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बाबूपुर के प्राचीन शिव मंदिर में पिंडी रूप में विराजमान हैं स्वयंभू शिव
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बाबूपुर के पिंडी रूप में विराजमान हैं स्वयंभू शिव
सहारनपुर, देवबंद। बाबूपुर गांव का प्राचीन शिव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों की मानें तो इस मंदिर में स्वयंभू भगवान शिव पिंडी रूप में विराजमान है। सावन में काफी संख्या में शिवभक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्व प्रधान स्व. चौधरी समय सिंह ने 1977 में कराया था। मंदिर तक पहुंचने के लिए देवबंद स्थित बाला सुंदरी देवी मंदिर के गेट से चार किमी पूरब में ग्राम बाबूपुर की उत्तर दिशा में आना पड़ता है। ग्रामीण श्याम सुंदर, नरेंद्र, जयचंद, दिनेश, चौधरी सुलकी सिंह, साधूराम मुंशी, चौधरी राजकुमार आदि ने बताया कि इतिहास विदों के अनुसार पूरे भारतवर्ष में इस प्रकार की शिव पिंडी और अर्धनारीश्वर की मूर्ति दो ही जगह स्थापित हैं। एक देवबंद के गांव बाबूपुर में तो दूसरी नेपाल में है। सावन में यहां आसपास ही नहीं दूर दराज से भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को शिवरात्रि पर जलाभिषेक की तैयारियां कर ली गईं हैं।
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सहारनपुर, देवबंद। बाबूपुर गांव का प्राचीन शिव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों की मानें तो इस मंदिर में स्वयंभू भगवान शिव पिंडी रूप में विराजमान है। सावन में काफी संख्या में शिवभक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्व प्रधान स्व. चौधरी समय सिंह ने 1977 में कराया था। मंदिर तक पहुंचने के लिए देवबंद स्थित बाला सुंदरी देवी मंदिर के गेट से चार किमी पूरब में ग्राम बाबूपुर की उत्तर दिशा में आना पड़ता है। ग्रामीण श्याम सुंदर, नरेंद्र, जयचंद, दिनेश, चौधरी सुलकी सिंह, साधूराम मुंशी, चौधरी राजकुमार आदि ने बताया कि इतिहास विदों के अनुसार पूरे भारतवर्ष में इस प्रकार की शिव पिंडी और अर्धनारीश्वर की मूर्ति दो ही जगह स्थापित हैं। एक देवबंद के गांव बाबूपुर में तो दूसरी नेपाल में है। सावन में यहां आसपास ही नहीं दूर दराज से भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को शिवरात्रि पर जलाभिषेक की तैयारियां कर ली गईं हैं।
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