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ऋण माफी को दोबारा होगा सत्यापन

Wed, 25 Dec 2019 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Dec 2019 12:15 AM IST
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Verification will be done again for loan waiver
ऋण माफी के लिए दोबारा होगा सत्यापन
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मुजफ्फरनगर। योजना के अंतिम चरण में पात्र पाए गए किसानों को ऋण माफी का लाभ पाने के लिए एक बार फिर सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। शासन ने पात्र पाए गए 1120 किसानों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। उधर, करीब दो माह पहले इस योजना के बंद होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसान स्वयं को पात्र बताते हुए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
प्रदेश सरकार की फसली ऋण मोचन योजना में किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ करने की घोषणा की थी। इसके तहत नॉन एनपीए खातों में 40357 और एनपीए खातों में 4945 किसानों का ऋण माफ किया गया। इसके बाद उन किसानों से प्रार्थना पत्र लिए गए जो पात्र होने के बावजूद योजना से वंचित रह गए थे। इन प्रार्थना पत्रों का सत्यापन करने के बाद नॉन एनपीए खातों में 5119 तथा एनपीए खातों में 15 किसान और पात्र मिले। इनको भी योजना का लाभ दे दिया गया। योजना के अंतिम चरण में करीब दो माह पहले तक 1120 और किसानों को शिकायतों के आधार पर चयनित किया गया। इनकी सूची शासन को भेजी गई। इस सूची के जाने के बाद योजना का पोर्टल बंद हो गया। अब कोई भी किसान इस योजना में आवेदन नहीं कर सकता है।
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अंतिम चरण में पात्र पाए गए 1120 किसानों की सूची शासन ने फिर से सत्यापित कराने के निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग के अधिकारी तहसील एवं बैंकों के माध्यम से इन किसानों का सत्यापन करा रहे हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद ही पात्र पाए गए इन किसानों का ऋण माफ किया जाएगा। उप कृषि निदेशक जसवीर तेवतिया का कहना है कि जो किसान पात्र पाए गए थे उन्हें ही योजना का लाभ दिया जाना है। अब यह योजना बंद हो गई है। अब अन्य किसी को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
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अभी भी चक्कर लगा रहे किसान
मुजफ्फरनगर। बड़ी संख्या में किसान अभी भी फसली ऋण मोचन योजना का लाभ पाने के लिए भटक रहे हैं। ग्राम लालखेड़ी के किसान ओमपाल का कहना है कि वह योजना में पात्र थे, लेकिन बैंक से उन्हें पात्र नहीं दर्शाया गया। उन्होंने कई बार ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन लाभ नहीं मिला। इसी तरह कई अन्य किसान कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों ने योजना बंद होने की बात कहते हुए उन्हें लाभ देने से इनकार कर दिया है।
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