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लैंगिंग समानता लाने को हिंदुस्तान में महिला सशक्तिकरण बहुत जरूरी
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नारी सशक्तिकरण पर भाषण प्रतियोगिता में शिक्षकों के विचार सुनती छात्राएं
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। आरके पब्लिक स्कूल में बृहस्पतिवार को अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान की कड़ी में नारी सशक्तिकरण विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसमें शिक्षिकाओं और छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण पर विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया । संस्था के चेयरमैन राजेश चौहान और प्रधानाचार्य एके सिंह ने नारी सशक्तिकरण विषय पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान में महिलाओं का सशक्त होना अति आवश्यक है। 12वीं कक्षा की छात्रा शायमा, तनु, प्राची, दीपांशी और साक्षी ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। लैंगिंग समानता लाने के लिए हिंदुस्तान में महिला सशक्तिकरण बहुत आवश्यक है। छात्रा सना, विधि, आयना, प्रिया, खुशी और मुस्कान ने कहा कि पुरुष प्रधान देश में आधी शक्ति अर्थात महिलाओं को केवल घर के कामकाज करने के लिए मजबूर किया जाता है। यदि महिला और पुरुष कदम से कदम मिलाकर चले तो ये देश की पूरी शक्ति बन जाएंगी। इससे हमारे देश विकासशील देशों की श्रेणी में खड़ा होगा। रिमझिम, चांदनी, रानिया, वंशिका, पूर्णिमा और शगुन ने कहा कि सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की क्षमता से है। इसमें वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे हैं। सुमैय्या खैबर, रुचि गर्ग और प्रिया त्यागी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर क्षेत्र में इन्हें स्वतंत्रता की जरूरत है। उन्होंने अमर उजाला के इस प्रयास की सराहना की।
ब्राह्मांड की रचना करती है स्त्री
एक सशक्त महिला अपने बच्चों का भविष्य बनाने के साथ ही देश का भविष्य भी सुनिश्चित करती है। हालांकि भारत में महिलाओं को पहली प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन समाज और परिवार में भी किया जाता है। एक स्त्री ही ब्रह्मांड की रचना करती है। स्त्री नहीं होगी तो ब्रह्मांड भी नहीं होगा। इसलिए आज के समय में महिलाओं को सशक्त बनाना जरूरी है। - मोनिका कपूर, शिक्षिका
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ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने नारी शक्ति को अपना हिंदी वर्ड ऑफ द इयर बनाया
इस बार ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने नारी शक्ति को अपना हिंदी वर्ड ऑफ द इयर बनाया है। नारी शक्ति शब्द ने कई विवादों को भी जन्म दिया और नये नियम को महिलाओं की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले लिए । न सिर्फ समाज में बल्कि सरकार में नियम और धार्मिक अनुष्ठान में भी बहुत बदलाव आया। ये सब कुछ महिला सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। - अपूर्वा त्यागी, शिक्षिका
महिलाओं को स्वच्छ व उपयुक्त पर्यावरण की जरूरत
अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिए महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। महिलाओं को स्वच्छ और उपयुक्त पर्यावरण की जरूरत है। जिससे कि वह हर क्षेत्र में अपना स्वयं का फैसला ले सके। विकास के लक्ष्य को पाने के लिए एक जरूरी हथियार के रूप में महिला सशक्तिकरण है। - रूचि गर्ग, शिक्षिका
बेटा ही नहीं बेटी को भी खूब पढ़ाएं
वर्तमान समय में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वह बेटा ही नहीं बेटी को भी खूब पढ़ाएं, जिससे कि वह अपने महत्व पूर्ण निर्णय स्वयं ले सके और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सके। - राजेश चौहान, चेयरमैन
महिलाओं को सशक्त बनने के लिए करना पड़ रहा संघर्ष
वर्तमान समय में महिलाओं को खुद को साबित करने और सशक्त बनने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन इतना जरूर है कि महिलाओं के संघर्ष में कुछ कमी आई है अर्थात महिलाओं की स्थिति में पहले से कुछ सुधार हुआ है। कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों में भी कमी आई है। - लुबना, छात्रा
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजनाएं बना रही सरकार
हमारी सरकार कई ऐसी योजनाओं बना रही हैं जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सके और उन्हें अपना हक मिल सके। क्योंकि आज भी महिला पारिवारिक बंधक में बंधी हुई है। वह पूरी तरह से अपनी मर्जी के फैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि घर के कामकाज की जिम्मेदारी महिलाओं को ही दी गई है। - स्वाति राणा, छात्रा
घर की रसोई से लेकर देश की सीमा तक पहुंची महिलाएं
वर्तमान समय में नारी घर की रसोई संभालने के लेकर देश की सीमा तक आ गई है। आज वह अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन कर रही है। - प्राची गर्ग, छात्रा
महिला सशक्तिकरण पर अमल करना जरूरी
