{"_id":"68376115217fb70bcb0f81ca","slug":"the-world-kept-looking-at-the-craftsmanship-in-the-saree-of-engineer-daughter-preeti-singh-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1001-146653-2025-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: इंजीनियर बेटी प्रीति सिंह की साड़ी में कारीगरी को देखती रह गई दुनिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: इंजीनियर बेटी प्रीति सिंह की साड़ी में कारीगरी को देखती रह गई दुनिया
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में मास्टर कार्ड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राजा राजमन्नार की पत्नी ज्योति राजामन्नार ने कोटा जरी साड़ी पहनकर भारतीय संस्कृति और कारीगरी को प्रस्तुत किया। यह सिर्फ साड़ी की चर्चा नहीं है, बल्कि शहर की बेटी प्रीति सिंह के इंजीनियरिंग छोड़कर पुरातन कला को संजोने कहानी भी है। कोरोना के दौरान संघर्ष करते कारीगरों को बिटिया ने सोनचिरैया बनाकर नई जिंदगी दी।
कामयाबी की यह कहानी शामली के बनत कस्बे से शुरू होती है। किसान मामचंद के बेटे नरेंद्र सिंह मंडी समिति मुजफ्फरनगर में सचिव बन गए। तब परिवार शहर की जाट कॉलोनी में आकर रहने लगा। घर पर किसानों की आवाजाही रहती और लोक संस्कृति की खूब किस्सागोई चलती। जेवी पब्लिक स्कूल में पढ़ रही घर की बेटी प्रीति सिंह को यह बातें खूब भातीं। 12वीं के बाद साल 2006 से 10 तक मेरठ के आईआईएमटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की। सैमसंग एंड रिसर्च डेवलपमेंट में नौकरी की और चार साल तक देश-विदेश में खूब भ्रमण किया।
शादी के बाद पति हेमंग पारीक के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं। यहीं से जीवन फिर बदलना शुरू हुआ। इंजीनियरिंग छोड़कर साड़ी की कारीगरी में हाथ आजमाने का फैसला किया, लेकिन कोरोना काल के बाद जब वह अपनी ससुराल कोटा पहुंचीं तो यहां आर्थिक तौर पर कारीगर टूट चुके थे। समय पर भुगतान नहीं होने की आम समस्या थी।
विज्ञापन
कंपनी सोनचिरैया बनाकर कारीगरों को प्रोत्साहित किया और प्रत्येक बुधवार को उन्हें भुगतान दिया गया। कारीगर संतुष्ट हुए तो काम बढ़ने लगा। साड़ी में फूल पत्ती के बजाए एतिहासिक धरोहर और राजस्थान की कला को संजोने की पहल की, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।
n तीन लाख है कान्स वाली साड़ी की कीमत : मुजफ्फरनगर के कान्स में पहनी गई साड़ी की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। डबल टिश्यू तकनीक से बनी इस साड़ी में असली सोने-चांदी के धागे लगे थे, जिसे तैयार करने में तीन महीने का समय लगा।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में मास्टर कार्ड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राजा राजमन्नार की पत्नी ज्योति राजामन्नार ने कोटा जरी साड़ी पहनकर भारतीय संस्कृति और कारीगरी को प्रस्तुत किया। यह सिर्फ साड़ी की चर्चा नहीं है, बल्कि शहर की बेटी प्रीति सिंह के इंजीनियरिंग छोड़कर पुरातन कला को संजोने कहानी भी है। कोरोना के दौरान संघर्ष करते कारीगरों को बिटिया ने सोनचिरैया बनाकर नई जिंदगी दी।
कामयाबी की यह कहानी शामली के बनत कस्बे से शुरू होती है। किसान मामचंद के बेटे नरेंद्र सिंह मंडी समिति मुजफ्फरनगर में सचिव बन गए। तब परिवार शहर की जाट कॉलोनी में आकर रहने लगा। घर पर किसानों की आवाजाही रहती और लोक संस्कृति की खूब किस्सागोई चलती। जेवी पब्लिक स्कूल में पढ़ रही घर की बेटी प्रीति सिंह को यह बातें खूब भातीं। 12वीं के बाद साल 2006 से 10 तक मेरठ के आईआईएमटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की। सैमसंग एंड रिसर्च डेवलपमेंट में नौकरी की और चार साल तक देश-विदेश में खूब भ्रमण किया।
विज्ञापन
शादी के बाद पति हेमंग पारीक के साथ मुंबई शिफ्ट हो गईं। यहीं से जीवन फिर बदलना शुरू हुआ। इंजीनियरिंग छोड़कर साड़ी की कारीगरी में हाथ आजमाने का फैसला किया, लेकिन कोरोना काल के बाद जब वह अपनी ससुराल कोटा पहुंचीं तो यहां आर्थिक तौर पर कारीगर टूट चुके थे। समय पर भुगतान नहीं होने की आम समस्या थी।
विज्ञापन
कंपनी सोनचिरैया बनाकर कारीगरों को प्रोत्साहित किया और प्रत्येक बुधवार को उन्हें भुगतान दिया गया। कारीगर संतुष्ट हुए तो काम बढ़ने लगा। साड़ी में फूल पत्ती के बजाए एतिहासिक धरोहर और राजस्थान की कला को संजोने की पहल की, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।
n तीन लाख है कान्स वाली साड़ी की कीमत : मुजफ्फरनगर के कान्स में पहनी गई साड़ी की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। डबल टिश्यू तकनीक से बनी इस साड़ी में असली सोने-चांदी के धागे लगे थे, जिसे तैयार करने में तीन महीने का समय लगा।