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सच्चे साधु का समागम जीवन में परिवर्तन लाता है : भारत भूषण
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स्ट्रीट भागीरथी मंदिर में धर्म शिक्षा और नैतिक संस्कार शिविर का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। संत भारत भूषण महाराज ने कहा कि वीतराग विज्ञान ही कल्याण का सच्चा मार्ग है। सबसे अच्छी संगत साधु की होती है। सच्चे साधु का समागम जीवन में परिवर्तन लाता है। साधु अंतरात्मा की सफाई पर बल देते हैं। शांत जीवन के लिए सत साहित्य की शरण लेनी चाहिए।
कानूनगोयान स्ट्रीट भागीरथी मंदिर में धर्म शिक्षा और नैतिक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शुक्रवार को श्री निर्ग्रंथ जैन पाठशाला के 92 बच्चों को आचार्य श्री 108 भारत भूषण महाराज के सानिध्य में जिनाभिषेक एवं पूजन करना सिखाया गया। जैन संत ने कहा कि आत्म ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। सम्यक ज्ञानधारी सांसारिक दुखों से छुटकारा पा लेते हैं, लेकिन भौतिक ज्ञान संसार में भटकाता है, जहां राग द्वेष नहीं है, वहां सम्यक ज्ञान है। प्रेम वसुधैव कुटुंबकम की भावनाओं को जन्म देता है। उचित अनुचित का भेद जानना ही सफल जीवन का मूल मंत्र है।
छत्ते वाले मंदिर में चालीसा का पाठ हुआ। अनुशासित व्यवस्था संयोजन अरुण नंगली ने किया। धर्म सभा में सुशील, विवेक प्रवक्ता, संजय दादरी, प्रवीन जैन, रामकुमार, किशोर, कनिष्क, सार्थक, सुनील जैन, योगेश सराफ, प्रभात, रवि, पवन, शैंटी, पारस, संजय मुखिया, सौरभ सभासद, अरुण जैन, राजेंद्र जैन, दीपू जैन, अनवी, शिल्पी, प्रीति, सुनीता, सविता, शैली, सरिता, छवि, उमा, महेंद्री, दीपाली, संध्या, सरला, सुधांशु, स्नेह, संतोष, सोनिया मौजूद रहे।
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खतौली। संत भारत भूषण महाराज ने कहा कि वीतराग विज्ञान ही कल्याण का सच्चा मार्ग है। सबसे अच्छी संगत साधु की होती है। सच्चे साधु का समागम जीवन में परिवर्तन लाता है। साधु अंतरात्मा की सफाई पर बल देते हैं। शांत जीवन के लिए सत साहित्य की शरण लेनी चाहिए।
कानूनगोयान स्ट्रीट भागीरथी मंदिर में धर्म शिक्षा और नैतिक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शुक्रवार को श्री निर्ग्रंथ जैन पाठशाला के 92 बच्चों को आचार्य श्री 108 भारत भूषण महाराज के सानिध्य में जिनाभिषेक एवं पूजन करना सिखाया गया। जैन संत ने कहा कि आत्म ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। सम्यक ज्ञानधारी सांसारिक दुखों से छुटकारा पा लेते हैं, लेकिन भौतिक ज्ञान संसार में भटकाता है, जहां राग द्वेष नहीं है, वहां सम्यक ज्ञान है। प्रेम वसुधैव कुटुंबकम की भावनाओं को जन्म देता है। उचित अनुचित का भेद जानना ही सफल जीवन का मूल मंत्र है।
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छत्ते वाले मंदिर में चालीसा का पाठ हुआ। अनुशासित व्यवस्था संयोजन अरुण नंगली ने किया। धर्म सभा में सुशील, विवेक प्रवक्ता, संजय दादरी, प्रवीन जैन, रामकुमार, किशोर, कनिष्क, सार्थक, सुनील जैन, योगेश सराफ, प्रभात, रवि, पवन, शैंटी, पारस, संजय मुखिया, सौरभ सभासद, अरुण जैन, राजेंद्र जैन, दीपू जैन, अनवी, शिल्पी, प्रीति, सुनीता, सविता, शैली, सरिता, छवि, उमा, महेंद्री, दीपाली, संध्या, सरला, सुधांशु, स्नेह, संतोष, सोनिया मौजूद रहे।
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