{"_id":"61f9834d787bb31a07639aa1","slug":"the-bail-amount-was-given-to-the-opponent-in-the-enrollment-room-muzaffarnagar-news-mrt5754719194","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामांकन कक्ष में खाली जेब खड़े प्रतिद्धंदी को त्यागी ने थमाई जमानत राशि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामांकन कक्ष में खाली जेब खड़े प्रतिद्धंदी को त्यागी ने थमाई जमानत राशि
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के साथ स्वर्गीय राजेंद्र दत्त त्यागी
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नामांकन कक्ष में खाली जेब खड़े प्रतिद्वंद्वी को दी थी जमानत राशि
मुजफ्फरनगर। नए दौर के चुनाव मैदान में कोई नेता अकेला रह जाए तो बल्लियों उछल पड़ेगा। मिठाई बंटेगी और जश्न होगा। लेकिन पुराना दौर ऐसा नहीं था। चरथावल की माटी से निकले स्वतंत्रता सेनानी तीन बार के विधायक राजेंद्र दत्त त्यागी हमेशा सरलता, सादगी और आदर्शों की मिसाल रहे। त्यागी ने 1957 में चुनाव मैदान में अपने ही प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार की खुद जमानत राशि जमा कराई थी।
चरथावल निवासी राजेंद्र दत्त त्यागी तीन बार कांग्रेस से विधायक चुन गए, पर उन्होंने कभी उसूलों से समझौता नहीं किया। पहले राजनीति में रंजिश नहीं बल्कि स्वच्छ चुनाव लड़ते थे, कोई वैमनस्यता का मतलब नहीं था। इसकी मिसाल एमएलए रहें राजेंद्र दत्त ने 1957 शिकारपुर(खतौली) से चुनाव लड़ा, तो सोशलिस्ट पार्टी के जमीरूद्दीन की जमानत धनराशि खुद जमा करा दी थी।
1962 में गुटबाजी के कारण टिकट कट जाने के बाद भी निष्ठावान सिपाही के रूप में दूसरे प्रत्याशी को जिताकर विधान सभा भेजा था। उनकी सादगी से अभिभूत होकर लालबहादुर शास्त्री ने उन्हें पत्र द्वारा कर्मठता और ईमानदारी के लिए बधाई दी थी।
विज्ञापन
नई मंडी से चरथावल अड्डे जाते से पैदल
जीप थी, एमएलए का ताज सजा था, लेकिन शहर नई मंडी आवास से चरथावल जाने के लिए पैदल चरथावल बस स्टैंड जाया करते थे। एक बार उनके बेटे ने कहा पिता जी
आप पैदल क्यों जाते हों? इस पर उन्होंने कहा था, पैदल चलने से तंदुरुस्ती तो ठीक रहती ही है, 10 लोगों से संपर्क और जन संवाद भी होता है। चरथावल खेत में नौकर का खाना लेकर पैदल जाना उनकी आदत में शुमार था।
ठुकरा दिया था डिप्टी सीएम का पद
स्वर्गीय राजेंद्र त्यागी के बेटे आंनद प्रकाश त्यागी बताते है पिता की पार्टी के प्रति वफादारी बेमिसाल थी। पार्टी हाईकमान से 1961 में उन्हें डिप्टी सीएम बनने का ऑफर
मिला। लेकिन उन्होंने अपनी जगह वीरेंद्र वर्मा को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया। तब त्यागी ने कहा था कि जिले में हमसे ज्यादा जाट बिरादरी का वोट प्रतिशत ज्यादा है। इससे संगठन को मजबूती मिलेगी।
वकील बेटे की शादी में मिली थी साइकिल
बेटे आनंद प्रकाश त्यागी की बारात 1958 में भोपा क्षेत्र के मलपुरा निवासी एडीएम रहें शांतनु कुमार के यहां गई थी। वकील बेटा और पिता के एमएलए होने के बावजूद सिर्फ दो कार में बैठकर बाराती शादी में गए थे। तीन दिन रूकी बारात में मैनपुरी के सांसद महाराज सिंह यादव बस से पहुंचे थे। बेटे को दहेज में साइकिल मिली थी। जब साइकिल देने को भी क्रेज माना जाता था।
तीन बार चुने गए थे विधायक
