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सुरबहार के दुर्लभ वादन का रसास्वादन
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 16 Oct 2015 12:42 AM IST
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मुजफ्फरनगर। स्पिक मैके की विरासत श्रंखला- 2015 में देश के एकमात्र ध्रुपद शैली में सुरबहार के कलाकार पंडित पुष्पराज कोश्ती ने ग्रेन चैंबर पब्लिक स्कूल कूकडा मंडी में भव्य प्रस्तुति दी। उनका एसएफडीएवी मंसूरपुर में भी कार्यक्रम हुआ।
स्पिक मैके देश की सदियों पुरानी विरासत को जीवित रखने के लिए कार्यक्रम चला रही है। देश की महान हस्तियों से छात्रों को साक्षात कराती है। इसी कड़ी में पंडित पुष्पराज कोश्ती ने ध्रुपद शैैली में सुरबहार जैसे दुर्लभ वाद्य में भव्य प्रस्तुति दी।
जीसी पब्लिक स्कूल कूकडा में प्रधानाचार्य आजाद वीर के साथ प्रबंध समिति के डॉ अशोक कुमार, विनोद संगल ने दीप प्रज्वलित किया। पंडित कोश्ती ने कार्यक्रम का प्रारंभ कर कहा वह उनसे धूम धड़ाम संगीत की अपेक्षा न रखें। सामवेद से जन्मा ध्रुपद गायन एवं वादन अध्यात्म से जुड़ा है।
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इसलिए सुनने वालों से भी ध्यान जैसी अवस्था की अपेक्षा की जाती है। कोश्ती ने प्रात: कालीन राग अहीर भैरव में सधे हुए अंदाज में आलाप प्रस्तुत किया। उन्होंने 12 मात्राओं को चौताल में निबद्घ एक रचना प्रस्तुत की। उन्होंने राग शुद्ध सारंग में आलाप को बहुत ही सुंदर शैली में प्रस्तुत किया।
इसके बाद उसी राग में चौताल और दस मात्राओं की सूर ताल में दो बंदिशें भी प्रस्तुत की। विद्यार्थियों से सवाल जवाब के माध्यम से उन्होंने सितार और सुरबहार का अंतर बताया। सुरबहार एक गंभीर साज है, जो हाथी की गति से चलता है। हिरन की तरह कुलाचे नहीं भरता। पखावज पर विवेक कुरांगले ने सुंदर संगत दी।
इससे पूर्व एसएफ डीएवी, मंसूरपुर में उन्होंने प्रस्तुति दी। प्रधानाचार्य पूनम चौधरी ने कलाकारों के साथ दीप प्रज्वलन किया। कार्यक्रम में राहुल सिंह, मीनू कुमार, मीनू कुमार, डॉ. मिनोचा, आरएम तिवारी, एनएन पंत, सोनल तिवारी, अभिनव त्यागी आदि का सहयोग रहा।
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स्पिक मैके देश की सदियों पुरानी विरासत को जीवित रखने के लिए कार्यक्रम चला रही है। देश की महान हस्तियों से छात्रों को साक्षात कराती है। इसी कड़ी में पंडित पुष्पराज कोश्ती ने ध्रुपद शैैली में सुरबहार जैसे दुर्लभ वाद्य में भव्य प्रस्तुति दी।
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जीसी पब्लिक स्कूल कूकडा में प्रधानाचार्य आजाद वीर के साथ प्रबंध समिति के डॉ अशोक कुमार, विनोद संगल ने दीप प्रज्वलित किया। पंडित कोश्ती ने कार्यक्रम का प्रारंभ कर कहा वह उनसे धूम धड़ाम संगीत की अपेक्षा न रखें। सामवेद से जन्मा ध्रुपद गायन एवं वादन अध्यात्म से जुड़ा है।
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इसलिए सुनने वालों से भी ध्यान जैसी अवस्था की अपेक्षा की जाती है। कोश्ती ने प्रात: कालीन राग अहीर भैरव में सधे हुए अंदाज में आलाप प्रस्तुत किया। उन्होंने 12 मात्राओं को चौताल में निबद्घ एक रचना प्रस्तुत की। उन्होंने राग शुद्ध सारंग में आलाप को बहुत ही सुंदर शैली में प्रस्तुत किया।
इसके बाद उसी राग में चौताल और दस मात्राओं की सूर ताल में दो बंदिशें भी प्रस्तुत की। विद्यार्थियों से सवाल जवाब के माध्यम से उन्होंने सितार और सुरबहार का अंतर बताया। सुरबहार एक गंभीर साज है, जो हाथी की गति से चलता है। हिरन की तरह कुलाचे नहीं भरता। पखावज पर विवेक कुरांगले ने सुंदर संगत दी।
इससे पूर्व एसएफ डीएवी, मंसूरपुर में उन्होंने प्रस्तुति दी। प्रधानाचार्य पूनम चौधरी ने कलाकारों के साथ दीप प्रज्वलन किया। कार्यक्रम में राहुल सिंह, मीनू कुमार, मीनू कुमार, डॉ. मिनोचा, आरएम तिवारी, एनएन पंत, सोनल तिवारी, अभिनव त्यागी आदि का सहयोग रहा।