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Muzaffarnagar News: घर में नहीं आती धूप, पत्नी रहने लगी चुप
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मुजफ्फरनगर। सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। घर में धूप नहीं आती, रोशनी की कमी रहती है। पत्नी गुमसुम रहने लगी है। यह परेशानी गांधी कॉलोनी में रहने वाले कपड़ा कारोबारी की है। रामपुरी निवासी एक बुजुर्ग भी काफी परेशान हैं, जिन्हें पिछले कई दिन से रात में देर तक नींद न आने की शिकायत है। जिला अस्पताल मानसिक रोग विभाग में ऐसे लक्षणों वाले रोगियों को लेकर उपचार के लिए परिजन पहुंच रहे हैं।
धीरे-धीरे ठंड बढ़ रही है। तापमान का ग्राफ नीचे जा रहा है। ठंड और घर में रोशनी की कमी के चलते लोगों को कई प्रकार की बीमारियां जकड़ रही हैं। मौसमी भावात्मक अवसाद भी इनमें से एक हैं। जिला अस्पताल ओपीडी में मानसिक रोगों से पीड़ित सैंकड़ों मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में परिवर्तन का विपरीत प्रभाव लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
सूरज की कम रोशनी और छोटा दिन डाल रहा प्रभाव
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि ठंड के दिनों में सूरज की रोशनी कम होने लगी है। दिन भी छोटा पड़ने लगा है। ऐसे में कुछ लोगों को सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर यानी मौसमी भावात्मक विकार की समस्या घेर रही हैं। जिन लोगों में यह समस्या पहले रही है, इस मौसम में उन्हें यह अधिक प्रभावित करती है। नए लोगों पर भी ऐसी बीमारी का हमला होता है। ऐसे हालात में मरीज गुमसुम हो जाता है। वह अधिक बातचीत नहीं करता। व्यवहार में चिड़चिड़ापन नजर आता है। उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो बिना वजह घर में लड़ रहे हैं। गुमसुम रहने लगे हैं, जबकि कुछ को रात में नींद नहीं आ रही। केस हिस्ट्री टटोली तो अधिकतर की परेशानी में समानता मिली, जिसमें घर के भीतर रोशनी की कमी शामिल है। बताया कि अक्सर घर में धूप का कम आना। लोगों का पूरे दिन घर पर ही मौजूद रहना। बाहर न निकलना भी परेशानी का कारण बन जाता है।
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धीरे-धीरे ठंड बढ़ रही है। तापमान का ग्राफ नीचे जा रहा है। ठंड और घर में रोशनी की कमी के चलते लोगों को कई प्रकार की बीमारियां जकड़ रही हैं। मौसमी भावात्मक अवसाद भी इनमें से एक हैं। जिला अस्पताल ओपीडी में मानसिक रोगों से पीड़ित सैंकड़ों मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मौसम में परिवर्तन का विपरीत प्रभाव लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
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सूरज की कम रोशनी और छोटा दिन डाल रहा प्रभाव
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पण जैन का कहना है कि ठंड के दिनों में सूरज की रोशनी कम होने लगी है। दिन भी छोटा पड़ने लगा है। ऐसे में कुछ लोगों को सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर यानी मौसमी भावात्मक विकार की समस्या घेर रही हैं। जिन लोगों में यह समस्या पहले रही है, इस मौसम में उन्हें यह अधिक प्रभावित करती है। नए लोगों पर भी ऐसी बीमारी का हमला होता है। ऐसे हालात में मरीज गुमसुम हो जाता है। वह अधिक बातचीत नहीं करता। व्यवहार में चिड़चिड़ापन नजर आता है। उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो बिना वजह घर में लड़ रहे हैं। गुमसुम रहने लगे हैं, जबकि कुछ को रात में नींद नहीं आ रही। केस हिस्ट्री टटोली तो अधिकतर की परेशानी में समानता मिली, जिसमें घर के भीतर रोशनी की कमी शामिल है। बताया कि अक्सर घर में धूप का कम आना। लोगों का पूरे दिन घर पर ही मौजूद रहना। बाहर न निकलना भी परेशानी का कारण बन जाता है।
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