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हमारे प्रधान:-बच्चों का भविष्य संवारने का करेंगे प्रयास
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बच्चों का भविष्य संवारने का करेंगे प्रयास
मुजफ्फरनगर, भौराकलां। भौराखुर्द के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान निश्चल उर्फ हेमंत बालियान ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर ग्राम प्रधान बन कर ग्रामीणों की सेवा करने का निश्चय लिया है। गांव का विकास कराना उनका मुख्य उद्देश्य है। ग्रामीणों ने भी 21 वर्षीय युवा निश्चल को अपना प्रधान चुना है। ग्रामीणों को भी उनसे काफी आशा है। निश्चल कहते हैं कि गांव के विकास में उनकी अनेक प्राथमिकताएं है। जूनियर हाईस्कूल के बच्चों को सीबीएसई पद्धति पर शिक्षा मुहैया कराकर भविष्य संवारने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षित कर ही देश के भविष्य का निर्माण कराया जा सकता है। हमारा मानना है कि शिक्षा के बिना किसी का जीवन अधूरा है। मुख्य रूप से लड़कियों की शिक्षा को लेकर काफी काम करने की जरूरत है। लड़कियों की शिक्षित होने से विकास का द्वार खुद खुल जाएगा। गांव में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा खुलवाने और पानी की टंकी से पूरे गांव में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के अलावा सीवर लाइन बनवाना उनका लक्ष्य है। गांव में पशु चिकित्सालय भी खुलवाया जाएगा। इन सुविधाओं के हो जाने के बाद यहां के लोगों को काफी सहूलियत होगी। विकास को बढ़ावा देकर ही ग्रामीणों का कर्ज उतारा जा सकता है। पूरी कोशिश करेंगे कि हम सभी के साथ मिलकर गांव का विकास कराने में सफल हों। मुझसे जो लोगों को आस है उनकी उम्मीदों पर भी खरा उतरें।
प्रधान निश्चल उर्फ हेमंत बालियान की प्रोफाइल
-सबसे कम उम्र के प्रधान बने हैं।
सिविल इंजीनियर की डिग्री हासिल की है।
अपनी काबिलियत पर पहली बार में ही प्रधान बने
परिवार में किसी सदस्य ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा
खेती किसानी है प्रमुख व्यवसाय
भौराखुर्द में जगी विकास की आस
भौराकलां। गांव भौराखुर्द नामक गांव एक दौर में अपराधियों की गतिविधियों के कारण खूनी भौरा के नाम से प्रचलित हो गया था। गैंगवार के कारण अनेक परिवार गांव से पलायन कर गए थे। एक दशक से स्थिति बदल रही है। युवक निश्चल उर्फ हेमंत बालियान को ग्रामीणों ने प्रधान बनाया। फिलहाल गांव के लोगों को विकास की आशा जगी है। गांव की आबादी करीब 6000 हजार है। इस बार हुए पंचायत चुनाव में लगभग 3400 मतदाताओं ने मत डालकर प्रधान चुना है। हिंदू-मुस्लिम मिश्रित आबादी वाले गांव में लोहार बिरादरी काफी संख्या में हैं। इनका मुख्य और परंपरागत व्यवसाय लोहे के बड़े-बड़े गेट दरवाजे बनाना है। यहां के तैयार दरवाजे कई जिलों में दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। गांव में एक मात्र परिषदीय विद्यालय है। स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है। पास के कसबे सिसौली में उपचार के लिए जाना पड़ता है।
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मुजफ्फरनगर, भौराकलां। भौराखुर्द के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान निश्चल उर्फ हेमंत बालियान ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर ग्राम प्रधान बन कर ग्रामीणों की सेवा करने का निश्चय लिया है। गांव का विकास कराना उनका मुख्य उद्देश्य है। ग्रामीणों ने भी 21 वर्षीय युवा निश्चल को अपना प्रधान चुना है। ग्रामीणों को भी उनसे काफी आशा है। निश्चल कहते हैं कि गांव के विकास में उनकी अनेक प्राथमिकताएं है। जूनियर हाईस्कूल के बच्चों को सीबीएसई पद्धति पर शिक्षा मुहैया कराकर भविष्य संवारने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षित कर ही देश के भविष्य का निर्माण कराया जा सकता है। हमारा मानना है कि शिक्षा के बिना किसी का जीवन अधूरा है। मुख्य रूप से लड़कियों की शिक्षा को लेकर काफी काम करने की जरूरत है। लड़कियों की शिक्षित होने से विकास का द्वार खुद खुल जाएगा। गांव में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा खुलवाने और पानी की टंकी से पूरे गांव में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के अलावा सीवर लाइन बनवाना उनका लक्ष्य है। गांव में पशु चिकित्सालय भी खुलवाया जाएगा। इन सुविधाओं के हो जाने के बाद यहां के लोगों को काफी सहूलियत होगी। विकास को बढ़ावा देकर ही ग्रामीणों का कर्ज उतारा जा सकता है। पूरी कोशिश करेंगे कि हम सभी के साथ मिलकर गांव का विकास कराने में सफल हों। मुझसे जो लोगों को आस है उनकी उम्मीदों पर भी खरा उतरें।
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प्रधान निश्चल उर्फ हेमंत बालियान की प्रोफाइल
-सबसे कम उम्र के प्रधान बने हैं।
सिविल इंजीनियर की डिग्री हासिल की है।
अपनी काबिलियत पर पहली बार में ही प्रधान बने
परिवार में किसी सदस्य ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा
खेती किसानी है प्रमुख व्यवसाय
भौराखुर्द में जगी विकास की आस
भौराकलां। गांव भौराखुर्द नामक गांव एक दौर में अपराधियों की गतिविधियों के कारण खूनी भौरा के नाम से प्रचलित हो गया था। गैंगवार के कारण अनेक परिवार गांव से पलायन कर गए थे। एक दशक से स्थिति बदल रही है। युवक निश्चल उर्फ हेमंत बालियान को ग्रामीणों ने प्रधान बनाया। फिलहाल गांव के लोगों को विकास की आशा जगी है। गांव की आबादी करीब 6000 हजार है। इस बार हुए पंचायत चुनाव में लगभग 3400 मतदाताओं ने मत डालकर प्रधान चुना है। हिंदू-मुस्लिम मिश्रित आबादी वाले गांव में लोहार बिरादरी काफी संख्या में हैं। इनका मुख्य और परंपरागत व्यवसाय लोहे के बड़े-बड़े गेट दरवाजे बनाना है। यहां के तैयार दरवाजे कई जिलों में दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। गांव में एक मात्र परिषदीय विद्यालय है। स्वास्थ्य सेवाएं नहीं है। पास के कसबे सिसौली में उपचार के लिए जाना पड़ता है।
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