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सुप्रीम कोर्ट का फैसला सम्मानीय पर स्वीकार नहीं: उलमा
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कारी इस्हाक गोरा
- फोटो : DEVBAND
उलमा बोले, पांच एकड़ जमीन स्वीकार नहीं करेंगे मुसलमान
देवबंद (सहारनपुर)। तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती याद इलाही कासमी ने कहा कि कोर्ट का यह मानना कि मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई, एक तरह से मुसलमानों की जीत है। लोग इस फैसले का स्वागत करें।
आलमी रूहानी तहरीक के संरक्षक मौलाना हसनुल हाशमी ने फैसले को मायूसी वाला बताते हुए कहा कि देश का मुसलमान मस्जिद के बदले दी गई पांच एकड़ जमीन को कभी कबूल नहीं करेगा। हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़े हैं। बोर्ड आगे जो भी रुख अपनाएगा, उसका समर्थन किया जाएगा। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व आलिम-ए-दीन कारी इसहाक गोरा ने कहा कि फैसले का मुसलमान सम्मान करते हैं। बेहतर होता कि पूर्व में हाईकोर्ट के फैसले से मसले को सुलझा लिया होता। मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि कोर्ट ने यह माना है कि 12वीं सदी में उक्त स्थान पर कोई इमारत नहीं थी। जिससे इतना तो साफ हो जाता है कि मस्जिद का निर्माण किसी इमारत के ऊपर नहीं किया गया।
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देवबंद (सहारनपुर)। तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती याद इलाही कासमी ने कहा कि कोर्ट का यह मानना कि मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई, एक तरह से मुसलमानों की जीत है। लोग इस फैसले का स्वागत करें।
आलमी रूहानी तहरीक के संरक्षक मौलाना हसनुल हाशमी ने फैसले को मायूसी वाला बताते हुए कहा कि देश का मुसलमान मस्जिद के बदले दी गई पांच एकड़ जमीन को कभी कबूल नहीं करेगा। हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़े हैं। बोर्ड आगे जो भी रुख अपनाएगा, उसका समर्थन किया जाएगा। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व आलिम-ए-दीन कारी इसहाक गोरा ने कहा कि फैसले का मुसलमान सम्मान करते हैं। बेहतर होता कि पूर्व में हाईकोर्ट के फैसले से मसले को सुलझा लिया होता। मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि कोर्ट ने यह माना है कि 12वीं सदी में उक्त स्थान पर कोई इमारत नहीं थी। जिससे इतना तो साफ हो जाता है कि मस्जिद का निर्माण किसी इमारत के ऊपर नहीं किया गया।

मुफ्ती याद इलाही- फोटो : DEVBAND

मुफ्ती तारिक कासमी- फोटो : DEVBAND

मौलाना हशनुल हासमी- फोटो : DEVBAND
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