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Muzaffarnagar News: बीस साल बाद दूधली में फिर तैयार होंगे चक, लटकी चकबंदी
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। बीस साल से दूधली गांव के किसान चकबंदी के चक्कर में फंसे हुए हैं। डीएम उमेश मिश्रा ने धारा 20 की कार्रवाई निरस्त करने के बाद दोबारा से चकों को तैयार करने का आदेश दिए। वर्तमान में चकबंदी कार्य बंद हैं। किसानों को खेतों पर चकरोड़ और पानी पहुंचने की दिक्कत बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट में किसानों ने किसान मजदूर संगठन के नेता बिल्लू राणा को पक्षकार बनाते हुए रिमांड प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर कर दी हैं।
ऐतिहासिक गांव में शासन ने गांव में अगस्त 2006 में चकबंदी कराने का फैसला लिया था। दो दशक बीत गए, लेकिन अभी तक आधा काम पूरा हो पाया था। किसानों को आवंटन के लिए नक्शा 23 की कार्रवाई चल रही थी। इसी बीच किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन बखेड़ा खड़ा किया। इसके बाद डीएम ने कमेटी से जांच कराई और धारा 20 प्रक्रिया खारिज कर दी। फिलहाल चकबंदी का काम अधर में लटका है।
इससे पहले वर्ष 1960 में यह गांव चकबंदी से गुजर चुका है। किसानों का कहना हैं उस समय मात्र एक जंगल की चकबंदी हुई थी। खादर और भूड़ की चकबंदी नहीं हो पाई थी। तब से ना कोई चकरोड़ है, ना नाली है।
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किसान शिव कुमार राणा, शेर सिंह राणा का कहना है बंजर अथवा ग्राम समाज की खाली भूमि निर्धारित नहीं होने से खेल मैदान नहीं बन पा रहा है। पानी निकालने जैसी मामूली बातों पर किसानों में टकराव हो जाता है। किसान मदन पाल सिंह, ब्रजपाल सिंह एवं ब्रजपाल ने रिट में किसान नेता बिल्लू राणा, डीएम और चकबंदी आयुक्त सहित आठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया हैं।
चकबंदी अधिकारी रामकेश कटियार ने बताया गांव की चकबंदी प्रक्रिया को डीएम ने रिमांड कर दिया है। कुछ किसानों ने उच्च न्यायालय में याचिका कर दी है। इसी कारण कार्य रुका हुआ है।
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पार्टीबाजी के चक्कर में फंसी चकबंदी: उदय राज
फोटो
दूधली सहकारी समिति के पूर्व सभापति उदय राज सिंह कहते हैं गांव में 1801 चक हैं। इनमें 275 किसानों ने आपत्तियां डाली थी। जो मात्र 15.4 फीसदी बैठती हैं। जांच कमेटी की आख्या के बाद डीएम ने छह महीने बाद धारा 20 को रिमांड कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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आपसी टकराव के कारण रुकी चकबंदी: महेंद्र
फोटो
पूर्व प्रधान डॉ. महेंद्र सिंह कहते हैं गांव में अंतिम चरणों में प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन कुछ लोगों ने अवैध तरीके से चक बनवा लिए और अच्छे चकों को गलत स्थान पर लगवा दिया। आपसी टकराव की वजह से सालभर से काम रुका है।
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प्रक्रिया पर रोक नाइंसाफी: ब्रजपाल
फोटो
किसान ब्रजपाल सिंह पुंडीर ने बताया कि डीएम स्तर से चकबंदी प्रक्रिया रिमांड करना किसानों के साथ नाइंसाफी है। लोग नलकूप नहीं लगा पा रहे और खेतों में पौधारोपण करने से वंचित हैं। गांव में चकबंदी की धारा 20 की प्रक्रिया अंतिम चरणों में थी। लेकिन अब रिमांड करना उचित नहीं है।
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चकरोड़ चिन्हित नहीं, बना विवाद: सैनी
फोटो
किसान नरेंद्र सैनी कहते है दूधली में चकबंदी प्रक्रिया पर रोक के कारण ग्रामीणों को दिक्कत उठानी पड़ रही हैं। प्रक्रिया अधर में होने से खेतों में किसान पेड़ नहीं लगा पा रहा। चकरोड़ के रास्ते चिह्नित नहीं होने से विवाद की स्थिति बनी हैं।
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आयुक्त की ओर से जारी किया गया पत्र
चकबंदी आयुक्त हरिकेश भास्कर यशोद का प्रदेश भर में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट रूप से आदेश है। उन्होंने पत्र में उल्लेखित किया कि अपील के दौरान धारा 20 की कार्रवाई पर चकबंदी अधिकारियों द्वारा आपत्तियों के निस्तारण के समय पर्याप्त आधार के बिना फिर से चकबंदी योजना के तहत चकों के तैयार करने के फैसले से खातेदारों की समस्याएं बढ़ती है। बिना वजह किसानों को लंबी प्रक्रिया और मुकदमेबाजी में उलझना पड़ता है।
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इस प्रक्रिया से गुजरते हैं किसान
-धारा 9 में बंटवारे कुर्रे और हिस्सों आदि के विवाद निस्तारण
