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हमेशा दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए दानवीर बन जाते हैं फरिश्ते

Fri, 01 Oct 2021 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 12:03 AM IST
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To save the lives of others, angels become donors
राजेंद्र जैन - फोटो : MUZAFFARNAGAR
दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए दानवीर बन जाते हैं फरिश्ते
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मुजफ्फरनगर। बुलंद हौसले के साथ रक्तदान कर जिंदगी बचाने वाले दानवीरों की मुहिम बेमिसाल बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता, कारोबारी और शिक्षक हर कोई इस पुनीत कार्य में सहभागी बन रहे हैं। जिले से बाहर हायर सेंटरों में गंभीर मरीजों को नवजीवन देने वाले महादानियों की भूमिका किसी फरिश्ते से कम नहीं है। रक्तदान करने वालों ने कहा कि हमेशा लोगों को दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए आगे आना चाहिए।
दिल्ली जाकर कई बार कर चुके हैं रक्तदान
ककराला निवासी राजेंद्र जैन समाज सेवा का संकल्प लेकर 64 बार रक्तदान कर चुके हैं। पिछले दिनों हरिद्वार के मरीज को अपोलो हॉस्पिटल जाकर ब्लड दिया और उनकी जान बचाई। वर्ष 1998 से इस कार्य में जुटे जैन की खतौली में जनरल मर्चेंट की दुकान है। ब्लड डोनेट की खबर मिलते ही संबंधित हॉस्पिटल में दौड़ पड़ते हैं।
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रक्तदान से होती आनंद की अनुभूति
खतौली आवास विकास कॉलोनी के निवासी हरिओम को किसी असहाय की मदद करने मेें आनंद की अनुभूति होती है। वर्ष 2004 से 45 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। कहते हैं कि पिछले दिनों आनंद हॉस्पिटल मेरठ में एक मरीज का पैर कटने पर ऑपेरशन में खून की जरूरत पड़ी, तो उन्होंने रात को 12 बजे जाकर रक्तदान किया।
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शिक्षक का जज्बा बना है मिसाल
मौचड़ी गांव के अमरीश कुमार कुतुबपुर इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। उनका भी जज्बा मिसाल बना है। वर्ष 2007 से अब तक 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। कहते हैं कि खतौली के मरीज को बुखार के कारण प्लेटलेटस कम होने पर जान कर खतरा बढ़ गया था। सूचना मिलने पर रात को दो बजे उन्होंने वहां जाकर रक्तदान किया। मेरे लिए खुशी की बात है कि मरीज स्वस्थ हो गया।
24 बार ब्लड़ दे चुके नवीन
बड़ा बाजार निवासी नवीन गुप्ता समाजसेवा को लेकर संकल्पित है। वर्ष 2010 से रक्तदान करते आ रहे हैं। 24 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। डिलिवरी ऑपरेशन के दौरान समय बडसू गांव की सुमन को खून की कमी पाई गई। मालूम चलने पर वह रात को एक बजे मेरठ जाकर ब्लड दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ है।

वर्जन:
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर पीके त्यागी कहते हैं कि व्यापक प्रचार-प्रसार से हर साल कैंपों के जरिए रक्तदाताओं की संख्या बढ़ रही है। कई सालों से अमर उजाला की सराहनीय पहल से भी कैंपों के जरिये समाज में क्रांति आ रही है।
वर्ष----कुल कैंप--ब्लड यूनिट
2009-10--40--407
2010-11--32--448
2011-12--35--1187
2012-13--32--1308
2013-14--42--1441
2014-15--39--1836
2015-16--32--1743
2016-17--32--1853
2017-18--39--2222
2018-19--55--2780
2019-20--63--3184
2020-21--40--1715
(नोट-वर्ष 2020-2021 में कोरोना काल था)

हरिओम

हरिओम- फोटो : MUZAFFARNAGAR

अमरीश कुमार

अमरीश कुमार- फोटो : MUZAFFARNAGAR

नवीन गुप्ता

नवीन गुप्ता- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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