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Muzaffarnagar News: सिलिंडर पर संकट से इलेक्ट्रिक केतली व इंडक्शन की मांग बढ़ी
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मुजफ्फरनगर। एलपीजी सिलिंडर की किल्लत और भविष्य में बढ़ सकती समस्याओं को देखते हुए महिलाओं ने अपनी रसोई की आदतों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। खपत कम करने के लिए महिलाएं कुछ कामों के लिए इलेक्ट्रिक केतली, इंडक्शन चूल्हा और माइक्रोवेव जैसे विकल्पों का अधिक उपयोग कर रही हैं, जिससे एलपीजी गैस की बचत हो सके।
इंदु राठी ने बताया कि चाय-पानी जैसे छोटे कामों के लिए अब इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इससे गैस की बचत हो रही है। इंडक्शन चूल्हे और माइक्रोवेव आजकल सभी घरों में प्रयोग किए जाते हैं। नीरूपमा गोयल का कहना है कि बहुत समय पहले दूरदर्शन पर गैस की बचत के लिए विज्ञापन आता था कि कि खाने को ढककर पकाएं, धीमा आंच पर खाना पकाएं, प्रेशर कुकर का ज्यादा प्रयोग करें आदि। आज के दौर में भी नई पीढ़ी को इन आदतों को अपनाना होगा ताकि गैस की खपत को कम किया जा सके।
अभिलाषा कपूर ने कहा कि खाना एक बार में प्लान करके बनाया जा रहा है ताकि बार बार गैस जलने से ज्यादा खपत न हो। दाल चावल और ज्यादा समय में पकने वाली सामग्री को दो से तीन घंटे भिगोकर बनाने, इलेक्ट्रिक केतली का प्रयोग गैस के प्रयोग को कम कर रहा है।
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इंदु राठी ने बताया कि चाय-पानी जैसे छोटे कामों के लिए अब इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इससे गैस की बचत हो रही है। इंडक्शन चूल्हे और माइक्रोवेव आजकल सभी घरों में प्रयोग किए जाते हैं। नीरूपमा गोयल का कहना है कि बहुत समय पहले दूरदर्शन पर गैस की बचत के लिए विज्ञापन आता था कि कि खाने को ढककर पकाएं, धीमा आंच पर खाना पकाएं, प्रेशर कुकर का ज्यादा प्रयोग करें आदि। आज के दौर में भी नई पीढ़ी को इन आदतों को अपनाना होगा ताकि गैस की खपत को कम किया जा सके।
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अभिलाषा कपूर ने कहा कि खाना एक बार में प्लान करके बनाया जा रहा है ताकि बार बार गैस जलने से ज्यादा खपत न हो। दाल चावल और ज्यादा समय में पकने वाली सामग्री को दो से तीन घंटे भिगोकर बनाने, इलेक्ट्रिक केतली का प्रयोग गैस के प्रयोग को कम कर रहा है।
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