-धारा 20 में आपत्तियों पर सुनवाई
-नक्शा 23 पर चक कटते है।
-धारा 24 में कब्जा परिवर्तन
-धारा 52 किसानों का चक पर कब्जा दिलाया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। बीस साल से दूधली गांव के किसान चकबंदी के चक्कर में फंसे हुए हैं। डीएम उमेश मिश्रा ने धारा 20 की कार्रवाई निरस्त करने के बाद दोबारा से चकों को तैयार करने का आदेश दिए। वर्तमान में चकबंदी कार्य बंद हैं। किसानों को खेतों पर चकरोड़ और पानी पहुंचने की दिक्कत बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट में किसानों ने किसान मजदूर संगठन के नेता बिल्लू राणा को पक्षकार बनाते हुए रिमांड प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर कर दी हैं।
ऐतिहासिक गांव में शासन ने गांव में अगस्त 2006 में चकबंदी कराने का फैसला लिया था। दो दशक बीत गए, लेकिन अभी तक आधा काम पूरा हो पाया था। किसानों को आवंटन के लिए नक्शा 23 की कार्रवाई चल रही थी। इसी बीच किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन बखेड़ा खड़ा किया। इसके बाद डीएम ने कमेटी से जांच कराई और धारा 20 प्रक्रिया खारिज कर दी। फिलहाल चकबंदी का काम अधर में लटका है।
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इससे पहले वर्ष 1960 में यह गांव चकबंदी से गुजर चुका है। किसानों का कहना हैं उस समय मात्र एक जंगल की चकबंदी हुई थी। खादर और भूड़ की चकबंदी नहीं हो पाई थी। तब से ना कोई चकरोड़ है, ना नाली है।
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किसान शिव कुमार राणा, शेर सिंह राणा का कहना है बंजर अथवा ग्राम समाज की खाली भूमि निर्धारित नहीं होने से खेल मैदान नहीं बन पा रहा है। पानी निकालने जैसी मामूली बातों पर किसानों में टकराव हो जाता है। किसान मदन पाल सिंह, ब्रजपाल सिंह एवं ब्रजपाल ने रिट में किसान नेता बिल्लू राणा, डीएम और चकबंदी आयुक्त सहित आठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया हैं।
चकबंदी अधिकारी रामकेश कटियार ने बताया गांव की चकबंदी प्रक्रिया को डीएम ने रिमांड कर दिया है। कुछ किसानों ने उच्च न्यायालय में याचिका कर दी है। इसी कारण कार्य रुका हुआ है।
पार्टीबाजी के चक्कर में फंसी चकबंदी: उदय राज
फोटो
दूधली सहकारी समिति के पूर्व सभापति उदय राज सिंह कहते हैं गांव में 1801 चक हैं। इनमें 275 किसानों ने आपत्तियां डाली थी। जो मात्र 15.4 फीसदी बैठती हैं। जांच कमेटी की आख्या के बाद डीएम ने छह महीने बाद धारा 20 को रिमांड कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
आपसी टकराव के कारण रुकी चकबंदी: महेंद्र
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पूर्व प्रधान डॉ. महेंद्र सिंह कहते हैं गांव में अंतिम चरणों में प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन कुछ लोगों ने अवैध तरीके से चक बनवा लिए और अच्छे चकों को गलत स्थान पर लगवा दिया। आपसी टकराव की वजह से सालभर से काम रुका है।
प्रक्रिया पर रोक नाइंसाफी: ब्रजपाल
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किसान ब्रजपाल सिंह पुंडीर ने बताया कि डीएम स्तर से चकबंदी प्रक्रिया रिमांड करना किसानों के साथ नाइंसाफी है। लोग नलकूप नहीं लगा पा रहे और खेतों में पौधारोपण करने से वंचित हैं। गांव में चकबंदी की धारा 20 की प्रक्रिया अंतिम चरणों में थी। लेकिन अब रिमांड करना उचित नहीं है।
चकरोड़ चिन्हित नहीं, बना विवाद: सैनी
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किसान नरेंद्र सैनी कहते है दूधली में चकबंदी प्रक्रिया पर रोक के कारण ग्रामीणों को दिक्कत उठानी पड़ रही हैं। प्रक्रिया अधर में होने से खेतों में किसान पेड़ नहीं लगा पा रहा। चकरोड़ के रास्ते चिह्नित नहीं होने से विवाद की स्थिति बनी हैं।
आयुक्त की ओर से जारी किया गया पत्र
चकबंदी आयुक्त हरिकेश भास्कर यशोद का प्रदेश भर में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट रूप से आदेश है। उन्होंने पत्र में उल्लेखित किया कि अपील के दौरान धारा 20 की कार्रवाई पर चकबंदी अधिकारियों द्वारा आपत्तियों के निस्तारण के समय पर्याप्त आधार के बिना फिर से चकबंदी योजना के तहत चकों के तैयार करने के फैसले से खातेदारों की समस्याएं बढ़ती है। बिना वजह किसानों को लंबी प्रक्रिया और मुकदमेबाजी में उलझना पड़ता है।
इस प्रक्रिया से गुजरते हैं किसान
-धारा 9 में बंटवारे कुर्रे और हिस्सों आदि के विवाद निस्तारण
-धारा 20 में आपत्तियों पर सुनवाई
-नक्शा 23 पर चक कटते है।
-धारा 24 में कब्जा परिवर्तन
-धारा 52 किसानों का चक पर कब्जा दिलाया जाता है।