Kanwar Yatra: गन से वतन की रक्षा करने वालों ने वतन की सलामती को उठाया कंधे पर गंगा जल, सर पर हुक्का
राजस्थान के तीस कांवडियों की टोली में शामिल सेवानिवृत्त कैप्टन व सूबेदार भी गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।
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राजस्थान के तीस कांवडियों की टोली में शामिल सेवानिवृत्त कैप्टन व सूबेदार भी गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। सूबेदार राजबीर ने कारगिल की लड़ाई लड़ी थी और कैप्टन घनश्याम पाकिस्तान की सीमा पर सीना ताने दुश्मनों की हरकत का जवाब देते रहे। वह अपने साथियों के साथ वतन की सलामती को गंगोत्री से गंगाजल लेकर निकले हैं।
कैप्टन घनश्याम सूबेदार राजवीर सिंह राजस्थान के जिला करौली के रहने वाले हैं। वह अपने कांवडिया साथियों नरेश, शिवराम, राम भरोसे, हरि सिंह, कुलदीप, दीवान सिंह, अजीत सिंह, करतारा आदि सहित लगभग 30 लोगों की टोली मे गंगोत्री से जल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों पूर्व सैनिकों का कहना है कि अब वह वतन की सलामती के लिए पिछले कई वर्षों से गंगोत्री से पैदल गंगा जल लाकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। उनके साथ करौली जिले के लगभग आधा दर्जन गांवों के कांवड़िया साथी शामिल है। दोनों पूर्व सैनिक कावड़ियों का देश प्रेम वह आस्था को देखते हुए भोपा में सेवार्थ क्लब व कांवड़ सेवा शिविर के लोगों ने सम्मान किया।
कंधे पर गंगाजल, सर पर हुक्का
राजस्थान के जिला करौली के गांव कटारा निवासी 75 वर्षीय हरिसिंह गंगोत्री से पैदल गंगा जल लेकर अपने गंतव्य को बढ़ रहे हैं। उनके आकर्षण का केंद्र सर पर रखा हुक्का है। वह जहां आराम करते हैं उसी समय हुक्का सर से उतारता है बाकी समय सर पर रहता है। सर पर हुक्का रख उनका नृत्य करना भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।