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शिशुओं का टीकाकरण हुआ प्रभावित
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मुजफ्फरनगर। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण बढ़ने से शिशुओं का टीकाकरण और पोलियो ड्राप्स अभियान प्रभावित हुआ है। अप्रैल और मई माह में कोरोना के केस ज्यादा आने पर परिजन अपने नौनिहालों को लेकर टीकाकरण केंद्र पर कम ही आए। जनपद में शून्य से लेकर एक वर्ष तक के लक्षित 69 हजार 887 बच्चों की जनवरी माह में टीकाकरण की जो दर 10 प्रतिशत से अधिक थी, वो अप्रैल माह में पांच प्रतिशत तक रह गई।
जन्म में बाद बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए सात प्रकार के टीके लगाए जाते हैं। प्रसव के बाद शिशुओं को पोलियो ड्राप्स के अलावा बीसीजी, पेंटा और एमआर-1 का टीका लगाया जाता है। बच्चों को इनकी दूसरी डोज भी लगाई जाती है, हालांकि टीकाकरण 16 वर्ष तक के बच्चे का होता है। जिले के सभी सरकारी अस्पताल सीएचसी, पीएचसी, उप स्वास्थ्य सेवा केंद्र पर ये टीके शिशुओं को लगाए जाते हैं।
गत वर्ष मार्च से कोरोना काल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग कोविड के नियंत्रण में जुटा रहा, मगर जिले में बच्चों और गर्भवती महिलाओं का नियमित टीकाकरण बंद नहीं किया है। यह अभियान लगातार चल रहा है। जिला महिला चिकित्सालय पर प्रतिदिन टीके लगाए जाते है। जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को बच्चों को टीका लगाया जाता है, जबकि गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हर शुक्रवार को होता है।
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कोरोना की पहली लहर अक्तूबर के बाद कम होती चली गई थी, जिस कारण टीकाकरण अच्छा होता रहा। जनवरी, फरवरी माह में लक्ष्य का दस प्रतिशत से अधिक टीकाकरण किया गया। मगर मार्च माह से कोविड की दूसरी लहर शुरू होते ही अप्रैल माह में बच्चों का टीकाकरण कम हो गया।
मई में ज्यादा धीमा हुआ टीकाकरण
दूसरी लहर में पहले अप्रैल और फिर मई माह में ज्यादा केस मिलने पर टीकाकरण अभियान काफी धीमा हो गया। संक्रमण ज्यादा फैला तो छोटे बच्चे भी संक्रमित आए। साथ ही छोटे बच्चों को घर में ही रखने की हिदायत दी गई। जिस कारण परिजन अपने नौनिहालों को टीकाकरण केंद्र पर लेकर नहीं पहुंचे।
जनपद में कोरोना काल में भी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण अभियान बंद नहीं किया गया। सरकारी अस्पतालों में लगातार टीकाकरण हो रहा है। दूसरी लहर में संक्रमण अधिक होने से टीकाकरण प्रभावित हुआ है। अब हालात सामान्य होने लगे हैं, अब अधिक टीकाकरण होने की उम्मीद है। - डॉ. एमएस फौजदार, सीएमओ, मुजफ्फरनगर
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जन्म में बाद बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए सात प्रकार के टीके लगाए जाते हैं। प्रसव के बाद शिशुओं को पोलियो ड्राप्स के अलावा बीसीजी, पेंटा और एमआर-1 का टीका लगाया जाता है। बच्चों को इनकी दूसरी डोज भी लगाई जाती है, हालांकि टीकाकरण 16 वर्ष तक के बच्चे का होता है। जिले के सभी सरकारी अस्पताल सीएचसी, पीएचसी, उप स्वास्थ्य सेवा केंद्र पर ये टीके शिशुओं को लगाए जाते हैं।
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गत वर्ष मार्च से कोरोना काल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग कोविड के नियंत्रण में जुटा रहा, मगर जिले में बच्चों और गर्भवती महिलाओं का नियमित टीकाकरण बंद नहीं किया है। यह अभियान लगातार चल रहा है। जिला महिला चिकित्सालय पर प्रतिदिन टीके लगाए जाते है। जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में हर सप्ताह बुधवार और शनिवार को बच्चों को टीका लगाया जाता है, जबकि गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हर शुक्रवार को होता है।
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कोरोना की पहली लहर अक्तूबर के बाद कम होती चली गई थी, जिस कारण टीकाकरण अच्छा होता रहा। जनवरी, फरवरी माह में लक्ष्य का दस प्रतिशत से अधिक टीकाकरण किया गया। मगर मार्च माह से कोविड की दूसरी लहर शुरू होते ही अप्रैल माह में बच्चों का टीकाकरण कम हो गया।
मई में ज्यादा धीमा हुआ टीकाकरण
दूसरी लहर में पहले अप्रैल और फिर मई माह में ज्यादा केस मिलने पर टीकाकरण अभियान काफी धीमा हो गया। संक्रमण ज्यादा फैला तो छोटे बच्चे भी संक्रमित आए। साथ ही छोटे बच्चों को घर में ही रखने की हिदायत दी गई। जिस कारण परिजन अपने नौनिहालों को टीकाकरण केंद्र पर लेकर नहीं पहुंचे।
जनपद में कोरोना काल में भी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण अभियान बंद नहीं किया गया। सरकारी अस्पतालों में लगातार टीकाकरण हो रहा है। दूसरी लहर में संक्रमण अधिक होने से टीकाकरण प्रभावित हुआ है। अब हालात सामान्य होने लगे हैं, अब अधिक टीकाकरण होने की उम्मीद है। - डॉ. एमएस फौजदार, सीएमओ, मुजफ्फरनगर