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जिले में बढ़ रहे टीबी के मरीज
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जिले में बढ़ रहे टीबी के मरीज
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण काल के चलते एक साल में उपचार नहीं होने से जनपद में टीबी मरीज बढ़ रहे हैं। अभी तक 4158 टीबी मरीज मिल चुके हैं। गंभीर बात यह है कि इनमें 280 बच्चे भी टीबी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार टीबी मरीजों को तलाश रहा है। उन्हें जनपद में 8700 मरीज होने का अनुमान है।
टीबी बीमारी अब लाइलाज नहीं है, बशर्ते उसका समय से और लगातार उपचार किया जाए। टीबी की रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग में अलग से क्षय रोग विभाग है। गत वर्ष कोरोना संक्रमण काल के कारण सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की सुविधा नहीं थी। समय पर उपचार नागरिकों को नहीं मिला, जिस कारण जनपद में टीबी के मरीज भी बढ़ गए। गत वर्ष जनवरी से लेकर दिसंबर तक टीबी के 5059 मरीज मिले थे। इस वर्ष अभी तक 4158 मरीज टीबी के मिल चुके हैं। इनमें 280 बच्चे टीबी से पीड़ित मिले हैं। जबकि अभी तीन महीने इस साल के बाकी है। स्वास्थ्य विभाग को भी 8700 मरीज होने का अनुमान है। जिनकी तलाश अभी की जा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेशचंद गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में उपचार नहीं मिलने से टीबी के मरीज बढ़ रहे है, जिन्हें तलाश कर उनका उपचार किया जा रहा है। आशाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर सर्वे कर मरीजों का चिह्नित कर रही हैं।
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बच्चों को गोद दिया जा रहा
मुजफ्फरनगर। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि टीबी से पीड़ित अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। सामाजिक संगठन, संस्थाएं, रोटरी, लायंस क्लब उन्हें गोद ले रहे हैं, ताकि उनकी हर संभव मदद की जा सके। दो दिन में 12 बच्चों को गोद लिया गया है।
डाट सेंटर से मिलती है नि:शुल्क दवा
- मरीज को 500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद भी
मुजफ्फरनगर। टीबी के मरीजों को डाट सेंटर से दवाई मिलती है। जनपद में वर्तमान में 350 डाट सेंटर चल रहे है, जहां से क्षेत्र से संबंधित मरीजों को दवाई नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। सरकार की ओर टीबी मरीजों को 500 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद भी दी जाती है।
- टीबी के लक्षण
- दो हफ्ते या उससे अधिक खांसी का होना
- दो हफ्ते या उससे अधिक बुखार का होना
- पिछले एक माह से सीने में दर्द रहना
- तेजी से वजन एवं भूख का कम होना
- पिछले एक माह में कभी भी बलगम में खून का आना
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मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण काल के चलते एक साल में उपचार नहीं होने से जनपद में टीबी मरीज बढ़ रहे हैं। अभी तक 4158 टीबी मरीज मिल चुके हैं। गंभीर बात यह है कि इनमें 280 बच्चे भी टीबी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार टीबी मरीजों को तलाश रहा है। उन्हें जनपद में 8700 मरीज होने का अनुमान है।
टीबी बीमारी अब लाइलाज नहीं है, बशर्ते उसका समय से और लगातार उपचार किया जाए। टीबी की रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग में अलग से क्षय रोग विभाग है। गत वर्ष कोरोना संक्रमण काल के कारण सरकारी अस्पतालों में ओपीडी की सुविधा नहीं थी। समय पर उपचार नागरिकों को नहीं मिला, जिस कारण जनपद में टीबी के मरीज भी बढ़ गए। गत वर्ष जनवरी से लेकर दिसंबर तक टीबी के 5059 मरीज मिले थे। इस वर्ष अभी तक 4158 मरीज टीबी के मिल चुके हैं। इनमें 280 बच्चे टीबी से पीड़ित मिले हैं। जबकि अभी तीन महीने इस साल के बाकी है। स्वास्थ्य विभाग को भी 8700 मरीज होने का अनुमान है। जिनकी तलाश अभी की जा रही है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेशचंद गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में उपचार नहीं मिलने से टीबी के मरीज बढ़ रहे है, जिन्हें तलाश कर उनका उपचार किया जा रहा है। आशाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर सर्वे कर मरीजों का चिह्नित कर रही हैं।
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बच्चों को गोद दिया जा रहा
मुजफ्फरनगर। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ लोकेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि टीबी से पीड़ित अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। सामाजिक संगठन, संस्थाएं, रोटरी, लायंस क्लब उन्हें गोद ले रहे हैं, ताकि उनकी हर संभव मदद की जा सके। दो दिन में 12 बच्चों को गोद लिया गया है।
डाट सेंटर से मिलती है नि:शुल्क दवा
- मरीज को 500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद भी
मुजफ्फरनगर। टीबी के मरीजों को डाट सेंटर से दवाई मिलती है। जनपद में वर्तमान में 350 डाट सेंटर चल रहे है, जहां से क्षेत्र से संबंधित मरीजों को दवाई नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। सरकार की ओर टीबी मरीजों को 500 रुपये प्रति माह आर्थिक मदद भी दी जाती है।
- टीबी के लक्षण
- दो हफ्ते या उससे अधिक खांसी का होना
- दो हफ्ते या उससे अधिक बुखार का होना
- पिछले एक माह से सीने में दर्द रहना
- तेजी से वजन एवं भूख का कम होना
- पिछले एक माह में कभी भी बलगम में खून का आना