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रोजी-रोटी का संकट गहराया
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पैसेंजर ट्रेन नहीं चलने से रोज यात्रा करने वाले परेशान
मुजफ्फरनगर, खतौली। रेल द्वारा प्रतिदिन यात्रा कर अपने परिवार के लिए रोजी रोटी कमाने वाले लोगों के सामने पैसेंजर ट्रेन नहीं चलने से भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस को लेकर किए गए लॉकडाउन के दौरान बसें, रेलगाड़ियां शासन के आदेश के बाद बंद कर दी गई थी। जिस कारण सब कुछ थम गया था। अन लॉकडाउन के दौरान शासन ने कुछ रेलगाड़ियों के साथ-साथ बसों को संचालित कर दिया है। लेकिन पैसेंजर ट्रेन नहीं चलाई गई हैं, जो गरीब, डेली पैसेंजर करने वालों का आधार है। डेली यात्रा करने वाले यात्रियों ने पैसेंजर रेलगाड़ी चलाने के लिए शासन को उस पर विचार करने का कहना है।
- राजेंद्र कुमार का कहना है कि जब से रेलगाड़ी बंद हुई है, तभी से उनका काम भी बंद हो गया था। पैसेंजर रेलगाड़ी न चलने से उनका आना जाना भी बंद है, जिस कारण रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है।
-दिनेश कुमार का कहना है कि प्रतिदिन दिल्ली आना-जाना बस से बहुत महंगा पड़ता है, बस से डेली पैसेंजरी का काम नहीं किया जा सकता। सभी के काम काज शुरू हो गए हैं, लेकिन अभी भी डेली पैसेंजर रेलगाड़ी न चलने के कारण अपने घरों में ही कैद है।
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-छोटू का कहना है कि पैसेंजर रेलगाड़ी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में नौकरीपेशा यात्री जाते है, लेकिन रेलगाड़ी नहीं आने से कोई नहीं जा पा रहा है। इस रूट पर सहारनपुर से दिल्ली तक रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। उनके बारे में भी सरकार को सोचते हुए पैसेंजर रेलगाड़ी चलानी चाहिए।
-विशाल गुप्ता का कहना है कि रेलगाड़ी से कम खर्च पर यात्रा की जा सकती है, बसों का किराया इतना अधिक है कि उसे वहन नहीं कर पाते। रेलगाड़ी से एमएसटी के माध्यम से आना जाना हो जाता है। उनके पिता रोजाना दिल्ली आते-जाते हैं, किराया अधिक होने के कारण वह नहीं जा पा रहे हैं, जिस कारण कामकाज भी ठप है।
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मुजफ्फरनगर, खतौली। रेल द्वारा प्रतिदिन यात्रा कर अपने परिवार के लिए रोजी रोटी कमाने वाले लोगों के सामने पैसेंजर ट्रेन नहीं चलने से भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस को लेकर किए गए लॉकडाउन के दौरान बसें, रेलगाड़ियां शासन के आदेश के बाद बंद कर दी गई थी। जिस कारण सब कुछ थम गया था। अन लॉकडाउन के दौरान शासन ने कुछ रेलगाड़ियों के साथ-साथ बसों को संचालित कर दिया है। लेकिन पैसेंजर ट्रेन नहीं चलाई गई हैं, जो गरीब, डेली पैसेंजर करने वालों का आधार है। डेली यात्रा करने वाले यात्रियों ने पैसेंजर रेलगाड़ी चलाने के लिए शासन को उस पर विचार करने का कहना है।
- राजेंद्र कुमार का कहना है कि जब से रेलगाड़ी बंद हुई है, तभी से उनका काम भी बंद हो गया था। पैसेंजर रेलगाड़ी न चलने से उनका आना जाना भी बंद है, जिस कारण रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है।
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-दिनेश कुमार का कहना है कि प्रतिदिन दिल्ली आना-जाना बस से बहुत महंगा पड़ता है, बस से डेली पैसेंजरी का काम नहीं किया जा सकता। सभी के काम काज शुरू हो गए हैं, लेकिन अभी भी डेली पैसेंजर रेलगाड़ी न चलने के कारण अपने घरों में ही कैद है।
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-छोटू का कहना है कि पैसेंजर रेलगाड़ी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में नौकरीपेशा यात्री जाते है, लेकिन रेलगाड़ी नहीं आने से कोई नहीं जा पा रहा है। इस रूट पर सहारनपुर से दिल्ली तक रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। उनके बारे में भी सरकार को सोचते हुए पैसेंजर रेलगाड़ी चलानी चाहिए।
-विशाल गुप्ता का कहना है कि रेलगाड़ी से कम खर्च पर यात्रा की जा सकती है, बसों का किराया इतना अधिक है कि उसे वहन नहीं कर पाते। रेलगाड़ी से एमएसटी के माध्यम से आना जाना हो जाता है। उनके पिता रोजाना दिल्ली आते-जाते हैं, किराया अधिक होने के कारण वह नहीं जा पा रहे हैं, जिस कारण कामकाज भी ठप है।