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Muzaffarnagar News: तप धर्म का मुख्य उद्देश्य चित्त की मलिन वृत्तियों का उन्मूलन है
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बुढ़ाना। गांव अटाली के जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
- फोटो : samvad
खतौली/बुढ़ाना। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म पर नगर के सभी नौ जैन मंदिरों में जैन श्रद्धालुओं ने जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक पूजन, विधान व शांतिधारा की। जैन मंदिरों में झांकियों का प्रदर्शन किया गया। चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर पीसनोपाड़ा में अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के तत्वावधान में जयपुर से पधारे पंडित अखिल जैन शास्त्री ने उत्तम तप पर प्रवचन करते हुए बताया कि इच्छाओं के निरोध को तप कहते हैं। तप धर्म का मुख्य उद्देश्य चित्त की मलिन वृत्तियों का उन्मूलन है। तप का अर्थ मात्र अनशन व्रत या उपवास ही नही, अपितु आसक्ति कम करना होता हैं। जैन धर्म में 12 तपों का वर्णन है। जिसमे स्वाध्याय को परम् तप कहा गया है क्योंकि इसी से तप करने की और विशुद्धि बढ़ाने की जानकारी होती है।
दोपहर में कनिष्क शास्त्री ने बच्चों की कक्षा में सिखाया कि हमें स्वाध्याय पूर्वक तप और व्रत करने चाहिए। इसके पश्चात द्रव्य संग्रह शिविर की कक्षा हुई। आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारे तीर्थंकर का सभी श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। जिन मंदिरों में मांगलिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कलपेन्द्र जैन, डॉ ज्योति जैन, अरुण जैन, अशोक शास्त्री, संजय जैन, शैली जैन, सम्यक जैन, संजीव जैन, राजकुमार जैन उपस्थित रहे।
अटाली के जैन मंदिर में मनाया उत्तम तप धर्म दिवस : बुढ़ाना। अटाली श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दशलक्षण के सातवें दिन उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया। श्री जी को पांडुक शीला पर विराजमान कर अभिषेक एवं शांति धारा का आयोजन किया। शांति धारा का श्रेय जय कुमार जैन सरधना परिवार को प्राप्त हुआ। श्रावकों ने नित्य नियम पूजन, पर्व पूजन एवं विघ्न हरण महावीर महामंडल विधान किया व मंडल पर अर्घ समर्पित किए।
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विधानाचार्य पंडित मनोज जैन ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताया कि आत्म शुद्धि के लिए इच्छाओं का रोकना तप है। मानसिक इच्छाएं सांसारिक बाहरी पदार्थ में चक्कर लगाया करती हैं, अथवा शरीर के सुख साधनों में केंद्रीय रहती है।
इस मौके पर संजय जैन, राकेश जैन, प्रमोद जैन, राजेंद्र जैन, राजीव जैन, शिवानी जैन , संयम जैन, बिजेंदर सानू, उषा जैन, ऋतु जैन मौजूद रहे।
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दोपहर में कनिष्क शास्त्री ने बच्चों की कक्षा में सिखाया कि हमें स्वाध्याय पूर्वक तप और व्रत करने चाहिए। इसके पश्चात द्रव्य संग्रह शिविर की कक्षा हुई। आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारे तीर्थंकर का सभी श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। जिन मंदिरों में मांगलिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कलपेन्द्र जैन, डॉ ज्योति जैन, अरुण जैन, अशोक शास्त्री, संजय जैन, शैली जैन, सम्यक जैन, संजीव जैन, राजकुमार जैन उपस्थित रहे।
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अटाली के जैन मंदिर में मनाया उत्तम तप धर्म दिवस : बुढ़ाना। अटाली श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दशलक्षण के सातवें दिन उत्तम तप धर्म दिवस मनाया गया। श्री जी को पांडुक शीला पर विराजमान कर अभिषेक एवं शांति धारा का आयोजन किया। शांति धारा का श्रेय जय कुमार जैन सरधना परिवार को प्राप्त हुआ। श्रावकों ने नित्य नियम पूजन, पर्व पूजन एवं विघ्न हरण महावीर महामंडल विधान किया व मंडल पर अर्घ समर्पित किए।
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विधानाचार्य पंडित मनोज जैन ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताया कि आत्म शुद्धि के लिए इच्छाओं का रोकना तप है। मानसिक इच्छाएं सांसारिक बाहरी पदार्थ में चक्कर लगाया करती हैं, अथवा शरीर के सुख साधनों में केंद्रीय रहती है।
इस मौके पर संजय जैन, राकेश जैन, प्रमोद जैन, राजेंद्र जैन, राजीव जैन, शिवानी जैन , संयम जैन, बिजेंदर सानू, उषा जैन, ऋतु जैन मौजूद रहे।

बुढ़ाना। गांव अटाली के जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु- फोटो : samvad