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तीन तलाक से सुधरे महिलाओं के हालात

Thu, 30 Jul 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 12:03 AM IST
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Things improved for women due to triple talaq
तीन तलाक से सुधरे महिलाओं के हालात
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मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा 30 जुलाई 2019 को तीन तलाक को लेकर लागू किए गए मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम 2019 से मुस्लिम समाज में महिलाओं के हालात सुधरने लगे हैं। बदलते समाज में तीन तलाक के मामले भी कम हुए हैं, जिसकी पुष्टि कानून लागू होने के एक साल बाद के आंकड़े स्वत: ही कर रहे हैं। 30 जुलाई को कानून बनने के बाद वर्ष 2019 के शेष पांच माह में ही जनपद के थानों में तीन तलाक के 65 अभियोग पंजीकृत हुए थे, वहीं वर्ष 2020 के शुरूआती सात माह में यह संख्या घटकर महज 36 ही रह गई है। खास बात यह है कि शुरूआती दौर में तीन तलाक बिल का जमकर विरोध करने वाले मुस्लिम समाज के रहनुमाओं के साथ ही इसके विरोध में रहीं महिलाएं भी अब तीन तलाक की वकालत करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, कानून में इनके अनुरूप सुधार की थोड़ी गुंजाइश अभी बाकी है।
- महिला संबंधी मामलों को उठाने वाली सामाजिक संस्था अस्तित्व की अध्यक्ष रेहाना अदीब केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीन तलाक कानून के विरोध में सबसे आगे रहीं थीं। रेहाना अदीब कहती हैं कि शुरूआत में लगा था कि इस कानून को समुदाय विशेष को घेरने व मुस्लिम समाज के पुरुषों को प्रभावित करने के मकसद से बनाया गया है, लेकिन कानून बनने के बाद वे कई राजनीतिक हस्तियों व अन्य लोगों से मिलीं। इसे समझने के बाद भ्रांतियां कम हुईं। दरअसल, मुस्लिम समाज में तीन तलाक का इश्यू पहले से चला आ रहा है। मुस्लिम मर्दों ने इसे एक तरह से हथियार बना लिया था कि तीन तलाक कहकर पहली बीवी से पीछा छुड़ाओ, दूसरी से शादी कर लो। कानून बनने के बाद अब मर्दों के रौब कम हो गए हैं। अब एक बार में तीन तलाक नहीं बोला जा रहा है, जिससे महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी में भी सुधार आया है।
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- अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती जुल्फिकार कहते हैं कि मुस्लिम समाज में तीन तलाक का काफी अधिक मिसयूज था। जो लोग बात-बात में पत्नी को तीन तलाक दे देते थे, अब उनमें कानून का भय उत्पन्न हुआ है। इससे तीन तलाक के में भी काफी कमी आई है। इसी का नतीजा है कि समाज में तीन तलाक के केस अब न के बराबर रह गए हैं और महिलाओं के हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं।
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पति को सजा का प्रावधान है गलत
मुजफ्फरनगर। तीन तलाक कानून को लेकर शहर काजी तनवीर आलम का रवैया सामाजिक धारणा के एकदम उलट है। शहर काजी कहते हैं कि तीन तलाक को लेकर बनाए गए कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन इसमें पति को सजा का प्रावधान गलत है। मुस्लिम समाज में महिलाओं की स्थिति कितनी सुधरी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। तीन तलाक के रोजाना दो-तीन मामले होते थे, जिनमें लॉकडाउन की वजह से कमी आई है। वहीं, कानून लागू होने के बाद झूठे मुकदमों की संख्या भी बढ़ी है।
अब नहीं होते हलाला के मामले
मुजफ्फरनगर। सामाजिक संगठन अस्तित्व की अध्यक्ष रेहाना अदीब कहती हैं कि मुस्लिम समाज में अब हलाला के मामले नहीं होते हैं। प्राचीन समय में जरूर इस तरह के केस होते थे, लेकिन अब मुस्लिम समाज में भी लड़कियां पढ़ी-लिखी हैं, जो इस तरह के रिवाजों को बिल्कुल नहीं मानतीं हैं।

परामर्श केंद्र पर नहीं आते ऐसे मामले
मुजफ्फरनगर। तीन तलाक को लेकर मुस्लिम महिलाओं के सुधरते हालात की तस्कीद परामर्श केंद्र के आंकड़े भी कर रहे हैं। जनपद में पहले औसतन हर माह आने वाले दस से अधिक मामलों के सापेक्ष तीन तलाक कानून लागू हुए गत एक वर्ष में परामर्श केंद्र में इससे संबंधित कोई मामला नहीं आया है। एसएसपी अभिषेक यादव कहते हैं कि दरअसल, तीन तलाक संबंधी मामले पहले सामाजिक होते थे, लेकिन कानून बनने के बाद अब तीन तलाक होते ही महिलाएं सीधे कानून की शरण में पहुंचकर शौहर व ससुराल पक्ष के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराती हैं। वे परामर्श केंद्र जाकर समझौते की गुंजाइश ही नहीं रखती हैं।
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