिया। इन महिलाओं की गिरफ्तारी ने राम मंदिर निर्माण के प्रति हिंदू समाज को इतना जागरूक किया कि हिंदू समाज ने वोट के लिए प्रत्याशी के चयन की सोच को भी बदल दिया।
कार सेवा में शामिल हुई थीं महिलाएं
मुजफ्फरनगर। अयोध्या में चबूतरा निर्माण को जो कार सेवा हुई उसमें जिले की महिला भी शामिल रहीं। जहां ये तीनों महिलाएं कार सेवा में शामिल रही, वहीं पूर्व विधायक सुशील अग्रवाल भी इनके साथ रही।ं राम मंदिर आंदोलन में अग्रणीय भूमिका निभाने वाली जिले की इन तीनों महिलाओं की मौत हो चुकी है। भव्य राम मंदिर का इनका सपना तो साकार हुआ, लेकिन यें खुद नहीं देख पाएंगी।
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मुजफ्फरनगर। रामजन्म भूमि आंदोलन में जब जेल जाने की बात आई तो भगवान राम के लिए महिलाएं भी आगे आ गईं। नर्ष 1989 के जेल भरो आंदोलन में एसपी की कोठी के सामने जब हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ, तो इन महिलाओं ने खुला विरोध किया। विमलादेवी के नेतृत्व में महिलाओं ने पुलिस लाठीचार्ज का सीधा मुकाबला किया। तीन महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल भेजा गया था।
भगवान राम के मंदिर के लिए लोगों को जागरूक करने को यहां की महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। संघ परिवार से जुड़े नईमंडी के रघुवीर शरण माहेश्वरी का परिवार इसमें सबसे आगे रहा। माहेश्वरी की पत्नी विमला देवी राष्ट्र सेविका समिति, दुर्गा वाहिनी और भाजपा महिला मोर्चा से जुड़ी रहीं। वर्ष 1989 में जब राम मंदिर के लिए जेल भरो आंदोलन शुरू हुआ तो विमला देवी के नेतृत्व में गिरफ्तारी देने को शिवचौक की ओर कूच किया गया। पुलिस ने इन लोगों को रोडवेज के सामने एसएसपी कोठी के पास रोक लिया। यहां हालात ऐसे बने की पुलिस ने हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज में जब ललित माहेश्वरी, महेंद्र रुचि, श्यामसुुंदर तायल, अतुल बंसल घायल हो गए, तो महिलाओं ने मोर्चा संभाला। विमला देवी, सत्या शर्मा, दमयंती देवी पुलिस के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए। इसमें विमलादेवी को चोट भी आई। पुलिस ने बाद में इन तीनों महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल में भेज दिया। इन महिलाओं की गिरफ्तारी ने राम मंदिर निर्माण के प्रति हिंदू समाज को इतना जागरूक किया कि हिंदू समाज ने वोट के लिए प्रत्याशी के चयन की सोच को भी बदल दिया।
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कार सेवा में शामिल हुई थीं महिलाएं
मुजफ्फरनगर। अयोध्या में चबूतरा निर्माण को जो कार सेवा हुई उसमें जिले की महिला भी शामिल रहीं। जहां ये तीनों महिलाएं कार सेवा में शामिल रही, वहीं पूर्व विधायक सुशील अग्रवाल भी इनके साथ रही।ं राम मंदिर आंदोलन में अग्रणीय भूमिका निभाने वाली जिले की इन तीनों महिलाओं की मौत हो चुकी है। भव्य राम मंदिर का इनका सपना तो साकार हुआ, लेकिन यें खुद नहीं देख पाएंगी।
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