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Muzaffarnagar News: बेटियों को लाठी चलाने का हुनर सिखा रहीं सुचित्रा
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राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर लाठी चलाने का प्रशिक्षण लेती लड़कियां स्रोत स्वयं
मुजफ्फरनगर। आज के दौर में बेटियों को पढ़ाने लिखाने और काबिल बनाने के लिए माता-पिता हर कोशिश कर रहे हैं लेकिन शिक्षिका सुचित्रा सैनी अपने अतिव्यस्त समय में वक्त निकालकर इन बेटियों को सही मायनों में पूर्ण सशक्त बना रही हैं। सुचित्रा पिछले दस साल से घर परिवार की जिम्मेदारी के साथ समाज की बेटियों को लाठी चलाने का हुनर सिखा रही हैं। उनका मानना है कि दुर्गा स्वरूपा बेटियों में असीम शक्ति है बस उसको सही दिशा और दीक्षा देने की जरूरत है।
राजकीय इंटर कॉलेज की शिक्षिका सुचित्रा सैनी अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं। निर्भया कांड से आहत होकर उन्होंने बेटियों को आत्मरक्षा के लिए जागरूक करने का कार्य शुरू किया। इसी चिंतन मनन के चलते उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति को चुना, जहां उन्होंने देखा कि संस्कारों के साथ महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार किया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने समाज की बेटियों को जागरूक और आत्मरक्षक बनाना शुरू किया।
घर से बाहर निकलने वाली बेटियों को बाजार, पार्क, स्कूल या फिर कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की प्रताड़ना न सहन करनी पड़े। इसके लिए उन्होंने घर घर जाकर बेटियों को ट्रेनिंग सेंटर आने के लिए मनाया। शुरूआत में यह संख्या मात्र पांच थी, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर आज 50 से अधिक बेटियां आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण ले रही हैं।
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आर्थिक तंगी से जूझती महिलाओं को सिखा रहीं हस्त कौशल
सुचित्रा बताती हैं कि उन्होंने आर्थिक तंगी से जूझ रही कई महिलाओं से उनकी बेबसी की कहानियां सुनी तो मन को कष्ट पहुंचा। कम पढ़ी लिखी महिलाओं को घर से जुड़े काम काज को रोजगार का जरिया बनाना सिखाया। महिलाओं को एक समूह में इकट्ठा कर अचार, चटनी, जैम, मुरब्बा बनाना सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। वह कहती हैं कि महिला को महिला की शक्ति बनना चाहिए।
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राजकीय इंटर कॉलेज की शिक्षिका सुचित्रा सैनी अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं। निर्भया कांड से आहत होकर उन्होंने बेटियों को आत्मरक्षा के लिए जागरूक करने का कार्य शुरू किया। इसी चिंतन मनन के चलते उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति को चुना, जहां उन्होंने देखा कि संस्कारों के साथ महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार किया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने समाज की बेटियों को जागरूक और आत्मरक्षक बनाना शुरू किया।
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घर से बाहर निकलने वाली बेटियों को बाजार, पार्क, स्कूल या फिर कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की प्रताड़ना न सहन करनी पड़े। इसके लिए उन्होंने घर घर जाकर बेटियों को ट्रेनिंग सेंटर आने के लिए मनाया। शुरूआत में यह संख्या मात्र पांच थी, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर आज 50 से अधिक बेटियां आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण ले रही हैं।
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आर्थिक तंगी से जूझती महिलाओं को सिखा रहीं हस्त कौशल
सुचित्रा बताती हैं कि उन्होंने आर्थिक तंगी से जूझ रही कई महिलाओं से उनकी बेबसी की कहानियां सुनी तो मन को कष्ट पहुंचा। कम पढ़ी लिखी महिलाओं को घर से जुड़े काम काज को रोजगार का जरिया बनाना सिखाया। महिलाओं को एक समूह में इकट्ठा कर अचार, चटनी, जैम, मुरब्बा बनाना सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। वह कहती हैं कि महिला को महिला की शक्ति बनना चाहिए।

राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर लाठी चलाने का प्रशिक्षण लेती लड़कियां स्रोत स्वयं