फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Vegetables washed away in Hindon flood, farmers left empty handed

Muzaffarnagar News: हिंडन की बाढ़ में बह गईं सब्जियां, खाली हाथ रह गए किसान

Wed, 19 Jul 2023 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jul 2023 12:09 AM IST
विज्ञापन
Vegetables washed away in Hindon flood, farmers left empty handed
हिंडन में बाढ़ के पानी से नगलां राई में में बैगन की फसल खराब होने पर मायूस कामिल
कसौली, नगलां राई और बुड्ढ़ाखेड़ा आदि गांवों में छोटी जोत के किसान कर्ज में डूब
विज्ञापन




संवाद न्यूज एजेंसी

चरथावल। हिंडन में आई बाढ़ ने किसान और मजदूरों के लिए संकट खड़ा कर दिया। ठेके पर जमीन लेकर सब्जी उत्पादन करने वाले किसान-मजदूरों पर दोहरी मार पड़ गई है। कसौली, नगलां राई और बुड्ढ़ाखेड़ा आदि गांवों में छोटी जोत के किसान कर्ज में डूब गए है।

कसौली के मांगा, जसबीर, बिजेंद्र, सुभाष और संजय ने करीब 25 बीघा जमीन ठेके पर लेकर लौकी का बीज लगाकर तारबंदी और बांस लगाने में लाखों रुपये खर्च किए थे। ग्राम प्रधान नंद कुमार कश्यप ने बताया गांव में नदी के पास करीब पांच से छह हजार रुपये बीघा ठेके का रेट है। प्रकृति की मार से कई लाख के कर्ज में डूब गए। उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
विज्ञापन

बुड्ढ़ाखेड़ा के दो भाई रोहताश और संजय और रोहताश ने 15 15 बीघा जमीन 10 हजार रुपये प्रति बीघा पर ली थी। संजय की जमीन नदी किनारे थी। कर्ज पर दो लाख रुपये खीरे की फसल उत्पादन के लिए खर्च किए थे। उसकी पूरी फसल चौपट हो गई। सरकार से कब और कितना मुआवजा मिलेगा, इस पर निगाह टिकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन





ठेके की जमीन में बैंगन की फसल चौपट
नगलां राई के कामिल ने आठ हजार रुपये प्रति बीघा जमीन ठेके पर लेकर बैंगन का बीज बोया था। 65 हजार उत्पादन लागत आई थी। पांच बीघा अपनी जमीन में धान बोया था। हिंडन नदी एक रात में दोनों फसलों को चौपट कर गई। राजस्व विभाग पानी कम होने पर सर्वे करने की बात कर रहा है।

सात बीघा लौकी की बेल सूख गई

कसौली के दिनेश ने सात बीघा जमीन को छह हजार रुपये बीघा पर लेकर बांसों का जाल बनाकर लौकी का बीज बोया था। फसल खराब हो गई। रोजाना चरथावल मंडी में बेचकर घर परिवार का खर्च चलता था। बच्चों की पढ़ाई भी इसी कमाई पर टिकी थी। उत्पादन लागत के लिए लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे। यह चिंता है। देखना है कि शासन नुकसान की कितनी रकम तय करता है।

खेतों में बर्बाद ईख और चारा हो गया नष्ट

कसौली निवासी सूबेदार ध्यान सिंह का कहना है नदी किनारे से एक 15 बीघा का खेत में ईख और चारा खत्म हो गया। पूरे साल पशुओं को खिलाने के लिए बंदोबस्त करने की चिंता सता रही है। वहीं नगलां राई के मतलूब राई कहते है उनकी पांच बीघा गन्ने का खेत खराब हो गया। प्रशासन द्वारा मौके पर हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिलाए, तभी राहत मिल पाएगी।


श्मशान डूबने से अंतिम संस्कार करने में मुश्किल
चरथावल। परिवार में सदस्य के आकस्मिक निधन के बाद अंतिम संस्कार करने में दिक्कत आ रही है। श्मशान घाट डूबे पड़े है। मंगलवार को दूधली में बीमारी से सोनू की 10 साल की बेटी गोरी और रामबीर सैनी की मृत्यु हो गई। बुड्ढ़ाखेड़ा में स्वराज की मृत्यु हुई। दोनों गांवों में तीनों का अंतिम संस्कार खेतों में फसल कटवाकर करना पड़ा। इनके अलावा पिछले तीन दिनों में नदी के उफान के कारण छिमाऊ और दूधली में पीड़ितों द्वारा तीन अंतिम संस्कार में खेत में किए जा चुके है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed