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जीवन को पुण्य कर्म में लगाए- गुरुदत्त
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दिव्यांग आश्रम शुकतीर्थ संचालक राजेंद्र राणा को सम्मनित करते आर्य समाज के पुरोधा।
- फोटो : KHATAULI
जीवन को पुण्य कर्म में लगाएं : गुरुदत्त
मोरना। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के तहत शुकतीर्थ स्थित दिव्यांग आश्रम में आर्य समाज द्वारा यज्ञ और सत्संग किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सुख, शांति और समृद्धि के लिए जीवन को पुण्य कर्म में लगाएं।
शुकतीर्थ स्थित अखिल भारतीय विकलांग एवं अनाथ सेवा समिति द्वारा संचालित दिव्यांग आश्रम में वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं आनंद पाल सिंह आर्य के नेतृत्व में आर्यजनों ने संचालक वीरेंद्र सिंह राणा को महर्षि दयानंद का चित्र एवं ग्यारह हजार की सहयोग राशि भेंट की। यज्ञ उपरांत सत्संग में आर्य ने कहा कि असहाय, जरूरतमंद, निर्धन, दिव्यांगों की सेवा शुभ कर्म है। गृहस्थी अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार की भावना से दान करें। महर्षि दयानंद ने समाजोत्थान के लिए जीवन की आहुति दी थी। वेदों की ओर लौटों का आह्वान कर ऋषि ने अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग और कुरीतियों के खिलाफ देशभर में वैदिक क्रांति की। दिव्यांगों और अनाथ बच्चों की सेवा का संकल्प निभाकर वीरेंद्र एवं मीना राणा दंपती ने समाज को प्रेरणा दी है। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि अनुशासन, ईमानदारी और देशभक्ति के साथ समाज तथा राष्ट्र की सेवा कीजिए। संस्कृति और संस्कारों के प्रति संतान को दृढ़ बनाएं। आरपी शर्मा, गजेंद्र पाल सिंह राणा, मंगत सिंह आर्य, योगेश्वर दयाल, सोमपाल सिंह आर्य, राकेश ढींगरा, नरेंद्र मलिक आदि मौजूद रहे।
संस्कारों की चेतना जगाते रहे : ओमानंद
शुकतीर्थ। आर्य समाज के प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य गुरुदत्त आर्य के नेतृत्व में शुकदेव आश्रम में अधिष्ठाता स्वामी ओमानंद महाराज से भेंट की। स्वामी ने कहा कि गांव-गांव में यज्ञ, योग और संस्कारों की चेतना जागृत करने में आर्य समाज के कार्य प्रेरणाप्रद हैं। भावी पीढ़ी को सनातन संस्कृति को आत्मसात कराकर ही राष्ट्र सशक्त बनेगा। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनकी निष्काम राष्ट्र सेवा का नमन किया गया। इस मौके पर अंचल शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री और राजू आदि मौजूद रहे।
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मोरना। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के तहत शुकतीर्थ स्थित दिव्यांग आश्रम में आर्य समाज द्वारा यज्ञ और सत्संग किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सुख, शांति और समृद्धि के लिए जीवन को पुण्य कर्म में लगाएं।
शुकतीर्थ स्थित अखिल भारतीय विकलांग एवं अनाथ सेवा समिति द्वारा संचालित दिव्यांग आश्रम में वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं आनंद पाल सिंह आर्य के नेतृत्व में आर्यजनों ने संचालक वीरेंद्र सिंह राणा को महर्षि दयानंद का चित्र एवं ग्यारह हजार की सहयोग राशि भेंट की। यज्ञ उपरांत सत्संग में आर्य ने कहा कि असहाय, जरूरतमंद, निर्धन, दिव्यांगों की सेवा शुभ कर्म है। गृहस्थी अपनी सामर्थ्य के अनुसार परोपकार की भावना से दान करें। महर्षि दयानंद ने समाजोत्थान के लिए जीवन की आहुति दी थी। वेदों की ओर लौटों का आह्वान कर ऋषि ने अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग और कुरीतियों के खिलाफ देशभर में वैदिक क्रांति की। दिव्यांगों और अनाथ बच्चों की सेवा का संकल्प निभाकर वीरेंद्र एवं मीना राणा दंपती ने समाज को प्रेरणा दी है। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि अनुशासन, ईमानदारी और देशभक्ति के साथ समाज तथा राष्ट्र की सेवा कीजिए। संस्कृति और संस्कारों के प्रति संतान को दृढ़ बनाएं। आरपी शर्मा, गजेंद्र पाल सिंह राणा, मंगत सिंह आर्य, योगेश्वर दयाल, सोमपाल सिंह आर्य, राकेश ढींगरा, नरेंद्र मलिक आदि मौजूद रहे।
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संस्कारों की चेतना जगाते रहे : ओमानंद
शुकतीर्थ। आर्य समाज के प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य गुरुदत्त आर्य के नेतृत्व में शुकदेव आश्रम में अधिष्ठाता स्वामी ओमानंद महाराज से भेंट की। स्वामी ने कहा कि गांव-गांव में यज्ञ, योग और संस्कारों की चेतना जागृत करने में आर्य समाज के कार्य प्रेरणाप्रद हैं। भावी पीढ़ी को सनातन संस्कृति को आत्मसात कराकर ही राष्ट्र सशक्त बनेगा। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनकी निष्काम राष्ट्र सेवा का नमन किया गया। इस मौके पर अंचल शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री और राजू आदि मौजूद रहे।
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