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शिक्षक ऋण घोटाला उजागर होने से मची खलबली

Fri, 25 Dec 2020 12:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 12:08 AM IST
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Teacher loan scam exposed
शिक्षक ऋण घोटाला उजागर होने से मची खलबली
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मुजफ्फरनगर। शिक्षक ऋण घोटाला उजागर होने के बाद खलबली मच गई है। सीबीसीआईडी की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि प्राथमिक शिक्षक वेतन भोगी कर्मचारी ऋण समिति में शिक्षकों से पैसा लेकर नो ड्यूज दे दिए गए थे, जो पैसा जमा हुआ पदाधिकारी उसे हजम कर गए। बैंक में जो रकम जमा की उसके बारे में यह नहीं बताया कि यह कितने और किन शिक्षकों की है। सहकारी बैंक ने 274 शिक्षकों को नोटिस जारी किया, तो 130 ने यह स्वीकार कर लिया कि उनके ऊपर कुछ किस्तें बाकी है, जिन्हें वह जमा करने को तैयार हैं। बैंक का आरोप है कि बेसिक शिक्षा के लेखा विभाग ने सहयोग नहीं किया है। बैंक की शिक्षकों पर पांच करोड़ की मूल राशि है।
जिला सहकारी बैंक की शिवचौक शाखा के प्रबंधक पंकज कुमार ने बताया कि उन्होंने बीएसए और लेखाधिकारी को पत्र लिखकर यह जानकारी चाही थी कि एक अप्रैल 2011 से 31 अक्तूबर 2016 तक कितने शिक्षकों के वेतन से ऋण के पैसे की कटौती हुई है। बैंक ने समिति को जो ऋण दिया था, उसमें बीएसए ने शपथपत्र दिया था कि वह शिक्षकों के वेतन से किस्त बैंक में जमा कराएंगे। 2016 में समिति के सचिव संजय दहिया की मौत के बाद कुछ शिक्षकों ने यह समझा कि रिकार्ड जला दिया गया है। अब उनसे वसूली नहीं होगी।
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यदि किसी पर पांच-सात किस्त रुकी थी, तो उसने भी जमा नहीं कराई। कुल 500 शिक्षकों ने ऋण लिया था। इस समय 274 पर बकाया है। हाल ही में इन सबको पैसा जमा करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। अब तक 130 शिक्षक नोटिस का जबाब दे चुके हैं। इनमें से अधिकतम ने बकाया किश्त जमा करने की बात कही है। शाखा प्रबंधक ने कहा कि बीएसए और लेखाधिकारी से संपर्क किया, लेकिन सहयोग नहीं मिला। विभाग के रिकार्ड से यह मालूम हो जाता की कितने शिक्षकों से नियमित रूप से वेतन से पैसा काटा गया है। बैंक की मूल धनराशि ही पांच करोड़ बकाया है। ब्याज का पैसा अलग है।
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लेखा विभाग संदेह के घेरे में
मुजफ्फरनगर। बेसिक शिक्षा के लेखा विभाग के पास प्रत्येक शिक्षक का रिकार्ड है कि उसके वेतन से ऋण में कितनी कटौती हुई है। लेखा विभाग ने न तो बैंक को कोई रिकार्ड दिखाया और न ही सीबीसीआईडी को रिकार्ड दिया गया।

जिले में केवल दो समितियों में हुआ घपला
मुजफ्फरनगर। वेतनभोगी कर्मचारियों की जिले में 97 सहकारी समिति कार्यरत है। इनमें केवल दो समितियों में ही बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है। इसमें दूर संचार विभाग के कर्मचारियों की समिति और प्राथमिक शिक्षकों की समिति शामिल है। यहां खास बात यह है कि इन दोनों समितियों का एकाउंटेंट एक ही था। एकाउंटेंट श्रीकांत शर्मा दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों की समिति के घोटाले में जेल भी जा चुका है।
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