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उत्कल के क्षतिग्रस्त डिब्बे में आग लगी
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:39 PM IST
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accident
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। उत्कल ट्रेन के क्षतिग्रस्त डिब्बे को हटाने के दौरान मंगलवार को हादसा हो गया। गैस कटर से काटते समय क्षतिग्रस्त रसोईयान डब्बे में आग लग गई। आग लगने से रेलवे कर्मचारी वहां से जान बचाकर भाग निकले। धुआं उठता देखकर जगत कॉलोनी के लोगों में अफरातफरी मची।
फायर ब्रिगेड और रेलवे कर्मचारियों ने अग्निशमन यंत्रों से बमुश्किल आग पर काबू पाया। आग बुझने पर कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद अधिकारियों ने ओएचई वायर को खंभों से उतरवाया और एक क्षतिग्रस्त डिब्बे को क्रेन से उठवाकर रेलवे ट्रैक पर रखवाया, जिसको दिल्ली से आई एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन ले गई। इन क्षतिग्रस्त डिब्बों को उठवाने को लेकर सवा सात घंटे का ब्लॉक लिया गया था।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में 19 अगस्त को जगत कालोनी के सामने उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन डिरेल हो गई थी। हादसे में 26 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक यात्री घायल हुए थे। इस हादसे के बाद से ट्रेन के 11 क्षतिग्रस्त डिब्बे जगत कॉलोनी के सामने रेलवे ट्रैक के बराबर में ही पड़े हुए थे।
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मेरठ से सहारनपुर सेक्शन तक रेलवे दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। ट्रेन के क्षतिग्रस्त डिब्बों को उठाने के लिए मंगलवार को रेलवे के कर्मचारी गैस कटर लेकर पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे कर्मचारियों ने गैस कटर से क्षतिग्रस्त रसोईयान को काटना प्रारंभ किया।
काटते समय उसमें आग लग गई। आग लगने से कर्मचारी जान बचा कर भागे। धुआं उठते देखकर कालोनी के लोगों में भी अफरातफरी मच गई। फायर ब्रिगेड और रेलवे कर्मचारियों ने अग्निश्मन यंत्रों से बमुश्किल आग पर काबू पाया। इसके बाद 11.45 बजे से 7 बजे तक ब्लॉक लिया गया। दिल्ली से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन क्रेन को लेकर पहुंची। इस क्रेन से जिस क्षतिग्रस्त कोच के पहिये सही थे, उसको रेलवे ट्रैक पर क्रेन द्वारा रखा गया। उस कोच को ट्रेन अपने साथ दिल्ली लेकर चली गई।
उधर, उत्कल के क्षतिग्रस्त रसोईयान में आग लगने की खबर फैली, तो लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। एक भी व्यक्ति आग बुझाने में दमकल कर्मियों के साथ लगने की हिम्मत नहीं जुटा सका। भीड़ दूर खड़ी होकर नजारा देखती रही।
ट्रेनों को रद्द करना पड़ा
रेलवे स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया कि क्षतिग्रस्त ट्रेन के डिब्बा हटवाने के लिए सवा सात घंटे का ब्लॉक लिया गया था। इस कारण अप व डाउन सभी ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। शाम तक डिब्बों को उठाने के कार्य में कर्मचारी लगे हुए थे। स्टेशन मास्टर ने बताया कि ब्लॉक का समय और भी बढ़वाया जा सकता है।
ओएचई तार हटवाए
क्षतिग्रस्त कोच को उठाने के लिए रेलवे अधिकारियों ने पहले एक किलोमीटर तक के ओएचई तारों को खंभों से हटवा दिया था, ताकि क्रेन के उठाते समय क्षतिग्रस्त कोच ओएचई तारों में टच न हो जाए। ओएचई तारों के हटवाने के बाद ही क्रेन से कोच को उठवाकर रेलवे ट्रैक पर रखवाया गया।
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फायर ब्रिगेड और रेलवे कर्मचारियों ने अग्निशमन यंत्रों से बमुश्किल आग पर काबू पाया। आग बुझने पर कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद अधिकारियों ने ओएचई वायर को खंभों से उतरवाया और एक क्षतिग्रस्त डिब्बे को क्रेन से उठवाकर रेलवे ट्रैक पर रखवाया, जिसको दिल्ली से आई एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन ले गई। इन क्षतिग्रस्त डिब्बों को उठवाने को लेकर सवा सात घंटे का ब्लॉक लिया गया था।
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गौरतलब है कि वर्ष 2017 में 19 अगस्त को जगत कालोनी के सामने उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन डिरेल हो गई थी। हादसे में 26 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक यात्री घायल हुए थे। इस हादसे के बाद से ट्रेन के 11 क्षतिग्रस्त डिब्बे जगत कॉलोनी के सामने रेलवे ट्रैक के बराबर में ही पड़े हुए थे।
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मेरठ से सहारनपुर सेक्शन तक रेलवे दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। ट्रेन के क्षतिग्रस्त डिब्बों को उठाने के लिए मंगलवार को रेलवे के कर्मचारी गैस कटर लेकर पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे कर्मचारियों ने गैस कटर से क्षतिग्रस्त रसोईयान को काटना प्रारंभ किया।
काटते समय उसमें आग लग गई। आग लगने से कर्मचारी जान बचा कर भागे। धुआं उठते देखकर कालोनी के लोगों में भी अफरातफरी मच गई। फायर ब्रिगेड और रेलवे कर्मचारियों ने अग्निश्मन यंत्रों से बमुश्किल आग पर काबू पाया। इसके बाद 11.45 बजे से 7 बजे तक ब्लॉक लिया गया। दिल्ली से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन क्रेन को लेकर पहुंची। इस क्रेन से जिस क्षतिग्रस्त कोच के पहिये सही थे, उसको रेलवे ट्रैक पर क्रेन द्वारा रखा गया। उस कोच को ट्रेन अपने साथ दिल्ली लेकर चली गई।
उधर, उत्कल के क्षतिग्रस्त रसोईयान में आग लगने की खबर फैली, तो लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। एक भी व्यक्ति आग बुझाने में दमकल कर्मियों के साथ लगने की हिम्मत नहीं जुटा सका। भीड़ दूर खड़ी होकर नजारा देखती रही।
ट्रेनों को रद्द करना पड़ा
रेलवे स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया कि क्षतिग्रस्त ट्रेन के डिब्बा हटवाने के लिए सवा सात घंटे का ब्लॉक लिया गया था। इस कारण अप व डाउन सभी ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। शाम तक डिब्बों को उठाने के कार्य में कर्मचारी लगे हुए थे। स्टेशन मास्टर ने बताया कि ब्लॉक का समय और भी बढ़वाया जा सकता है।
ओएचई तार हटवाए
क्षतिग्रस्त कोच को उठाने के लिए रेलवे अधिकारियों ने पहले एक किलोमीटर तक के ओएचई तारों को खंभों से हटवा दिया था, ताकि क्रेन के उठाते समय क्षतिग्रस्त कोच ओएचई तारों में टच न हो जाए। ओएचई तारों के हटवाने के बाद ही क्रेन से कोच को उठवाकर रेलवे ट्रैक पर रखवाया गया।