{"_id":"6994b890379666b7f60ec6c7","slug":"teach-farmers-the-tricks-of-prevention-of-red-rot-disease-and-better-production-muzaffarnagar-news-c-29-1-ktl1001-165351-2026-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: किसानों को लाल सड़न रोग से बचाव और बेहतर उत्पादन के गुर सिखाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: किसानों को लाल सड़न रोग से बचाव और बेहतर उत्पादन के गुर सिखाए
विज्ञापन
खतौली। गांव वाजिदपुर में वसंतकालीन गन्ना बुवाई को लेकर आयोजित किसान गोष्ठी में गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया। इस दौरान किसानों को लाल सड़न रोग से बचाव और बेहतर उत्पादन के गुर सिखाए गए।
गांव वाजिदपुर स्थित संजय राठी के गन्ना प्रदर्शन प्लाट पर आयोजित इस गोष्ठी में गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को को-15023 प्रजाति के महत्व पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने बताया कि लाल सड़न रोग से प्रभावित 0238 प्रजाति के स्थान पर किसानों को 0118, को-15023, को-98014 और को-शा-18231 जैसी नई और रोग प्रतिरोधी प्रजातियों को अपनाना चाहिए।
वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ना बीज के चयन में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने सलाह दी कि दो आंख के टुकड़ों को काटकर ही बुवाई करें और बुवाई से पूर्व फफूंदीनाशक से उपचारित अवश्य करें। सहफसली खेती को अपनाने से किसानों को अतिरिक्त आय अर्जित करने के सुझाव भी दिए गए। इस अवसर पर राजकुमार तोमर, नेत्रपाल तोमर और लक्ष्यदीप तोमर ने किसानों को मृदा जनित रोगों के प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार के महत्व पर जानकारी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव वाजिदपुर स्थित संजय राठी के गन्ना प्रदर्शन प्लाट पर आयोजित इस गोष्ठी में गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को को-15023 प्रजाति के महत्व पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने बताया कि लाल सड़न रोग से प्रभावित 0238 प्रजाति के स्थान पर किसानों को 0118, को-15023, को-98014 और को-शा-18231 जैसी नई और रोग प्रतिरोधी प्रजातियों को अपनाना चाहिए।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ना बीज के चयन में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने सलाह दी कि दो आंख के टुकड़ों को काटकर ही बुवाई करें और बुवाई से पूर्व फफूंदीनाशक से उपचारित अवश्य करें। सहफसली खेती को अपनाने से किसानों को अतिरिक्त आय अर्जित करने के सुझाव भी दिए गए। इस अवसर पर राजकुमार तोमर, नेत्रपाल तोमर और लक्ष्यदीप तोमर ने किसानों को मृदा जनित रोगों के प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार के महत्व पर जानकारी दी।
विज्ञापन