फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   The health of soil is continuously deteriorating

लगातार बिगडता जा रहा है मिट्टी का स्वास्थ्य

Sat, 05 Dec 2020 12:05 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2020 12:05 AM IST
विज्ञापन
The health of soil is continuously deteriorating
लगातार बिगड़ता जा रहा है मिट्टी का स्वास्थ्य
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। जिले में मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार खराब होता जा रहा है। जमीन में जीवांश की कमी बढ़ रही है। पीएच मान बढ़ने से जमीन की ताकत कम होती जा रही है। फसल चक्र नहीं अपनाए जाने से यह हालत सामने आई है।
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के मृदा परीक्षण लैब अधिकारी डॉ अनिल कटियार का कहना है कि बीते नौ माह में उनके यहां 870 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है। जिले में जो स्थिति सामने आ रही है, उसमें बीते चार-पांच साल से मिट्टी का पीएच मान लगातार बढ़ रहा है। जमीन में ऊसरता बढ़ रही है। कार्बनिक पदार्थ की लगातार कमी हो रही है। जिले में जीवांश 0.3 से 0.5 तक पहुंच गया है। जो सामान्य रूप से 0.7 से 0.9 तक होना चाहिए। जनपद में जो जांच का रिजल्ट आ रहा है वह किसानों के लिए ठीक नहीं है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि हम लोगों ने गन्ने के खेतों की जो जांच कराई है। मिट्टी में पौधों के लिए 16 पौषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश है। किसान इनकी पूर्ति तो करता रहता है जो अन्य पोषक तत्व है उनकी पूर्ति जमीन में नहीं हो पा रही है। खेतों में देशी खाद और ढैंचे आदि का प्रयोग नहीं हो रहा है। फसल चक्र नहीं अपनाने से जमीन को सबसे ज्यादा नुकसान है।
विज्ञापन

फसल अवशेष जलाने से नष्ट हो रहे सूक्ष्म पोषक तत्व
मुजफ्फरनगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी पवन विश्वकर्मा ने बताया कि फसल के लिए जमीन में 16 पोषक तत्व होने चाहिए, जिनमें नौ बड़े और छह सूक्ष्म होते है। इन्हीं तत्वों से पौधे का विकास होता है। किसान फसल अवशेष जलाते है, जिससे भूमि की सूक्ष्म पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इससे भी भूमि उर्वरक शक्ति कम हो जाती है। इसलिए किसानों को फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए, बल्कि मल्चर कर उसका खाद बनाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रयोगशाला में नौ माह से एक भी जांच नहीं
मुजफ्फरनगर। जिला मुख्यालय पर स्थित भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में बीते नौ माह से एक भी जांच नहीं हुई है। मेरठ रोड स्थिति प्रयोगशाला में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि उनके यहां एक नमूने के परीक्षण के 102 रुपये लिए जाते हैं। बीते नौ माह से कोरोना के कारण उनके यहां एक भी जांच नहीं हुई है। इस संबंध में जब उप निदेशक कृषि जसवीर सिंह तेवतिया से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला के अधिकारी सहारनपुर बैठते हैं। नौ माह से जांच क्यों नहीं हो रही इनकी जानकारी ली जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed