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एक अच्छे परिवार में अनुशासन और आजादी दोनो होती है
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मुजफ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा ‘पारिवारिक संरचना की सामाजिक परिवर्तन में भूमिका‘ विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सुनील कुमार आर्य ने कहा कि परिवार सदस्यों का समाजीकरण करता है, साथ ही सामाजिक नियंत्रण का कार्य भी करता है, क्योंकि सभी नातेदार संबंधों की मर्यादा से बंधे होते हैं। एक अच्छे परिवार में अनुशासन और आजादी दोनों होती है।
उन्होंने कहा कि परिवार मनुष्य के जीवन का बुनियादी पहलू है। व्यक्ति का निर्माण और विकास परिवार में ही होता है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य नैसर्गिक क्रियाओं द्वारा आपस में जुड़े होते हैं और कुछ विवाह के पश्चात परिवार के सदस्य बनते हैं। समाज में परिवार के दो स्वरूप पाए जाते हैं, एकल परिवार और संयुक्त परिवार। एकल परिवार पश्चिमी देशों की सभ्यता है, जिसमें दंपती अपने बच्चों के साथ निवास करते हैं, पर परिवार का यह स्वरूप अब विश्व में देखा जा सकता है। परंतु संयुक्त परिवार की अवधारणा देश की संस्कृति की छवि को दिखाता है, जिसमें दो पीढ़ी से अधिक लोग एक साथ निवास करते हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार संयुक्त परिवार एक ऐसी संस्था है, जिससे व्यक्तियों की अनेक समस्याओं का समाधान होता है। संयुक्त परिवार में जब किसी भी सदस्य के ऊपर मुसीबत या परेशानी आती है तो सब सदस्य मिलकर उसे दूर करने का प्रयास करते है। जिसका उदाहरण हमें प्रत्यक्ष रूप से कोरोना काल में देखने को मिला। विभागाध्यक्ष रवि गौतम ने कहा कि समाज में बच्चों का जन्म और पालन पोषण परिवार में ही होता है। बच्चों का संस्कार करने और समाज के आचार व्यवहार सिखाने का कार्य मुख्य रूप से परिवार का ही होता है। इस वेबिनार में श्रीराम कॉलेज के सभी संकायों से प्रवक्तागण तथा छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की प्रवक्ता वैशाली गर्ग, शिवानी बर्मन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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उन्होंने कहा कि परिवार मनुष्य के जीवन का बुनियादी पहलू है। व्यक्ति का निर्माण और विकास परिवार में ही होता है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य नैसर्गिक क्रियाओं द्वारा आपस में जुड़े होते हैं और कुछ विवाह के पश्चात परिवार के सदस्य बनते हैं। समाज में परिवार के दो स्वरूप पाए जाते हैं, एकल परिवार और संयुक्त परिवार। एकल परिवार पश्चिमी देशों की सभ्यता है, जिसमें दंपती अपने बच्चों के साथ निवास करते हैं, पर परिवार का यह स्वरूप अब विश्व में देखा जा सकता है। परंतु संयुक्त परिवार की अवधारणा देश की संस्कृति की छवि को दिखाता है, जिसमें दो पीढ़ी से अधिक लोग एक साथ निवास करते हैं।
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उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के अनुसार संयुक्त परिवार एक ऐसी संस्था है, जिससे व्यक्तियों की अनेक समस्याओं का समाधान होता है। संयुक्त परिवार में जब किसी भी सदस्य के ऊपर मुसीबत या परेशानी आती है तो सब सदस्य मिलकर उसे दूर करने का प्रयास करते है। जिसका उदाहरण हमें प्रत्यक्ष रूप से कोरोना काल में देखने को मिला। विभागाध्यक्ष रवि गौतम ने कहा कि समाज में बच्चों का जन्म और पालन पोषण परिवार में ही होता है। बच्चों का संस्कार करने और समाज के आचार व्यवहार सिखाने का कार्य मुख्य रूप से परिवार का ही होता है। इस वेबिनार में श्रीराम कॉलेज के सभी संकायों से प्रवक्तागण तथा छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की प्रवक्ता वैशाली गर्ग, शिवानी बर्मन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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