ज्येष्ठ पुत्र आनंद त्यागी बताते है 1952 में आजाद भारत के पहले विधान सभा में चुनाव वह मुजफ्फरनगर दक्षिणी सीट से एमएलए बनें। 1957 में शिकारपुर (खतौली) और 1967 में मोरना से चुनाव जीतें। 1969 में चौैधरी चरण सिंह द्वारा बीकेड़ी का गठन करने के बाद जिले की आठों सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी हार गए थे। पिता ने 15 अक्तूबर 1968 को मुजफ्फरनगर में प्रांतीय सम्मेलन कराया। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिरकत थी।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। नए दौर के चुनाव मैदान में कोई नेता अकेला रह जाए तो बल्लियों उछल पड़ेगा। मिठाई बंटेगी और जश्न होगा। लेकिन पुराना दौर ऐसा नहीं था। चरथावल की माटी से निकले स्वतंत्रता सेनानी तीन बार के विधायक राजेंद्र दत्त त्यागी हमेशा सरलता, सादगी और आदर्शों की मिसाल रहे। त्यागी ने 1957 में चुनाव मैदान में अपने ही प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार की खुद जमानत राशि जमा कराई थी।
चरथावल निवासी राजेंद्र दत्त त्यागी तीन बार कांग्रेस से विधायक चुन गए, पर उन्होंने कभी उसूलों से समझौता नहीं किया। पहले राजनीति में रंजिश नहीं बल्कि स्वच्छ चुनाव लड़ते थे, कोई वैमनस्यता का मतलब नहीं था। इसकी मिसाल एमएलए रहें राजेंद्र दत्त ने 1957 शिकारपुर(खतौली) से चुनाव लड़ा, तो सोशलिस्ट पार्टी के जमीरूद्दीन की जमानत धनराशि खुद जमा करा दी थी।
विज्ञापन
1962 में गुटबाजी के कारण टिकट कट जाने के बाद भी निष्ठावान सिपाही के रूप में दूसरे प्रत्याशी को जिताकर विधान सभा भेजा था। उनकी सादगी से अभिभूत होकर लालबहादुर शास्त्री ने उन्हें पत्र द्वारा कर्मठता और ईमानदारी के लिए बधाई दी थी।
विज्ञापन
नई मंडी से चरथावल अड्डे जाते से पैदल
जीप थी, एमएलए का ताज सजा था, लेकिन शहर नई मंडी आवास से चरथावल जाने के लिए पैदल चरथावल बस स्टैंड जाया करते थे। एक बार उनके बेटे ने कहा पिता जी
आप पैदल क्यों जाते हों? इस पर उन्होंने कहा था, पैदल चलने से तंदुरुस्ती तो ठीक रहती ही है, 10 लोगों से संपर्क और जन संवाद भी होता है। चरथावल खेत में नौकर का खाना लेकर पैदल जाना उनकी आदत में शुमार था।
ठुकरा दिया था डिप्टी सीएम का पद
स्वर्गीय राजेंद्र त्यागी के बेटे आंनद प्रकाश त्यागी बताते है पिता की पार्टी के प्रति वफादारी बेमिसाल थी। पार्टी हाईकमान से 1961 में उन्हें डिप्टी सीएम बनने का ऑफर
मिला। लेकिन उन्होंने अपनी जगह वीरेंद्र वर्मा को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया। तब त्यागी ने कहा था कि जिले में हमसे ज्यादा जाट बिरादरी का वोट प्रतिशत ज्यादा है। इससे संगठन को मजबूती मिलेगी।
वकील बेटे की शादी में मिली थी साइकिल
बेटे आनंद प्रकाश त्यागी की बारात 1958 में भोपा क्षेत्र के मलपुरा निवासी एडीएम रहें शांतनु कुमार के यहां गई थी। वकील बेटा और पिता के एमएलए होने के बावजूद सिर्फ दो कार में बैठकर बाराती शादी में गए थे। तीन दिन रूकी बारात में मैनपुरी के सांसद महाराज सिंह यादव बस से पहुंचे थे। बेटे को दहेज में साइकिल मिली थी। जब साइकिल देने को भी क्रेज माना जाता था।
तीन बार चुने गए थे विधायक
ज्येष्ठ पुत्र आनंद त्यागी बताते है 1952 में आजाद भारत के पहले विधान सभा में चुनाव वह मुजफ्फरनगर दक्षिणी सीट से एमएलए बनें। 1957 में शिकारपुर (खतौली) और 1967 में मोरना से चुनाव जीतें। 1969 में चौैधरी चरण सिंह द्वारा बीकेड़ी का गठन करने के बाद जिले की आठों सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी हार गए थे। पिता ने 15 अक्तूबर 1968 को मुजफ्फरनगर में प्रांतीय सम्मेलन कराया। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिरकत थी।

आनंद त्यागी- फोटो : MUZAFFARNAGAR