{"_id":"60490dc78ebc3e8d30545694","slug":"vote-three-population-seven-yet-manganpur-reserved-muzaffarnagar-news-mrt529342081","type":"story","status":"publish","title_hn":"वोट तीन, आबादी सात, फिर भी अनुसूचित में आरक्षित मंगनपुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वोट तीन, आबादी सात, फिर भी अनुसूचित में आरक्षित मंगनपुर
विज्ञापन
वोट तीन, आबादी सात, फिर भी मंगनपुर आरक्षित
मुजफ्फरनगर, चरथावल। मंगनपुर गांव ठाकुर बहुल है। इस गांव में अनुसूचित जाति के एक परिवार की सात लोगों की आबादी पर तीन वोट हैं। इसके बावजूद गांव को अनुसूचित जाति के लिए प्रधान पद को रिजर्व कर दिया गया। निवर्तमान प्रधान सहित कई लोगों ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार के आदेश को आधारहीन और तथ्यों से परे बताकर सामान्य कराने की मांग की है।
ग्रामीण संजू राणा का कहना है वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर गांव की आबादी 1236 है। उस दौरान गांव में सिर्फ 18 लोगों की आबादी एससी में संकलित की गई थी। वर्ष 2012 में गांव छोड़कर एक एससी का परिवार पंजाब जाकर रहने लगा। उन्होंने यहां से वोट कटवाकर वहीं बनवा ली। ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में भी उनका उल्लेख हटा दिया गया। वर्तमान में रनवा के परिवार की तीन वोट है और सदस्यों की संख्या सिर्फ सात। इसके बावजूद गांव का आरक्षित करने से नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया है।
निवर्तमान प्रधान अनिल सिंह दो योजनाओं से प्रधान पद पर काबिज रहे हैं। इस बार आरक्षण से उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। इनके अलावा ग्रामीण अंकित, सचिन, कृपाल, नरेंद्र, राजेंद्र, सोनू, अति, राम सिंह और राजपाल आदि ने बीडीओ से आपत्ति जताकर सामान्य जाति में रखने की मांग उठाई है। पूर्व प्रधान प्रमोद पुंडीर ने बताया कि एक परिवार के तीन सदस्यों के होने से चुनाव नहीं हो पाएगा। विभाग के कर्मचारियों और अफसरों द्वारा तीन वोटों पर एससी में आरक्षित करने का फरमान लोगों की समझ से परे है। उन्होंने विभाग से आबादी और वोटों के आधार पर ही आरक्षण की व्यवस्था कराने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, चरथावल। मंगनपुर गांव ठाकुर बहुल है। इस गांव में अनुसूचित जाति के एक परिवार की सात लोगों की आबादी पर तीन वोट हैं। इसके बावजूद गांव को अनुसूचित जाति के लिए प्रधान पद को रिजर्व कर दिया गया। निवर्तमान प्रधान सहित कई लोगों ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार के आदेश को आधारहीन और तथ्यों से परे बताकर सामान्य कराने की मांग की है।
ग्रामीण संजू राणा का कहना है वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर गांव की आबादी 1236 है। उस दौरान गांव में सिर्फ 18 लोगों की आबादी एससी में संकलित की गई थी। वर्ष 2012 में गांव छोड़कर एक एससी का परिवार पंजाब जाकर रहने लगा। उन्होंने यहां से वोट कटवाकर वहीं बनवा ली। ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में भी उनका उल्लेख हटा दिया गया। वर्तमान में रनवा के परिवार की तीन वोट है और सदस्यों की संख्या सिर्फ सात। इसके बावजूद गांव का आरक्षित करने से नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया है।
विज्ञापन
निवर्तमान प्रधान अनिल सिंह दो योजनाओं से प्रधान पद पर काबिज रहे हैं। इस बार आरक्षण से उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। इनके अलावा ग्रामीण अंकित, सचिन, कृपाल, नरेंद्र, राजेंद्र, सोनू, अति, राम सिंह और राजपाल आदि ने बीडीओ से आपत्ति जताकर सामान्य जाति में रखने की मांग उठाई है। पूर्व प्रधान प्रमोद पुंडीर ने बताया कि एक परिवार के तीन सदस्यों के होने से चुनाव नहीं हो पाएगा। विभाग के कर्मचारियों और अफसरों द्वारा तीन वोटों पर एससी में आरक्षित करने का फरमान लोगों की समझ से परे है। उन्होंने विभाग से आबादी और वोटों के आधार पर ही आरक्षण की व्यवस्था कराने की मांग की है।
विज्ञापन