हमे मिल जुल कर महिला सशक्तिकरण पर अमल करना चाहिए, क्योंकि हमारे जरिये ही इस देश की सोच बदल सकती है। अगर इस देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने सोच बदल ले तो पूरे देश की सोच बदल सकती है। - आलिया, छात्रा
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कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया । संस्था के चेयरमैन राजेश चौहान और प्रधानाचार्य एके सिंह ने नारी सशक्तिकरण विषय पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान में महिलाओं का सशक्त होना अति आवश्यक है। 12वीं कक्षा की छात्रा शायमा, तनु, प्राची, दीपांशी और साक्षी ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। लैंगिंग समानता लाने के लिए हिंदुस्तान में महिला सशक्तिकरण बहुत आवश्यक है। छात्रा सना, विधि, आयना, प्रिया, खुशी और मुस्कान ने कहा कि पुरुष प्रधान देश में आधी शक्ति अर्थात महिलाओं को केवल घर के कामकाज करने के लिए मजबूर किया जाता है। यदि महिला और पुरुष कदम से कदम मिलाकर चले तो ये देश की पूरी शक्ति बन जाएंगी। इससे हमारे देश विकासशील देशों की श्रेणी में खड़ा होगा। रिमझिम, चांदनी, रानिया, वंशिका, पूर्णिमा और शगुन ने कहा कि सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की क्षमता से है। इसमें वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे हैं। सुमैय्या खैबर, रुचि गर्ग और प्रिया त्यागी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर क्षेत्र में इन्हें स्वतंत्रता की जरूरत है। उन्होंने अमर उजाला के इस प्रयास की सराहना की।
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ब्राह्मांड की रचना करती है स्त्री
एक सशक्त महिला अपने बच्चों का भविष्य बनाने के साथ ही देश का भविष्य भी सुनिश्चित करती है। हालांकि भारत में महिलाओं को पहली प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन समाज और परिवार में भी किया जाता है। एक स्त्री ही ब्रह्मांड की रचना करती है। स्त्री नहीं होगी तो ब्रह्मांड भी नहीं होगा। इसलिए आज के समय में महिलाओं को सशक्त बनाना जरूरी है। - मोनिका कपूर, शिक्षिका
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ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने नारी शक्ति को अपना हिंदी वर्ड ऑफ द इयर बनाया
इस बार ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने नारी शक्ति को अपना हिंदी वर्ड ऑफ द इयर बनाया है। नारी शक्ति शब्द ने कई विवादों को भी जन्म दिया और नये नियम को महिलाओं की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले लिए । न सिर्फ समाज में बल्कि सरकार में नियम और धार्मिक अनुष्ठान में भी बहुत बदलाव आया। ये सब कुछ महिला सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। - अपूर्वा त्यागी, शिक्षिका
महिलाओं को स्वच्छ व उपयुक्त पर्यावरण की जरूरत
अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिए महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। महिलाओं को स्वच्छ और उपयुक्त पर्यावरण की जरूरत है। जिससे कि वह हर क्षेत्र में अपना स्वयं का फैसला ले सके। विकास के लक्ष्य को पाने के लिए एक जरूरी हथियार के रूप में महिला सशक्तिकरण है। - रूचि गर्ग, शिक्षिका
बेटा ही नहीं बेटी को भी खूब पढ़ाएं
वर्तमान समय में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वह बेटा ही नहीं बेटी को भी खूब पढ़ाएं, जिससे कि वह अपने महत्व पूर्ण निर्णय स्वयं ले सके और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सके। - राजेश चौहान, चेयरमैन
महिलाओं को सशक्त बनने के लिए करना पड़ रहा संघर्ष
वर्तमान समय में महिलाओं को खुद को साबित करने और सशक्त बनने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन इतना जरूर है कि महिलाओं के संघर्ष में कुछ कमी आई है अर्थात महिलाओं की स्थिति में पहले से कुछ सुधार हुआ है। कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों में भी कमी आई है। - लुबना, छात्रा
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजनाएं बना रही सरकार
हमारी सरकार कई ऐसी योजनाओं बना रही हैं जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सके और उन्हें अपना हक मिल सके। क्योंकि आज भी महिला पारिवारिक बंधक में बंधी हुई है। वह पूरी तरह से अपनी मर्जी के फैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि घर के कामकाज की जिम्मेदारी महिलाओं को ही दी गई है। - स्वाति राणा, छात्रा
घर की रसोई से लेकर देश की सीमा तक पहुंची महिलाएं
वर्तमान समय में नारी घर की रसोई संभालने के लेकर देश की सीमा तक आ गई है। आज वह अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन कर रही है। - प्राची गर्ग, छात्रा
महिला सशक्तिकरण पर अमल करना जरूरी
हमे मिल जुल कर महिला सशक्तिकरण पर अमल करना चाहिए, क्योंकि हमारे जरिये ही इस देश की सोच बदल सकती है। अगर इस देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने सोच बदल ले तो पूरे देश की सोच बदल सकती है। - आलिया, छात्रा

आरेक पब्लिक स्कूल में अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम में मंचासीन श- फोटो : DEVBAND