Muzaffarnagar News: कब आएगी गंगा की धारा, फाइलों से नहीं निकली नमामि गंगे योजना की रिपोर्ट
2018 में केंद्रीय नदी एवं जल संसाधन मंत्रालय की टीम ने कराया था प्रस्ताव तैयार
14 जुलाई 2019 में शुकदेव आश्रम आए थे मुख्यमंत्री योगी, तभी भी संतों ने उठाई थी मांग
लोक-लुभावन घोषणाएं ही शुकतीर्थ के नसीब में आई, लेकिन सरकारें नहीं दिखी गंभीर
विस्तार
मुजफ्फरनगर में पौराणिक शुकतीर्थ में अविरल गंगा की जलधारा लाने के लिए नमामि गंगे योजना की सर्वे रिपोर्ट भी फाइलों में सिमट गई है। वर्ष 2018 में केंद्रीय नदी एवं जल संसाधन मंत्रालय की टीम ने उत्तराखंड से शुकतीर्थ तक सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया था, मगर इस दिशा में अब तक कोई सार्थक पहल नहीं हो पाई है।
बाणगंगा में काली पानी श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है। महाभारत युग से तपोभूमि शुकतीर्थ से छूकर गंगा नदी बहती थी। शास्त्रों में इसका जिक्र है। धार्मिक नगरी में रेत के ऊंचे टीले इन तथ्यों के साक्षी है। हजारों वर्ष के अंतराल में गंगा सिमटती गई। अब गंगा क्षेत्र में खेती हो रही है। फिलहाल शुकतीर्थ से करीब पांच किलोमीटर दूर गंगा की मुख्य धारा बह रही है, जो बिजनौर बैराज से होकर आगे चली जाती है।
केंद्र सरकार ने जब नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा की जल धारा के संरक्षण की घोषणा की तो शुकतीर्थ को लेकर भी नई उम्मीद जगी। तीर्थ में नमामि गंगे अभियान को लेकर अनेक कार्यक्रम हुए। केंद्रीय अफसरों की टीम ने सर्वे किया कि कैसे उत्तराखंड से गंगा की धारा शुकतीर्थ तक लाई जाए, जो आगे मुख्य गंगा में मिल जाए। बीते चार साल से यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है। सवाल यह है कि कब नमामि गंगे योजना के बजट में शुकतीर्थ को गंगा धारा मिलेगी।
शुकतीर्थ में कार्तिक पूर्णिमा, ज्येष्ठ गंगा दशहरा आदि मेलों के समय सिंचाई विभाग की ओर से बाण गंगा में मुख्य गंगा से जल छोड़ा जाता है, ताकि श्रद्धालु डुबकी लगा सके। इसके अलावा वर्षभर शुकतीर्थ के गंगा घाट पर स्नान योग्य जल नहीं मिलता।
शुकतीर्थ चमका, लेकिन गंगा स्नान का संकट
तीर्थ के जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने अपने अथक पुरुषार्थ से संतों की तपोभूमि को भागवत का मुख्य केंद्र बनाया। देश-विदेश से प्रति वर्ष लाखों श्रद्धालु श्रीमद्गागवत कथा सप्ताह श्रवण के लिए तीर्थ नगरी आते है। भागवत भक्तों और तीर्थ यात्रियों के लिए गंगा स्नान का संकट रहता है।
गंगा धारा लाने की मांग सात दशक पुरानी
शुकतीर्थ में गंगा धारा लाने की मांग सात दशक पुरानी है। कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेले में स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू पधारे थे। वीतराग संत ने गंगा धारा अविरल लाने की मांग पहली बार रखी। तब से आज तक जो भी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, पीएम, सीएम और राज्यपाल भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम आए, सभी को यह मांग पत्र सौंपे गए। मगर, कोई गंभीरता सरकारों ने नहीं बरती। सूबे में भाजपा सरकार के गठन के उपरांत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने प्रयास प्रारंभ किए तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 जुलाई, 2019 को शुकदेव आश्रम पधारे। तीर्थ में पर्यटन विभाग से नौ करोड़ के विकास कार्य पूरे कराए। मगर, गंगा की जल धारा के मामले में अभी तक भाजपा सरकार ठोस निर्णय नहीं कर पाई है।
परवान नहीं चढ़ पाए प्रयास
वर्षो से लोक-लुभावन घोषणाएं ही शुकतीर्थ के नसीब में आई है। गंगा की अविरल धारा लाने का वायदा तमाम राजनीतिज्ञ करते रहे है। शुकदेव आश्रम पधारे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा था कि भाजपा सरकार शुकतीर्थ में गंगा धारा लाएगी, लेकिन धरातल पर ये तस्वीर धुंधली है। विधानसभा सत्र में क्षेत्रीय विधायक चंदन सिंह चौहान की ओर से पूछे सवालों पर जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह साफ कह चुके है कि शुकतीर्थ में गंगा धारा लाने की अभी सरकार की कोई योजना नहीं है।
राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल इस मामले को गृहमंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रख चुके है, मगर नतीजा कोई सामने नहीं आया है। केंद्रीय राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान भी सरकार के पिछले कार्यकाल में नमामि गंगे मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके है। शुकतीर्थ सर्वे में भी उनकी भूमिका रही थी, लेकिन गंगा की धारा नहीं आई।
सीएम को भेजा गया नया प्रस्ताव
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद कहते है कि सरकार उत्तराखंड से एक पक्के चैनल का निर्माण कर शुकतीर्थ तक गंगा की स्वच्छ जलधारा लाएं, ताकि धार्मिक नगरी का महत्व और यश बढ़े। गंगा स्नान का पुण्य मिलने से तीर्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। भागवत भूमि पौराणिक महत्व की दृष्टि से देश के श्रेष्ठ तीर्थों में एक है। इस संबंध में एक नया प्रस्ताव सीएम योगी आदित्यनाथ को प्रेषित किया गया है।
शुकतीर्थ में गंगा की धारा जरूर आएगी
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल का कहना है कि लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गंगा की धारा शुकतीर्थ तक लाने के लिए वह कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जो जल्द ही सफल होगी।