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सुतली बम, लडी बम से बहरापन: तनेजा

Sat, 26 Oct 2019 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2019 12:18 AM IST
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Strong firecrackers are harmful for children and the elderly
मुजफ्फरनगर। वरिष्ठ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ एमके तनेजा ने बताया है कि दीपावली पर पटाखे जलाते समय तीन बातों का ध्यान रखे। प्रथम सांस के रोगी रोशनी वाले पटाखो से दूर रहे, वहीं बच्चों को आग के अतिरिक्त उनकी कान की नली पतली होने के कारण ऊंची आवाज से अधिक नुकसान (बहरापन तथा टिनिटस) हो सकता है। यही बात 60 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति पर लागू होती है क्याेंकि उसके सुनने की हड्डियां जमने लगती है तथा कॉक्लिया का लचीलापन कम हो जाता है। लड़ी बम से बार-बार आवाज तथा सुतली बम की जोरदार ध्वनि अगर नजदीक से आती है तो कॉक्लिया को निश्चित रूप से नुकसान पहुंचता है। कान में रूई लगाकर तथा सर और कान के ऊपर कपड़ा बांध कर पटाखे छोड़ें। बच्चे, बूढे़ तथा गर्भवती महिला घर के अंदर ही रहें। विशेष बात है कि कान में भारी भारीपन, दर्द होने पर या अचानक कम सुनने पर कान में कोई तेल, दवा इत्यादि ना डाले। कान में होने वाली सांय-सांय को शांत मन से दोनों भवों के मध्य में ध्यान करते हुए भ्रामरी (ओम) के दीर्घ उच्चारण से लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
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