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35 साल पहले टिकैत ने फूंकी थी आंदोलन की चिंगारी

Sun, 05 Sep 2021 12:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 12:11 AM IST
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Tikait started the movement 35 years ago
35 साल पहले टिकैत ने फूंकी थी आंदोलन की चिंगारी
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मुजफ्फरनगर। किसान आंदोलन की चिंगारी 35 साल पहले भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने फूंकी थी। शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर से शुरू हुए किसान आंदोलन लखनऊ और दिल्ली की सरकारों को हिलाकर रख दी थी। अब दौर बदला है, लेकिन किसानों के तेवर तीखे होते चले गए।
राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर किसानों के दर्द की दवा करने के लिए हमदर्द जुटेंगे। लेकिन किसानों के बीच उनके मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत नहीं होंगे। असल में किसानों को बोलने और आवाज बुलंद करने की ताकत देने का काम चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने ही किया था। करमूखेड़ी से उठी आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में फैली। इस बार भले ही महापंचायत संयुक्त किसान मोर्चा की हो, लेकिन किसानों के दिल में टिकैत बसें हैं। केवल मंच के किरदार बदल गए हैं।
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इनसेट
इतिहास बन गए किसान आंदोलन
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी बिजलीघर पर आंदोलन
- एक अप्रैल 1987 को शामली की महापंचायत
- 11 अगस्त, 1987 को सिसौली की महापंचायत
- 27 जनवरी 1988 से मेरठ कमिश्ररी का घेराव
- छह मार्च 1988 से रजबपुर सत्याग्रह
- 25 अक्तूबर 1988 से वोट क्लब का धरना
- 30 अगस्त 1989 को भोपा आंदोलन
- 15 सितंबर 1990 की लखनऊ महापंचायत
- 23 सितंबर 1992 रामकोला आंदोलन
सत्ता की चूलें हिलाती रही हैं जीआईसी की पंचायतें
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर एक बार फिर किसानों की भीड़ लगी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इस मैदान पर हुई पंचायतें लखनऊ और दिल्ली की सत्ता में बैठे लोगों को मुश्किलों में डालती रही है। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के सिर पर पड़ी लाठी की चोट से यूपी, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के किसान जीआईसी के मैदान पर एकत्र हो गए थे। कांग्रेस के पूर्व विधायक पंकज मलिक के साथ हुए विवाद के बाद इसी मैदान पर किसानों का रैला उमड़ा था। गाजीपुर बॉर्डर पर भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आंसू गिरे तो इसी मैदान पर देश के किसान उमड़ पड़े थे। ब्यूरो
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