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ग्रामीणों ने पानी के कनेक्शन नहीं लिए
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1-जानसठ के गांव कवाल में स्थित पानी की टंकी।
- फोटो : KHATAULI
ग्रामीणों ने पानी के कनेक्शन नहीं लिए, टंकी बंद करनी पड़ी
जानसठ। गांव कवाल में 18 साल पूर्व ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी की टंकी बनी थी। यह टंकी कई साल तक बंद पड़ी रही। वर्तमान ग्राम प्रधान ने इस पानी टंकी को चालू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने कनेक्शन नहीं लिए। प्रधान को मजबूरन पानी की टंकी बंद करानी पड़ी। हालांकि गांव में भूमिगत पाइप लाइन भी जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
कवाल गांव की आबादी 17-18 हजार के लगभग पहुंच चुकी है। सन 2002 में जल निगम की ओर से ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिए लाखों रुपयों की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। गांव में भूमिगत पाइप लाइन भी बिछाई गई थी। उस वक्त ग्रामीणों ने टंकी के कनेक्शन भी लिए थे। कुछ ही माह तक टंकी से ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति हो सकी थी। इसके बाद गांव में जगह जगह से भूमिगत पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने लगी थी। इसके अलावा टंकी के नलकूप का बिजली का ट्रांसफार्मर और विद्युत मोटर भी चोरों ने चोरी कर लिया था। इस कारण कई साल तक टंकी बंद पड़ी रही। पूर्व प्रधान महेंद्र सैनी ने बताया कि उन्होंने थाने में चोरी का मुकदमा भी दर्ज कराया था। गांव के वर्तमान प्रधान मोहम्मद इस्लाम ने ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी को चालू कराया था। टंकी चालू तो करा दी गई थी, लेकिन ग्रामीणों ने अपने घरों में हैंडपंप लगे होने की वजह से टंकी के कनेक्शन नहीं लिए। जिन ग्रामीणों के मकानों में टंकी के कनेक्शन थे, उनके मकानों तक इसलिए पानी नहीं पहुंच सका, क्योंकि गांव में जगह जगह से भूमिगत पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
-गांव में पानी की टंकी चालू करा दी गई थी। नलकूप पर एक ऑपरेटर भी रखा गया था। गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों से टंकी के कनेक्शन लेने को कहा गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने टंकी के कनेक्शन नहीं लिए हैं। जिस कारण मजबूरन पानी की टंकी को बंद करना पड़ा। अगर ग्रामीण कनेक्शन लेते हैं, तो पानी की टंकी को चालू करा दी जाएगी।
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मोहम्म्द इस्लाम, ग्राम प्रधान।
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जानसठ। गांव कवाल में 18 साल पूर्व ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी की टंकी बनी थी। यह टंकी कई साल तक बंद पड़ी रही। वर्तमान ग्राम प्रधान ने इस पानी टंकी को चालू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने कनेक्शन नहीं लिए। प्रधान को मजबूरन पानी की टंकी बंद करानी पड़ी। हालांकि गांव में भूमिगत पाइप लाइन भी जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
कवाल गांव की आबादी 17-18 हजार के लगभग पहुंच चुकी है। सन 2002 में जल निगम की ओर से ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिए लाखों रुपयों की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। गांव में भूमिगत पाइप लाइन भी बिछाई गई थी। उस वक्त ग्रामीणों ने टंकी के कनेक्शन भी लिए थे। कुछ ही माह तक टंकी से ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति हो सकी थी। इसके बाद गांव में जगह जगह से भूमिगत पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने लगी थी। इसके अलावा टंकी के नलकूप का बिजली का ट्रांसफार्मर और विद्युत मोटर भी चोरों ने चोरी कर लिया था। इस कारण कई साल तक टंकी बंद पड़ी रही। पूर्व प्रधान महेंद्र सैनी ने बताया कि उन्होंने थाने में चोरी का मुकदमा भी दर्ज कराया था। गांव के वर्तमान प्रधान मोहम्मद इस्लाम ने ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी को चालू कराया था। टंकी चालू तो करा दी गई थी, लेकिन ग्रामीणों ने अपने घरों में हैंडपंप लगे होने की वजह से टंकी के कनेक्शन नहीं लिए। जिन ग्रामीणों के मकानों में टंकी के कनेक्शन थे, उनके मकानों तक इसलिए पानी नहीं पहुंच सका, क्योंकि गांव में जगह जगह से भूमिगत पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
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-गांव में पानी की टंकी चालू करा दी गई थी। नलकूप पर एक ऑपरेटर भी रखा गया था। गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों से टंकी के कनेक्शन लेने को कहा गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने टंकी के कनेक्शन नहीं लिए हैं। जिस कारण मजबूरन पानी की टंकी को बंद करना पड़ा। अगर ग्रामीण कनेक्शन लेते हैं, तो पानी की टंकी को चालू करा दी जाएगी।
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मोहम्म्द इस्लाम, ग्राम प्रधान।